सैलरी स्लिप हो, फिक्स्ड डिपॉजिट का ब्याज हो या फ्रीलांस पेमेंट, ज्यादातर जगहों पर पूरी रकम मिलने से पहले ही एक हिस्सा कट जाता है। यही है TDS, जिसे समझे बिना टैक्स प्लानिंग अधूरी रहती है। आइए 2026 के लेटेस्ट नियमों के साथ इसकी पूरी जानकारी लेते हैं।
TDS क्या है
TDS यानी Tax Deducted at Source, एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें पेमेंट करने वाला (डिडक्टर) पैसा देने से पहले ही तय दर पर टैक्स काटकर सीधे सरकार के पास जमा कर देता है। इसका मकसद टैक्स चोरी रोकना और सरकार को साल भर लगातार राजस्व मिलना सुनिश्चित करना है। सैलरी, किराया, ब्याज, प्रोफेशनल फीस, कमीशन और प्रॉपर्टी की खरीद जैसी कई तरह की पेमेंट पर लागू होता है।
कैसे काम करता है
जो व्यक्ति या कंपनी पेमेंट करती है उसे डिडक्टर कहते हैं, और जिसे पेमेंट मिलती है उसे डिडक्टी कहा जाता है। डिडक्टर तय प्रतिशत काटकर बाकी रकम डिडक्टी को देता है, और कटी हुई रकम सरकार के पास जमा कर देता है। यह कटौती डिडक्टी के फाइनल टैक्स दायित्व में एडजस्ट हो जाती है, यानी यह अंतिम टैक्स नहीं बल्कि एडवांस टैक्स की तरह काम करती है।
2026 में TDS की मुख्य दरें और थ्रेशोल्ड
FY 2026-27 के लिए कुछ जरूरी दरें और सीमाएं इस तरह हैं:
सैलरी: इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से हर महीने कटती है
किराया: सालाना ₹6 लाख से ज्यादा किराए पर लागू (पहले यह सीमा ₹2.4 लाख थी)
सीनियर सिटीजन का ब्याज: ₹1,00,000 से ज्यादा पर (पहले यह सीमा ₹50,000 थी)
प्रोफेशनल फीस (194J): ₹50,000 से ज्यादा पर 10%
कॉन्ट्रैक्टर पेमेंट (194C): आमतौर पर 1% से 2% के बीच
प्रॉपर्टी की खरीद: ₹50 लाख से ज्यादा की डील पर 1%
डिविडेंड: ₹10,000 से ज्यादा पर 10%
लॉटरी, ऑनलाइन गेमिंग, घुड़दौड़ की जीत: 30%
क्रिप्टो या वर्चुअल डिजिटल एसेट: 1%

PAN न देने पर क्या होता है
अगर डिडक्टी वैध PAN नहीं देता, तो सामान्य दर की जगह ज्यादा ऊंची दर पर काटा जाता है, कई मामलों में यह 20% तक पहुंच सकता है। इसके अलावा जो लोग समय पर ITR फाइल नहीं करते, उन पर भी सेक्शन 206AB के तहत सामान्य से ज्यादा दर पर TDS लागू हो सकता है।
TDS रिफंड और Form 26AS कैसे चेक करें
काटा गया TDS Form 26AS और AIS (Annual Information Statement) में दिखता है, जिसे इनकम टैक्स पोर्टल पर लॉगिन करके देखा जा सकता है। अगर आपका कुल टैक्स दायित्व काटे गए TDS से कम है, तो ITR फाइल करने पर बाकी रकम रिफंड के तौर पर वापस मिल जाती है।
नए Income Tax Act 2025 में क्या बदला
1 अप्रैल 2026 से लागू हुए नए Income Tax Act 2025 में पुराने TDS सेक्शन नंबरों को नए कोड्स के साथ फिर से व्यवस्थित किया गया है। हालांकि ज्यादातर मामलों में असली दरों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, बल्कि सिर्फ सेक्शन कोडिंग को आसान और स्पष्ट बनाया गया है, ताकि रिटर्न भरते समय गलतियां कम हों।
आगे और समाचार पढ़ें:
इससे जुड़ी खबरों के अलावा, ये अन्य बड़ी खबरें भी पढ़ें:
- Dividend Investing क्या है? यील्ड, टैक्स नियम और जरूरी बातें समझें
- घर बैठे Online Teaching शुरू करें, जानें कमाई और बिजनेस रजिस्ट्रेशन का तरीका
टैक्स और पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी और मददगार जानकारी के लिए ये गाइड भी पढ़ें:
- छोटे बिजनेस के लिए GST रजिस्ट्रेशन कैसे करें
- Personal Loan की ब्याज दर बैंक से बैंक इतनी अलग क्यों होती है?
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. TDS क्या है?
यह एक टैक्स व्यवस्था है जिसमें पेमेंट करने वाला पहले ही तय दर पर टैक्स काटकर सरकार के पास जमा कर देता है।
2. क्या TDS ही फाइनल टैक्स होता है?
नहीं, यह एडवांस टैक्स की तरह काम करता है और ITR फाइल करते समय आपकी कुल टैक्स देनदारी में एडजस्ट हो जाता है।
3. TDS कहां देखा जा सकता है?
काटा गया TDS इनकम टैक्स पोर्टल पर Form 26AS और AIS में दिखता है।
4. PAN न देने पर क्या होता है?
वैध PAN न होने पर सामान्य से ज्यादा ऊंची दर पर TDS काटा जाता है, जो कई बार 20% तक पहुंच सकता है।
5. क्या ज्यादा कटा हुआ TDS वापस मिल सकता है?
हां, अगर कुल टैक्स दायित्व काटे गए TDS से कम है, तो ITR फाइल करने पर बाकी रकम रिफंड के रूप में वापस मिलती है।
उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है। सटीक और व्यक्तिगत सलाह के लिए किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट से संपर्क करें।

