Beti Bachao Beti Padhao उस सोच को बदलने के लिए शुरू की गई थी, जो बेटी के जन्म को बोझ मानती थी। कभी घटते बाल लिंगानुपात के आंकड़े देश के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुके थे और यह योजना ठीक उसी समस्या की जड़ पर वार करने के लिए बनाई गई। दस साल से ज्यादा का सफर तय करने के बाद अब यह सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक व्यापक जनआंदोलन बन चुकी है। आइए इस योजना की पूरी जानकारी विस्तार से समझते हैं।
Beti Bachao Beti Padhao क्या है?
Beti Bachao Beti Padhao की शुरुआत 22 जनवरी 2015 को हरियाणा के पानीपत से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। यह योजना महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय के संयुक्त प्रयास से चलाई जाती है, जिसमें बाद में कौशल विकास मंत्रालय और अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय भी जुड़ गए।
इसके तीन मुख्य स्तंभ हैं, लिंग-आधारित भ्रूण हत्या रोकना, बेटियों के जीवन और सुरक्षा को सुनिश्चित करना, और उनकी शिक्षा को बढ़ावा देना। मात्रात्मक लक्ष्य बाल लिंगानुपात सुधारना है, जबकि गुणात्मक लक्ष्य समाज की मानसिकता बदलना है।
यह Mission Shakti के तहत कैसे काम करती है
15वें वित्त आयोग की अवधि से यह योजना मिशन शक्ति के सम्बल वर्टिकल के अंतर्गत आ चुकी है, जो देश के सभी जिलों में पूरी तरह केंद्र सरकार की फंडिंग से चलाई जाती है। सम्बल वर्टिकल में वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन 181 और नारी अदालत जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं।
हर जिले को मिलने वाली सालाना फंडिंग सीधे उस जिले के लिंगानुपात के आंकड़ों से जुड़ी होती है, यानी परफॉर्मेंस के आधार पर संसाधन तय किए जाते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर बेहतर नतीजे देने की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है।
अब तक की उपलब्धियां
राष्ट्रीय स्तर पर जन्म के समय लिंगानुपात 2014-15 के 918 से बढ़कर 930 तक पहुंच चुका है, जो इस योजना की सबसे बड़ी सफलताओं में गिना जाता है। इसके साथ ही माध्यमिक स्तर पर लड़कियों का सकल नामांकन अनुपात भी 75.51 प्रतिशत से बढ़कर 80.2 प्रतिशत हो गया है।
2026-27 के केंद्रीय बजट में इसके लिए 28,183 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो 2025-26 के 24,374 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से ज्यादा है। यह बढ़ता बजट सरकार की इस योजना के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता को दिखाता है।

BBBP 2.0 में क्या नया है
दस साल पूरे होने पर इस योजना को BBBP 2.0 के रूप में और मजबूत किया गया है, जिसमें प्रगति पर नजर रखने के लिए डिजिटल टूल्स के बेहतर इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। STEM विषयों में लड़कियों का नामांकन बढ़ाने और डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने पर भी खास फोकस किया जा रहा है।
640 से ज्यादा जिलों में लागू यह योजना अब सिर्फ सरकारी दफ्तरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सरकारी एजेंसियों, मीडिया, सिविल सोसाइटी और आम जनता को साथ जोड़कर एक जनआंदोलन का रूप ले चुकी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सवाल: Beti Bachao Beti Padhao की पूरी जानकारी कहां मिलेगी?
जवाब: आधिकारिक जानकारी महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
सवाल: Beti Bachao Beti Padhao की शुरुआत कब और कहां हुई थी?
जवाब: इसकी शुरुआत 22 जनवरी 2015 को हरियाणा के पानीपत से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी।
सवाल: Beti Bachao Beti Padhao के तीन मुख्य स्तंभ क्या हैं?
जवाब: लिंग-आधारित भ्रूण हत्या रोकना, बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उनकी शिक्षा को बढ़ावा देना, ये तीन मुख्य स्तंभ हैं।
सवाल: यह अब किस बड़ी योजना का हिस्सा है?
जवाब: यह अब मिशन शक्ति के सम्बल वर्टिकल के अंतर्गत आती है और पूरी तरह केंद्र सरकार की फंडिंग से चलती है।
सवाल: लिंगानुपात में कितना सुधार हुआ है?
जवाब: राष्ट्रीय स्तर पर जन्म के समय लिंगानुपात 2014-15 के 918 से बढ़कर 930 तक पहुंच चुका है।
उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।
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