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हिमाचल में मानसून का कहर: 80 लोगों की मौत, 121 सड़कें बंद, 1,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान; राहत अभियान तेज

हिमाचल प्रदेश में इस वर्ष मानसून ने व्यापक तबाही मचाई है। लगातार हो रही भारी बारिश, भूस्खलन, अचानक आई बाढ़ और बादल फटने की घटनाओं के कारण अब तक करीब 80 लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य सरकार के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, प्राकृतिक आपदाओं से प्रदेश को 800 से 1,000 करोड़ रुपये तक का आर्थिक नुकसान हुआ है। कई जिलों में हालात अभी भी चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं और 121 से अधिक सड़कें यातायात के लिए बंद हैं, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (HPSDMA) के अनुसार, सबसे अधिक प्रभावित जिलों में मंडी, कुल्लू, कांगड़ा, शिमला, चंबा, सिरमौर और किन्नौर शामिल हैं। लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ी ढलानों पर भूस्खलन का खतरा बना हुआ है, जिससे कई मार्ग बार-बार अवरुद्ध हो रहे हैं। प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की अपील की है।

हिमाचल में 80 लोगों की मौत, कई अब भी लापताहिमाचल

राज्य सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मानसून सीजन में अब तक लगभग 80 लोगों की जान जा चुकी है। इनमें भूस्खलन, फ्लैश फ्लड, सड़क दुर्घटनाओं, बिजली गिरने और अन्य वर्षा संबंधी घटनाओं में हुई मौतें शामिल हैं। कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं और उनकी तलाश जारी है।

राहत एजेंसियां प्रभावित इलाकों में लगातार खोज और बचाव अभियान चला रही हैं। कई स्थानों पर सड़कें टूट जाने के कारण बचाव दलों को पैदल या विशेष वाहनों के जरिए पहुंचना पड़ रहा है।

हिमाचल की 121 सड़कें बंद, यातायात बुरी तरह प्रभावित

भारी बारिश और भूस्खलन के कारण प्रदेश की 121 से अधिक सड़कें बंद हैं। कई ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क जिला मुख्यालयों से टूट गया है। लोक निर्माण विभाग (PWD) सड़कें खोलने के लिए लगातार मशीनों और कर्मचारियों की मदद से मलबा हटाने में जुटा है।

कुछ राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर भी यातायात प्रभावित हुआ है, जिससे पर्यटकों और स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन ने वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की सलाह दी है।

हिमाचल प्रदेश को 1,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के विशेष सचिव पुष्पिंदर राणा ने बताया कि मानसून से अब तक प्रदेश को लगभग 800 से 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। इसमें सड़कें, पुल, सरकारी भवन, जलापूर्ति योजनाएं, बिजली व्यवस्था और कृषि क्षेत्र को हुआ नुकसान शामिल है।

उन्होंने कहा कि वास्तविक नुकसान का आंकड़ा राहत एवं पुनर्वास कार्य पूरा होने के बाद और बढ़ सकता है।

राहत एवं बचाव अभियान युद्धस्तर पर

राज्य सरकार ने आपदा से निपटने के लिए NDRF, SDRF, पुलिस, अग्निशमन विभाग और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त टीमें तैनात की हैं। संवेदनशील जिलों में पहले से राहत दलों की तैनाती की गई थी, जिससे कई स्थानों पर समय रहते लोगों को सुरक्षित निकाला जा सका।

जहां सड़क संपर्क पूरी तरह टूट गया है, वहां राहत सामग्री पहुंचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन भोजन, दवाइयां, पेयजल और आवश्यक वस्तुएं प्रभावित परिवारों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है।

डिजिटल आपदा प्रबंधन प्रणाली बनी सहारा

इस बार राज्य सरकार ने आधुनिक डिजिटल आपदा प्रबंधन प्रणाली का उपयोग किया है। अधिकारियों के अनुसार, नई तकनीक के माध्यम से किसी भी आपदा की सूचना लगभग तुरंत नियंत्रण कक्ष तक पहुंच रही है, जिससे राहत दलों को तेजी से मौके पर भेजा जा रहा है।

विशेष सचिव पुष्पिंदर राणा ने कहा कि मानसून शुरू होने से पहले सभी जिलों के उपायुक्तों के साथ समीक्षा बैठकें की गई थीं और आवश्यक संसाधन पहले ही उपलब्ध करा दिए गए थे।

कृषि और बागवानी को भारी झटका

हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था में बागवानी और कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है। लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण सेब, मक्का और अन्य फसलों को नुकसान पहुंचा है। कई बागों तक पहुंचने वाले संपर्क मार्ग टूट गए हैं, जिससे किसानों और बागवानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में कठिनाई हो रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मौसम जल्द सामान्य नहीं हुआ तो कृषि क्षेत्र को और अधिक नुकसान हो सकता है।

बिजली और पेयजल सेवाएं प्रभावित

भूस्खलन और पेड़ गिरने की घटनाओं के कारण कई स्थानों पर बिजली आपूर्ति बाधित हुई है। कई पेयजल योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में पानी की समस्या उत्पन्न हो गई है। संबंधित विभाग बिजली और जलापूर्ति बहाल करने के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं।

मौसम विभाग का अलर्ट

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने हिमाचल प्रदेश के कई जिलों में अगले कुछ दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। प्रशासन ने भूस्खलन संभावित क्षेत्रों, नदी-नालों और पहाड़ी ढलानों के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

पर्यटकों से भी आग्रह किया गया है कि मौसम सामान्य होने तक अनावश्यक पर्वतीय यात्राओं से बचें।

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मुख्यमंत्री ने दिए राहत कार्य तेज करने के निर्देश

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अधिकारियों को राहत और पुनर्वास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी और सड़क, बिजली तथा पानी जैसी आवश्यक सेवाओं को जल्द से जल्द बहाल किया जाएगा।

सरकार ने यह भी आश्वासन दिया है कि जिन परिवारों के घर या आजीविका प्रभावित हुई है, उन्हें नियमानुसार आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।

निष्कर्ष

हिमाचल प्रदेश इस समय मानसून की सबसे गंभीर प्राकृतिक आपदाओं में से एक का सामना कर रहा है। लगभग 80 लोगों की मौत, 121 से अधिक सड़कें बंद होने और 1,000 करोड़ रुपये तक के अनुमानित नुकसान ने स्थिति की गंभीरता को उजागर कर दिया है। राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है, लेकिन मौसम विभाग की चेतावनी के मद्देनज़र चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है।

राज्य सरकार, आपदा प्रबंधन एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन मिलकर सामान्य जनजीवन बहाल करने के प्रयासों में जुटे हैं, जबकि लोगों से सतर्कता बरतने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की जा रही है।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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