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CJP के बाद सोशल मीडिया पर छाया ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’, इंस्टाग्राम पर 50 लाख से अधिक फॉलोअर्स; नई बहस हुई तेज

देश में हाल ही में हुए छात्र आंदोलनों और सोशल मीडिया आधारित अभियानों के बाद अब एक नया डिजिटल अभियान ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ (Reservation Hatao Andolan – RHA) तेजी से चर्चा का विषय बन गया है। इंस्टाग्राम पर सक्रिय इस अभियान ने कुछ ही दिनों में 50 लाख से अधिक फॉलोअर्स जुटा लिए हैं और यह देश के सबसे तेजी से बढ़ते सामाजिक-राजनीतिक डिजिटल अभियानों में शामिल हो गया है। अभियान खुद को किसी भी राजनीतिक दल से असंबद्ध बताते हुए नागरिकों द्वारा संचालित आंदोलन होने का दावा करता है।

यह अभियान ऐसे समय में सामने आया है जब हाल के महीनों में Cockroach Janta Party (CJP) के नेतृत्व में हुए छात्र आंदोलन ने राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा बटोरी थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि CJP की सोशल मीडिया आधारित रणनीति की सफलता के बाद अब विभिन्न मुद्दों पर ऐसे डिजिटल अभियानों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

क्या है ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’?रिजर्वेशन

इंस्टाग्राम पर सक्रिय यह समूह जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था में बदलाव अथवा उसे समाप्त करने की मांग करता है। अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल में यह संगठन स्वयं को “Citizen-backed Movement” यानी नागरिकों द्वारा समर्थित अभियान बताता है और दावा करता है कि उसका किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है। अभियान के संचालकों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।

समूह का कहना है कि शिक्षा और सरकारी नौकरियों में अवसर योग्यता (Merit) तथा आर्थिक आवश्यकता के आधार पर मिलने चाहिए। इसके साथ ही वह सरकारी प्रक्रियाओं में जाति की अनिवार्यता समाप्त करने जैसी मांगें भी उठा रहा है।

अभियान की प्रमुख मांगें

अभियान से जुड़े पोस्ट और वीडियो में कई प्रमुख मांगें सामने रखी गई हैं। इनमें शिक्षा और सरकारी नौकरियों में जाति आधारित आरक्षण समाप्त करने, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को समान अवसर देने, सरकारी फॉर्मों में जाति संबंधी जानकारी की आवश्यकता कम करने तथा सभी नागरिकों के लिए समान प्रतिस्पर्धा की व्यवस्था लागू करने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। अभियान का दावा है कि वर्तमान व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है ताकि समान अवसर सुनिश्चित किए जा सकें।

हालांकि यह स्पष्ट करना भी आवश्यक है कि ये अभियान की मांगें हैं, न कि सरकार की नीति या कोई घोषित संवैधानिक प्रस्ताव।

रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन-सोशल मीडिया पर तेज़ी से बढ़ी लोकप्रियता

रिपोर्टों के अनुसार इस अभियान ने कुछ ही दिनों में इंस्टाग्राम पर 50 लाख से अधिक फॉलोअर्स का आंकड़ा पार कर लिया। इसके पोस्ट लाखों बार देखे जा रहे हैं और बड़ी संख्या में युवा इसके कंटेंट को साझा कर रहे हैं। अभियान का इंस्टाग्राम अकाउंट नियमित रूप से वीडियो, इन्फोग्राफिक्स और विचार आधारित पोस्ट प्रकाशित कर रहा है।

विश्लेषकों का कहना है कि इंस्टाग्राम, यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अब युवाओं के लिए केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रह गए हैं, बल्कि वे सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा तथा जनमत निर्माण के प्रमुख मंच बनते जा रहे हैं।

CJP के बाद नए अभियान

हाल के दिनों में CJP की लोकप्रियता के बाद कई नए डिजिटल अभियान सामने आए हैं। इनमें E20 Janta Party तथा Reservation Hatao Andolan प्रमुख हैं। ये सभी अलग-अलग सार्वजनिक मुद्दों पर केंद्रित हैं और स्वयं को नागरिक-आधारित पहल बताते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोशल मीडिया के माध्यम से संगठित ऐसे अभियान पारंपरिक राजनीतिक संगठनों से अलग शैली में काम कर रहे हैं और विशेष रूप से युवाओं तक तेजी से पहुंच बना रहे हैं।

आरक्षण पर बहस क्यों?

