देश के कई हिस्सों में मानसून एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सक्रिय हो गया है। भारी से बहुत भारी बारिश के पूर्वानुमान के बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कई राज्यों में ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के साथ भूस्खलन, सड़कें बंद होने और अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। वहीं असम में पहले से गंभीर बाढ़ की स्थिति ने प्रशासन और राहत एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। राज्य में 1.55 लाख से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में हैं और राहत एवं बचाव अभियान जारी है।
मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर-मध्य भारत में सक्रिय निम्न दबाव क्षेत्र, मानसून ट्रफ और अन्य मौसमी प्रणालियां मिलकर बारिश की गतिविधियों को मजबूत कर रही हैं। इसका असर उत्तर भारत से लेकर पूर्वोत्तर और मध्य भारत के कई राज्यों तक दिखाई दे रहा है।
उत्तराखंड और हिमाचल में भारी बारिश का अलर्ट
पहाड़ी राज्यों में मौसम सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। उत्तराखंड के देहरादून, बागेश्वर, नैनीताल और चंपावत जैसे जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इन क्षेत्रों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। कुछ स्थानों पर 115.6 से 204.4 मिलीमीटर तक बारिश होने की संभावना बताई गई है।
भारी बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन, चट्टानें गिरने और सड़क संपर्क बाधित होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से मौसम की स्थिति को देखते हुए अनावश्यक यात्रा से बचने और स्थानीय चेतावनियों का पालन करने की अपील की है।
हिमाचल प्रदेश में भी कांगड़ा और सिरमौर के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जबकि बिलासपुर, मंडी और सोलन में येलो अलर्ट है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश होने पर छोटी नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है।
असम में बाढ़ की स्थिति गंभीर
पूर्वोत्तर भारत में असम सबसे गंभीर स्थिति का सामना कर रहा है। राज्य के कई इलाकों में बाढ़ का पानी घरों, सड़कों और दूसरी बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच गया है।
राज्य के आपदा प्रबंधन संबंधी आंकड़ों के अनुसार 1.55 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। रिपोर्ट में अब तक 101 लोगों की मौत की जानकारी दी गई है, जिनमें 60 पुरुष, 23 महिलाएं और 18 बच्चे शामिल हैं।
असम के पूर्वी हिस्से के कई जिले बाढ़ से विशेष रूप से प्रभावित बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव दल संवेदनशील क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ भोजन, पीने का पानी और जरूरी सामान उपलब्ध कराने में जुटे हैं।
मानसून में मध्य भारत में भी तेज बारिश का दौर
पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। इन क्षेत्रों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। कुछ स्थानों पर 115.6 से 204.4 मिलीमीटर तक बारिश हो सकती है।
इसके अलावा बिहार, छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, ओडिशा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और विदर्भ के कुछ हिस्सों में भी भारी बारिश का अनुमान है।
इन राज्यों में येलो अलर्ट जारी किया गया है। कई इलाकों में 64.5 से 115.5 मिलीमीटर तक बारिश हो सकती है।
दिल्ली-NCR में भी बारिश की संभावना
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में भी मौसम बदलने के संकेत हैं। दिल्ली में येलो अलर्ट जारी किया गया है और भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
दिल्ली में अधिकतम तापमान करीब 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान करीब 26 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। बादल छाए रहने और बारिश के कारण तापमान में कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन अचानक तेज बारिश होने पर सड़कों पर जलभराव और यातायात संबंधी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
नोएडा और ग्रेटर नोएडा सहित NCR के कुछ हिस्सों में भी मौसम तेजी से बदल सकता है। ऐसे में वाहन चालकों को जलभराव वाले रास्तों पर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
बारिश से खेती को फायदा, लेकिन फसलों पर भी खतरा
मानसून की बारिश खेती के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन लगातार और अत्यधिक बारिश किसानों के लिए नुकसान का कारण भी बन सकती है।
कृषि विशेषज्ञों ने प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को खेतों में जल निकासी की व्यवस्था मजबूत करने और बंद नालियों को साफ रखने की सलाह दी है। तैयार फसलों को जल्द काटकर सुरक्षित एवं सूखे स्थान पर रखने की सलाह भी दी गई है।
बारिश और आंधी के दौरान कीटनाशक या उर्वरक का छिड़काव नहीं करने की सलाह दी गई है, क्योंकि इससे फसल पर अपेक्षित असर नहीं पड़ सकता और संसाधनों की बर्बादी हो सकती है।
आगे और समाचार पढ़े:
- कोई एक पैर पर तो कोई कीलों की शैय्या पर… मिलिए इस बार के अनोखे कांवड़ियों से, एक ने 15 लाख रुपये की कांवड़ से खींचा ध्यान
- गंगा नदी को प्रदूषण से बचाने का मिशन, जानिए Namami Gange योजना की पूरी जानकारी
- Production Linked Incentive क्या है और कंपनियों को कैसे मिलता है नकद इंसेंटिव? जानिए आसान भाषा में
लोगों को सावधानी बरतने की सलाह
मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन ने लोगों से आधिकारिक मौसम चेतावनियों पर नजर रखने की अपील की है। गरज-चमक के दौरान खुले मैदान, अकेले पेड़, नदी, तालाब और अन्य खुले स्थानों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वालों को रवाना होने से पहले सड़क और मौसम की स्थिति की जानकारी लेने को कहा गया है। भूस्खलन की आशंका वाले इलाकों में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों से जलभराव वाले रास्तों और तेज बहाव वाले पानी को पार नहीं करने की अपील की गई है।
निष्कर्ष
देश में मानसून का मौजूदा दौर राहत और चुनौती दोनों लेकर आया है। एक ओर बारिश से गर्मी से राहत और कृषि क्षेत्र को फायदा मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन का खतरा, मध्य भारत में भारी बारिश और असम में गंभीर बाढ़ की स्थिति चिंता बढ़ा रही है।
असम में 1.55 लाख से अधिक लोगों के प्रभावित होने और 101 मौतों की रिपोर्ट के बीच राहत एजेंसियों के सामने चुनौती बड़ी है।
ऐसे में आने वाले दिनों में मौसम विभाग के अलर्ट पर नजर रखना, प्रशासन के निर्देशों का पालन करना और संवेदनशील इलाकों में अनावश्यक यात्रा से बचना बेहद जरूरी होगा। मानसून की बारिश कितनी राहत देगी और कितनी चुनौती, इसका जवाब आने वाले दिनों के मौसम पर निर्भर करेगा।

