झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और परीक्षा प्रक्रिया में सुधार की मांग को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन सोमवार को उस समय तनावपूर्ण हो गया, जब हजारों प्रदर्शनकारी विधानसभा की ओर मार्च करने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कई परतों वाली बैरिकेडिंग को पार करने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन, आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों के बीच झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के नेता और छात्र आंदोलन से जुड़े देवेंद्र नाथ महतो भी मौजूद रहे।
प्रदर्शन के दौरान सामने आए वीडियो में कुछ छात्र महतो को कंधे पर उठाकर ले जाते हुए दिखाई दिए। पुलिस कार्रवाई के बीच प्रदर्शनकारियों का इस तरह एक-दूसरे का सहारा बनना आंदोलन की तीव्रता को दर्शाता है। महतो पिछले कई दिनों से भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आंदोलन और भूख हड़ताल से जुड़े हुए हैं।
क्यों सड़कों पर उतरे छात्र?
छात्रों का आंदोलन मुख्य रूप से झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) से जुड़ी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ है। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित पेपर लीक और ओएमआर शीट से जुड़ी शिकायतों की जांच तथा भर्ती परीक्षाओं में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, जरूरत पड़ने पर विवादित परीक्षाओं को रद्द करना और भविष्य की भर्ती परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी बनाना शामिल है। कुछ प्रदर्शनकारी मामलों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग भी कर रहे हैं।
झारखंड विधानसभा की ओर बढ़ा मार्च
सोमवार को बड़ी संख्या में छात्र रांची में एकत्र हुए और विधानसभा की ओर मार्च शुरू किया। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने रास्ते में कई स्तरों पर बैरिकेडिंग की थी।
जैसे-जैसे भीड़ आगे बढ़ी, स्थिति तनावपूर्ण होती गई। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की के बाद कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस ने वाटर कैनन चलाए और आंसू गैस के गोले छोड़े। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज भी किया गया
महतो को कंधे पर लेकर आगे बढ़े छात्र
प्रदर्शन की सबसे चर्चित तस्वीरों में से एक वह रही, जिसमें छात्र देवेंद्र नाथ महतो को कंधे पर उठाकर आगे बढ़ते नजर आए। आंदोलन में महतो की सक्रिय भूमिका रही है और वह परीक्षा संबंधी मांगों को लेकर भूख हड़ताल भी कर चुके हैं।
महतो की तबीयत को लेकर भी चिंता सामने आई। बाद की रिपोर्टों में कहा गया कि कई दिनों की भूख हड़ताल के बाद उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनके सहयोगी ने दावा किया कि लाठीचार्ज के दौरान उन्हें चोट भी लगी थी।
प्रदर्शनकारियों के लिए महतो आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक बन चुके हैं। ऐसे में उन्हें कंधे पर लेकर आगे बढ़ने का दृश्य आंदोलनकारियों के बीच एकजुटता का प्रतीक बनकर सामने आया।
पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
पुलिस की कार्रवाई के बाद छात्र संगठनों और राजनीतिक हलकों में भी सवाल उठने लगे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वे अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से सरकार तक पहुंचाने के लिए मार्च कर रहे थे और उनके खिलाफ बल प्रयोग किया गया।
दूसरी ओर, प्रशासन का तर्क है कि विधानसभा क्षेत्र की सुरक्षा के लिए निर्धारित प्रतिबंधों और बैरिकेडिंग का पालन जरूरी था। जब प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरा पार करने की कोशिश की, तब भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि बड़े छात्र आंदोलनों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और प्रदर्शन के लोकतांत्रिक अधिकार के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
सरकार और छात्रों के बीच पहले भी हुई बातचीत
झारखंड सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच इससे पहले बातचीत का दौर भी चला है। सरकार का कहना रहा है कि छात्रों की कई मांगों पर विचार किया गया है और संवाद के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश जारी है। इसके बावजूद आंदोलन खत्म नहीं हुआ और छात्र अपनी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
इससे संकेत मिलता है कि विवाद केवल एक प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि भर्ती परीक्षा व्यवस्था को लेकर युवाओं के बीच गहरी नाराजगी बनी हुई है।
JPSC के पूर्व अध्यक्ष की गिरफ्तारी ने बढ़ाई हलचल
इसी बीच झारखंड CID ने JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते को कथित भर्ती परीक्षा अनियमितताओं के मामले में गिरफ्तार किया है। उन्होंने 22 जुलाई को पद से इस्तीफा दिया था। यह गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है जब हजारों छात्र परीक्षा सुधार और कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
गिरफ्तारी के बाद आंदोलनकारियों को उम्मीद है कि जांच आगे बढ़ेगी और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े आरोपों की वास्तविकता सामने आएगी।
आगे और समाचार पढ़े:
- PM मोदी ने CWG पदक विजेताओं से की मुलाकात, खिलाड़ियों की शानदार कामयाबी को सराहा; बोले- देश को आप पर गर्व है
- Cash Flow Management: बिजनेस में पैसा कब आएगा और कब जाएगा, ऐसे करें प्लानिंग
- जंतर-मंतर प्रदर्शन पर संसद में गरमाया मुद्दा, अमित शाह देंगे जवाब; सरकार ने विपक्ष के सामने रखी शर्त
आंदोलन का अगला कदम क्या होगा?
विधानसभा मार्च और पुलिस कार्रवाई के बाद अब छात्रों की निगाहें सरकार की अगली कार्रवाई पर हैं। छात्र चाहते हैं कि उनकी मांगों पर केवल आश्वासन नहीं बल्कि स्पष्ट और समयबद्ध कदम उठाए जाएं।
वहीं सरकार के सामने भी चुनौती है कि एक ओर भर्ती प्रक्रिया में छात्रों के विश्वास को बहाल किया जाए और दूसरी ओर राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखी जाए।
निष्कर्ष
झारखंड का छात्र आंदोलन अब राज्य की राजनीति और प्रशासन के लिए गंभीर मुद्दा बन चुका है। सोमवार को रांची में विधानसभा की ओर बढ़े हजारों छात्रों और पुलिस के बीच टकराव के बाद वाटर कैनन, आंसू गैस और लाठीचार्ज की तस्वीरें सामने आईं।
देवेंद्र नाथ महतो को कंधे पर लेकर आगे बढ़ते छात्रों की तस्वीर ने इस आंदोलन की भावनात्मक तीव्रता को भी उजागर किया। दूसरी ओर, परीक्षा संबंधी कथित अनियमितताओं की जांच में JPSC के पूर्व अध्यक्ष की गिरफ्तारी ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
अब असली चुनौती सरकार और छात्रों के बीच भरोसा बहाल करने की है। यदि भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की जांच और युवाओं की शिकायतों पर ठोस कार्रवाई होती है, तो लंबे समय से जारी आंदोलन का समाधान निकल सकता है। लेकिन यदि संवाद और कार्रवाई के बीच दूरी बनी रहती है, तो झारखंड में छात्र आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।

