नया फोन खरीदते ही सबसे पहले सिम कार्ड निकालकर ट्रे में फिट करना, अब यह आदत धीरे-धीरे बदल रही है। इसकी जगह ले रहे हैं eSIM aur iSIM, जो बिना किसी प्लास्टिक कार्ड के फोन को नेटवर्क से जोड़ देते हैं। आइए दोनों को पूरी गहराई से समझते हैं।
eSIM क्या है
eSIM यानी Embedded SIM एक छोटी चिप है, जो फोन के सर्किट बोर्ड पर पहले से सोल्डर की गई होती है। इसे eUICC यानी embedded Universal Integrated Circuit Card कहा जाता है। पारंपरिक सिम कार्ड की तरह इसमें पहले से किसी एक कंपनी का डेटा भरा हुआ नहीं होता, बल्कि यह खाली आती है, और बाद में जरूरत के हिसाब से कोई भी टेलीकॉम कंपनी अपनी प्रोफाइल इसमें डाल देती है।
कैसे काम करता है
eSIM को एक्टिवेट करने का पूरा प्रोसेस GSMA के Remote SIM Provisioning यानी RSP आर्किटेक्चर पर आधारित है। जब कोई यूजर किसी टेलीकॉम कंपनी से eSIM लेता है, तो एक SM-DP+ नाम का सर्वर उसकी प्रोफाइल तैयार करता है, और यह प्रोफाइल QR कोड स्कैन करके या ऐप के जरिए फोन के eUICC चिप में डाउनलोड हो जाती है। पूरा काम इंटरनेट के जरिए दूर बैठे-बैठे हो जाता है, इसलिए किसी दुकान पर जाकर फिजिकल सिम कार्ड खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती।
iSIM क्या है और यह eSIM से कैसे अलग है
iSIM यानी Integrated SIM, eSIM से एक कदम आगे की तकनीक है। eSIM एक अलग चिप होती है, जो भले ही सर्किट बोर्ड पर सोल्डर हो, लेकिन फोन के मुख्य प्रोसेसर से अलग होती है। वहीं iSIM में सिम का सुरक्षित फंक्शन सीधे फोन के मुख्य प्रोसेसर यानी SoC (System on Chip) के अंदर ही समाहित कर दिया जाता है, बिना किसी अलग चिप के।
इससे फोन के अंदर जगह की बचत होती है, बैटरी की खपत कम होती है और खराब होने के मौके भी घट जाते हैं क्योंकि एक अलग हार्डवेयर पार्ट ही नहीं बचता।

इस्तेमाल करते समय क्या समान है
एक आम यूजर के नजरिए से दोनों लगभग एक जैसा अनुभव देते हैं, क्योंकि दोनों ही डाउनलोड की गई प्रोफाइल पर काम करते हैं, और दोनों में QR कोड स्कैन करके कनेक्टिविटी शुरू की जा सकती है। असली फर्क सिर्फ फोन के अंदर की हार्डवेयर डिजाइन में है, जो ज्यादातर यूजर के लिए सीधे तौर पर दिखाई नहीं देता।
कौन से फोन सपोर्ट करते हैं
2022 से अमेरिका में बिकने वाले iPhone में फिजिकल सिम ट्रे हटा दी गई है और सैमसंग व गूगल भी धीरे-धीरे इसी दिशा में बढ़ रहे हैं। 2025 और 2026 में लॉन्च हुए ज्यादातर फ्लैगशिप फोन eSIM सपोर्ट करते हैं, और कुछ तो पूरी तरह eSIM-ओनली भी हैं। iSIM अभी शुरुआती चरण में है, और Qualcomm के Snapdragon 8 Gen 3 जैसे चिपसेट पर आधारित कुछ सीमित डिवाइस ही फिलहाल इसे सपोर्ट करते हैं।
फायदे और सावधानियां
दोनों की मदद से एक ही फोन में कई प्रोफाइल रखी जा सकती हैं, जो ट्रैवल करने वालों के लिए काफी काम आता है। लेकिन ध्यान रखने वाली बात यह है कि ज्यादातर eSIM प्रोफाइल एक बार एक्टिवेट होने के बाद उसी डिवाइस से जुड़ जाती हैं, इसलिए फोन बदलते समय ट्रांसफर पॉलिसी पहले ही चेक कर लेनी चाहिए।
इसके अलावा फोन को फैक्ट्री रीसेट करने पर सेव की गई सभी प्रोफाइल भी डिलीट हो जाती हैं, इसलिए रीसेट करने से पहले जरूरी बैकअप या दोबारा एक्टिवेशन की जानकारी संभालकर रखनी चाहिए।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. eSIM क्या है?
यह फोन के सर्किट बोर्ड पर सोल्डर की गई एक चिप है, जिसमें टेलीकॉम कंपनी की प्रोफाइल दूर से डाउनलोड की जाती है।
2. iSIM eSIM से कैसे अलग है?
eSIM एक अलग चिप होती है, जबकि iSIM का फंक्शन सीधे फोन के मुख्य प्रोसेसर के अंदर ही समाहित होता है।
3. क्या eSIM aur iSIM इस्तेमाल करने का तरीका अलग है?
नहीं, यूजर के लिए दोनों ही QR कोड स्कैन करके एक्टिवेट करने का अनुभव लगभग एक जैसा रहता है।
4. क्या फोन बदलने पर eSIM प्रोफाइल अपने आप ट्रांसफर हो जाती है?
ज्यादातर मामलों में नहीं, इसलिए फोन बदलने से पहले प्रोवाइडर की ट्रांसफर पॉलिसी जरूर चेक कर लेनी चाहिए।
5. क्या फैक्ट्री रीसेट करने पर eSIM डिलीट हो जाता है?
हां, फैक्ट्री रीसेट करने पर सेव की गई सभी eSIM प्रोफाइल डिलीट हो जाती हैं, इसलिए रीसेट से पहले सावधानी बरतनी चाहिए।
उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

