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Social Enterprise कैसे काम करता है? मुनाफे के साथ समाज को फायदा कैसे मिलता है

Social Enterprise उन उद्यमियों के लिए एक भरोसेमंद रास्ता है, जो सिर्फ मुनाफा कमाने के बजाय समाज में असली बदलाव भी लाना चाहते हैं। दुनियाभर में एक करोड़ से ज्यादा ऐसे उद्यम मौजूद हैं, जो सालाना दो ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का राजस्व जनरेट करते हैं। भारत में भी अरविंद आई केयर और सेल्को जैसे उदाहरण दिखाते हैं कि सामाजिक मकसद और भरोसेमंद बिजनेस मॉडल एक साथ चल सकते हैं। आइए समझते हैं कि यह मॉडल असल में कैसे काम करता है।

Social Enterprise क्या है

यह एक ऐसा बिजनेस मॉडल है, जो मुनाफा कमाने के साथ-साथ किसी सामाजिक या पर्यावरणीय समस्या को हल करने के मकसद से भी काम करता है। आम बिजनेस से इसका मुख्य फर्क यह है कि यहां सफलता सिर्फ मुनाफे से नहीं, बल्कि लोगों, समाज और पर्यावरण पर पड़ने वाले असली असर से भी मापी जाती है, जिसे अक्सर “ट्रिपल बॉटम लाइन” कहा जाता है।

Social Enterprise के प्रकार

नॉन-प्रॉफिट मॉडल में संस्था अपनी सेवाएं बेचकर या दान इकट्ठा करके सामाजिक कार्यों के लिए पैसा जुटाती है और पूरा मुनाफा उसी मकसद में वापस लगाया जाता है। फॉर-प्रॉफिट मॉडल में कंपनी सामान्य बिजनेस की तरह ही मुनाफा कमाती है, लेकिन उसका मूल उद्देश्य किसी सामाजिक समस्या को हल करना होता है, जैसे किफायती सोलर एनर्जी या सस्ती शिक्षा उपलब्ध कराना।

हाइब्रिड मॉडल दोनों को मिलाता है, जहां एक नॉन-प्रॉफिट और एक फॉर-प्रॉफिट यूनिट साथ मिलकर काम करती हैं, जिससे रिसर्च और डिलीवरी दोनों में संतुलन बना रहता है।

भारत में Social Enterprise के उदाहरण

अरविंद आई केयर सिस्टम कम कीमत में लाखों लोगों को आंखों का इलाज मुहैया कराता है, जबकि अमीर मरीजों से ली गई फीस गरीब मरीजों के मुफ्त इलाज को सपोर्ट करती है। सेल्को कम आय वाले परिवारों तक किफायती सोलर एनर्जी पहुंचाता है, और अमूल का सहकारी मॉडल लाखों डेयरी किसानों की जिंदगी बदल चुका है।

Social Enterprise कैसे शुरू करें

सबसे पहले वह असली समस्या पहचानें, जिसे आप हल करना चाहते हैं, और यह तय करें कि क्या आपका मॉडल नॉन-प्रॉफिट, फॉर-प्रॉफिट या हाइब्रिड होगा। अगर नॉन-प्रॉफिट स्ट्रक्चर चुना है, तो Companies Act 2013 के सेक्शन 8 के तहत रजिस्ट्रेशन कराना होता है, जो NGO और सामाजिक उद्यमों के लिए सबसे भरोसेमंद कानूनी ढांचा माना जाता है।

Social Enterprise के तहत हैंडलूम पर बुनाई करते हाथ
Social Enterprise के जरिए आजीविका देने वाला एक हैंडलूम शिल्प

अगर फॉर-प्रॉफिट मॉडल चुना है, तो सामान्य बिजनेस की तरह ही सही कानूनी रजिस्ट्रेशन जरूरी है, इसके लिए हमारी Incorporation गाइड मददगार साबित हो सकती है। बड़े स्तर पर लॉन्च करने से पहले छोटे स्तर पर आइडिया टेस्ट करना समझदारी है, ताकि असली मांग और असर दोनों समझे जा सकें, इस पर हमारी Lean Startup गाइड पढ़ी जा सकती है।

प्रोडक्ट बेचकर आमदनी कमाने वाले सामाजिक उद्यमों के लिए ब्रांड बनाने की रणनीति समझना भी उपयोगी रहता है, इस पर हमारी D2C Brand गाइड भी पढ़ी जा सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

सवाल: क्या Social Enterprise से मुनाफा कमाना गलत माना जाता है?
नहीं, मुनाफा कमाना पूरी तरह सही है, बल्कि यही मुनाफा उद्यम को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने में मदद करता है।

सवाल: Social Enterprise और NGO में क्या फर्क है?
NGO ज्यादातर दान और अनुदान पर निर्भर रहते हैं, जबकि Social Enterprise अपनी सेवाओं या प्रोडक्ट बेचकर खुद अपनी आमदनी जनरेट करते हैं।

सवाल: क्या Section 8 कंपनी में शेयरधारकों को मुनाफा मिल सकता है?
नहीं, इस ढांचे में पूरा मुनाफा संस्था के मूल उद्देश्य में वापस लगाना अनिवार्य है, इसे सदस्यों में बांटा नहीं जा सकता।

सवाल: Social Enterprise से जुड़ी आधिकारिक जानकारी कहां मिल सकती है?
इस विषय पर विस्तृत जानकारी के लिए Wikipedia का यह पेज एक भरोसेमंद अतिरिक्त स्रोत है।

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उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

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