भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए पिछले 12 वर्षों की आर्थिक यात्रा को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत एक समय दुनिया की तथाकथित ‘Fragile Five’ अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता था, लेकिन अब देश दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बन चुका है। प्रधानमंत्री ने इस बदलाव का श्रेय देश की 140 करोड़ जनता की मेहनत, क्षमता और संकल्प को दिया।
प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब उनका स्वतंत्रता दिवस संबोधन आर्थिक विकास, आत्मनिर्भरता, युवाओं, तकनीक और 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य पर केंद्रित रहा। मोदी ने कहा कि आजादी के बाद भारत ने बड़े सपने देखे, लेकिन लंबे समय तक देश की विकास गति उन आकांक्षाओं के अनुरूप नहीं रही। उनके अनुसार, पिछले 12 वर्षों में देश ने इस स्थिति को बदलने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है।
‘Fragile Five’ से आर्थिक ताकत तक का सफर
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में आर्थिक परिवर्तन को खास तौर पर रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि एक समय वैश्विक स्तर पर भारत को ‘Fragile Five’ में शामिल किया जाता था। यह शब्द उन उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए इस्तेमाल किया गया था, जिन्हें बाहरी वित्तीय दबावों और आर्थिक अस्थिरता के प्रति अपेक्षाकृत कमजोर माना जाता था। भारत के साथ उस समूह में ब्राजील, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका और तुर्किये का नाम लिया जाता था।
मोदी ने कहा कि अब तस्वीर बदल चुकी है। उनके मुताबिक, भारत ने बीते 12 वर्षों में खुद को दुनिया की सबसे तेज बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने इसे केवल सरकारी नीतियों का परिणाम नहीं बल्कि देशवासियों की सामूहिक मेहनत का परिणाम बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने अपनी आर्थिक क्षमता का विस्तार करते हुए वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत की है। उन्होंने लोगों से आने वाले वर्षों में और बड़े लक्ष्य निर्धारित करने का आह्वान किया।
2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को भी प्रमुखता से दोहराया। भारत की आजादी की शताब्दी के वर्ष 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य सरकार के प्रमुख दीर्घकालिक एजेंडे में शामिल है।
मोदी ने कहा कि भारत को अब केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि तकनीक, विनिर्माण, रक्षा, ऊर्जा, शिक्षा, बुनियादी ढांचे और नवाचार जैसे क्षेत्रों में भी वैश्विक नेतृत्व हासिल करना होगा। उनके भाषण में आत्मनिर्भरता को इस लक्ष्य की महत्वपूर्ण आधारशिला के रूप में पेश किया गया।
आत्मनिर्भरता और विनिर्माण पर जोर
प्रधानमंत्री ने आर्थिक विकास के अगले चरण में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने ‘मेक इन इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे अभियानों के जरिए भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की बात कही।
MSME क्षेत्र को लेकर भी प्रधानमंत्री ने महत्वाकांक्षी लक्ष्य सामने रखे। उन्होंने छोटे और मध्यम उद्यमों से मुक्त व्यापार समझौतों का लाभ उठाकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में विस्तार करने का आह्वान किया। सरकार का लक्ष्य भारतीय कंपनियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम बनाना और निर्यात को बढ़ावा देना है
सेमीकंडक्टर और तकनीक पर बड़ी तैयारी
प्रधानमंत्री ने तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी भारत की भविष्य की आर्थिक शक्ति से जोड़ा। उन्होंने कहा कि देश में तीन सेमीकंडक्टर निर्माण संयंत्रों में उत्पादन शुरू हो चुका है और आने वाले वर्षों में 7-8 और संयंत्र स्थापित किए जाने की उम्मीद है।
सेमीकंडक्टर उद्योग को आधुनिक अर्थव्यवस्था की बुनियादी जरूरत माना जाता है। मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, रक्षा उपकरण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों के लिए चिप्स महत्वपूर्ण हैं।
भारत लंबे समय से सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। प्रधानमंत्री ने इसे आत्मनिर्भर भारत के व्यापक अभियान का हिस्सा बताया।
युवाओं को विकास का केंद्र बनाने पर जोर