भारत में आरक्षण व्यवस्था संविधान के प्रावधानों और अनेक न्यायिक निर्णयों के आधार पर लागू है। इसका उद्देश्य ऐतिहासिक रूप से सामाजिक और शैक्षिक रूप से वंचित समुदायों को शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक संस्थानों में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना हैवहीं दूसरी ओर, समय-समय पर कुछ संगठन और नागरिक समूह आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा या उसमें बदलाव की मांग भी उठाते रहे हैं।

उनका तर्क है कि वर्तमान व्यवस्था में आर्थिक आधार को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए और योग्यता आधारित प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलना चाहिए। दूसरी ओर आरक्षण समर्थकों का कहना है कि सामाजिक असमानता अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और इसलिए संवैधानिक आरक्षण व्यवस्था की आवश्यकता बनी हुई है।

रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन- के समर्थक और विरोधी आमने-सामने

रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ को जहां बड़ी संख्या में सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं का समर्थन मिल रहा है, वहीं कई सामाजिक संगठनों, शिक्षाविदों और आरक्षण समर्थक समूहों ने इसका विरोध भी किया है। उनका कहना है कि आरक्षण केवल आर्थिक सहायता नहीं बल्कि सामाजिक न्याय का संवैधानिक माध्यम है और इसे केवल योग्यता बनाम आरक्षण की बहस तक सीमित नहीं किया जा सकता।

सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर व्यापक बहस जारी है और दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क प्रस्तुत कर रहे हैं।

राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया

अब तक किसी प्रमुख राष्ट्रीय राजनीतिक दल ने इस अभियान को औपचारिक समर्थन नहीं दिया है। अभियान स्वयं भी दावा करता है कि वह किसी राजनीतिक दल से जुड़ा नहीं है। हालांकि विभिन्न राजनीतिक नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर इस विषय पर अपनी-अपनी राय व्यक्त की है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह अभियान ऑनलाइन लोकप्रियता से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर भी सक्रिय होता है, तो भविष्य में राजनीतिक दलों को इस विषय पर स्पष्ट रुख अपनाना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों की राय

सामाजिक विज्ञान के विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया आधारित आंदोलनों की लोकप्रियता यह दर्शाती है कि युवा वर्ग अब सार्वजनिक नीतियों पर खुलकर चर्चा करना चाहता है। हालांकि वे यह भी चेतावनी देते हैं कि संवेदनशील विषयों पर संवाद तथ्यों, संविधान और न्यायिक व्यवस्था के दायरे में होना चाहिए।

विशेषज्ञों के अनुसार आरक्षण जैसा विषय सामाजिक न्याय, समान अवसर, ऐतिहासिक भेदभाव और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा हुआ है। इसलिए इस पर किसी भी नीति परिवर्तन का निर्णय व्यापक लोकतांत्रिक विमर्श और संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से ही संभव है।

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अब आगे क्या?

फिलहाल ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ मुख्य रूप से सोशल मीडिया अभियान के रूप में सक्रिय है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह केवल ऑनलाइन चर्चा तक सीमित रहता है या फिर सार्वजनिक सभाओं, ज्ञापनों अथवा अन्य लोकतांत्रिक माध्यमों से अपनी मांगों को आगे बढ़ाता है।

साथ ही यह भी स्पष्ट है कि भारत में आरक्षण व्यवस्था संविधान और न्यायालयों द्वारा संरक्षित विषय है। इसलिए इससे जुड़े किसी भी बड़े बदलाव के लिए संवैधानिक और विधायी प्रक्रिया आवश्यक होगी।

निष्कर्ष

रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ का कुछ ही दिनों में लाखों लोगों तक पहुंचना यह दर्शाता है कि सोशल मीडिया भारत में जनमत निर्माण का एक अत्यंत प्रभावशाली माध्यम बन चुका है। एक ओर यह अभियान आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसके विरोधी सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं।

फिलहाल यह बहस डिजिटल मंचों पर तेजी से जारी है और आने वाले समय में इसका सामाजिक तथा राजनीतिक प्रभाव किस दिशा में जाएगा, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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