स्वतंत्रता दिवस भाषण में प्रधानमंत्री ने देश के युवाओं को भी विकास यात्रा का प्रमुख आधार बताया। उन्होंने आने वाले समय में एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ट्रेनिंग देने की योजना का उल्लेख किया। साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की बात कही।
मोदी ने युवाओं से बड़े सपने देखने और नए क्षेत्रों में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उनका कहना था कि भारत की जनसांख्यिकीय ताकत तभी आर्थिक शक्ति में बदल सकती है, जब युवाओं को सही कौशल, अवसर और तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए।
गरीबी से बाहर निकलने का दावा
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में गरीबी कम होने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं और इसे देश के नागरिकों के प्रयासों का परिणाम बताया।
सरकार की ओर से गरीबी उन्मूलन, कल्याणकारी योजनाओं और आर्थिक अवसरों के विस्तार को विकास मॉडल का हिस्सा बताया जाता रहा है। स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में मोदी ने इसी व्यापक परिवर्तन को भारत की आर्थिक मजबूती से जोड़ने की कोशिश की।
‘सप्तधारा’ के जरिए विकास की रूपरेखा
प्रधानमंत्री ने भारत के भविष्य के लिए ‘शक्ति की सप्तधारा’ की अवधारणा भी रखी। इसके तहत विनिर्माण, कृषि एवं खाद्य उत्पादन, तकनीक और नवाचार, बुनियादी ढांचा, रक्षा क्षमता, हरित एवं नीली अर्थव्यवस्था और भारत की सॉफ्ट पावर जैसे क्षेत्रों पर जोर दिया गया।
इस दृष्टिकोण का उद्देश्य आर्थिक विकास को अलग-अलग क्षेत्रों में एक साथ गति देना है। प्रधानमंत्री ने संकेत दिया कि भारत को केवल सेवा क्षेत्र पर निर्भर रहने के बजाय विनिर्माण, कृषि-प्रसंस्करण, रक्षा उत्पादन और उभरती तकनीकों में भी अपनी क्षमता बढ़ानी होगी।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका
मोदी के भाषण में भारत की वैश्विक आर्थिक भूमिका को लेकर भी महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण सामने आया। उन्होंने भारतीय कंपनियों को वैश्विक स्तर पर बड़ी भूमिका निभाने की जरूरत बताई। सरकार का लक्ष्य अधिक भारतीय कंपनियों को दुनिया की बड़ी कॉरपोरेट सूची में पहुंचाना और भारतीय वित्तीय संस्थानों की वैश्विक स्थिति मजबूत करना है।
प्रधानमंत्री ने यह संदेश देने की कोशिश की कि भारत की आर्थिक यात्रा अब केवल घरेलू विकास तक सीमित नहीं है। देश वैश्विक बाजार, निवेश, तकनीक और उत्पादन के क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है।
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भाषण में राष्ट्रीय आत्मविश्वास का संदेश
प्रधानमंत्री का आर्थिक संदेश मूल रूप से राष्ट्रीय आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता के इर्द-गिर्द रहा। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी क्षमताओं पर भरोसा करना चाहिए और बाहरी निर्भरता कम करनी चाहिए।
उनका कहना था कि भारत ने जिन क्षेत्रों में कभी सीमित क्षमता के कारण दूसरे देशों पर निर्भरता रखी, वहां अब घरेलू क्षमताएं विकसित की जा रही हैं। सेमीकंडक्टर, रक्षा उत्पादन, ऊर्जा और तकनीक को उन्होंने इसी बदलाव के उदाहरण के तौर पर प्रस्तुत किया।
निष्कर्ष
80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन भारत की आर्थिक यात्रा और भविष्य के विकास लक्ष्य पर केंद्रित रहा। प्रधानमंत्री ने दावा किया कि 12 वर्षों में भारत ‘Fragile Five’ से निकलकर दुनिया की सबसे तेज बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बन गया है।
उन्होंने इस परिवर्तन का श्रेय देश की जनता को देते हुए 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य दोहराया। साथ ही आत्मनिर्भरता, विनिर्माण, MSME, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, युवाओं के कौशल और बुनियादी ढांचे को भारत की अगली विकास यात्रा के प्रमुख आधार के रूप में पेश किया।
प्रधानमंत्री के भाषण से स्पष्ट है कि सरकार आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक कहानी को केवल तेज GDP वृद्धि तक सीमित रखने के बजाय तकनीक, उत्पादन, रोजगार, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के व्यापक ढांचे में देख रही है। अब इस दृष्टिकोण को जमीनी स्तर पर कितनी सफलता मिलती है, यही 2047 के लक्ष्य की दिशा में भारत की वास्तविक प्रगति का महत्वपूर्ण पैमाना होगा।

