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असम में बाढ़ से 1.7 लाख से अधिक लोग प्रभावित, सेना ने शुरू किया ‘ऑपरेशन जल राहत’; राहत-बचाव अभियान तेज

असम में लगातार हो रही भारी बारिश और नदियों के उफान ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। राज्य के कई हिस्सों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 1.7 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, जबकि सैकड़ों गांव जलमग्न हो चुके हैं।

हालात की गंभीरता को देखते हुए भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन जल राहत’ शुरू किया है, जिसके तहत बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और राहत सामग्री उपलब्ध कराने का अभियान युद्ध स्तर पर चलाया जा रहा है।

असम के 12 जिलों में बाढ़ का असरअसम

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, बाढ़ का प्रभाव राज्य के 12 जिलों, 30 से अधिक राजस्व सर्किलों और लगभग 580 गांवों तक फैल चुका है। लगातार बारिश और ब्रह्मपुत्र सहित उसकी सहायक नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण कई निचले इलाके पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। हजारों लोगों को अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है।

प्रभावित जिलों में सिवसागर, जोरहाट, गोलाघाट, धेमाजी, डिब्रूगढ़ और आसपास के क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित बताए जा रहे हैं। कई गांवों का संपर्क मुख्य सड़कों से पूरी तरह टूट गया है।

असम में सेना का ‘ऑपरेशन जल राहत’

बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन जल राहत’ शुरू किया है। इस अभियान के तहत सेना की विशेष टीमें नावों, इंजीनियरिंग उपकरणों, चिकित्सा दलों और राहत सामग्री के साथ प्रभावित इलाकों में तैनात की गई हैं।

सेना अब तक सैकड़ों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा चुकी है। राहत दलों ने बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और बीमार लोगों को प्राथमिकता देते हुए निकासी अभियान चलाया है। कई स्थानों पर सेना ने अस्थायी चिकित्सा शिविर भी स्थापित किए हैं, जहां लोगों को प्राथमिक उपचार और आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं।

NDRF और SDRF भी मैदान में

भारतीय सेना के अलावा राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), स्थानीय प्रशासन और पुलिस की टीमें भी राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। कई इलाकों में नावों के माध्यम से लोगों को निकाला जा रहा है, जबकि हेलीकॉप्टरों की सहायता से राहत सामग्री पहुंचाने की तैयारी भी की गई है।

प्रशासन ने प्रभावित परिवारों के लिए राहत शिविर स्थापित किए हैं, जहां भोजन, पीने का पानी, दवाइयां और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

असम में रेल और सड़क यातायात प्रभावित

बाढ़ का असर केवल गांवों तक सीमित नहीं है। कई स्थानों पर रेलवे ट्रैक जलमग्न होने और क्षतिग्रस्त होने से रेल सेवाएं प्रभावित हुई हैं। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने कुछ मार्गों पर ट्रेनों का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया है।

कई प्रमुख सड़कें भी पानी में डूब गई हैं, जिससे राहत सामग्री पहुंचाने में कठिनाई हो रही है। कुछ पुलों के क्षतिग्रस्त होने की भी खबर है।

कृषि और चाय उद्योग को बड़ा नुकसान

बाढ़ का सबसे अधिक असर कृषि और चाय उद्योग पर पड़ा है। हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि पानी में डूब चुकी है, जिससे धान और अन्य फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है।

असम के कई प्रसिद्ध चाय बागानों में भी पानी भर गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द पानी नहीं निकला तो चाय उत्पादन पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को भी झटका लग सकता है।

मुख्यमंत्री ने किया हालात का जायजा

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा की है और अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का पहला लक्ष्य प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति तक सहायता पहुंचाना है।

मुख्यमंत्री ने यह भी आश्वासन दिया कि जिन परिवारों के घर, फसल या आजीविका को नुकसान हुआ है, उन्हें सरकारी सहायता और मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा।

स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां

बाढ़ के बाद जलजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाकों में मेडिकल टीमें भेजी हैं और राहत शिविरों में स्वास्थ्य जांच शिविर लगाए गए हैं।

प्रशासन लोगों से केवल साफ पानी पीने, स्वच्छता बनाए रखने और किसी भी बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेने की अपील कर रहा है।

मौसम विभाग का अलर्ट

भारतीय मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक असम और पूर्वोत्तर के कई हिस्सों में भारी वर्षा की संभावना जताई है। इससे बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो सकती है। प्रशासन ने नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर खतरे के निशान के ऊपर बना हुआ है, जिससे नए क्षेत्रों में भी बाढ़ का खतरा बना हुआ है।

स्थानीय लोगों की मुश्किलें

बाढ़ प्रभावित लोगों का कहना है कि अचानक पानी बढ़ने से उन्हें घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। कई परिवारों ने अपने पशुधन, घरेलू सामान और खेती की फसलें खो दी हैं।

राहत शिविरों में रह रहे लोगों ने सरकार और सेना द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सहायता की सराहना की, लेकिन साथ ही जल्द से जल्द सामान्य जीवन बहाल करने की मांग भी की।

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आगे की चुनौती

आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों का मानना है कि तत्काल राहत के साथ-साथ दीर्घकालिक बाढ़ प्रबंधन की आवश्यकता है। नदी तटबंधों को मजबूत करना, जल निकासी व्यवस्था में सुधार और समय रहते चेतावनी प्रणाली विकसित करना भविष्य में ऐसे नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

निष्कर्ष

असम में आई बाढ़ ने हजारों परिवारों का जीवन प्रभावित कर दिया है। 1.7 लाख से अधिक लोग इस आपदा की चपेट में हैं और सैकड़ों गांव अब भी जलमग्न हैं। भारतीय सेना द्वारा शुरू किया गया ‘ऑपरेशन जल राहत’ राहत एवं बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जबकि NDRF, SDRF और राज्य प्रशासन भी पूरी क्षमता से लोगों की मदद में जुटे हैं।

हालांकि मौसम विभाग के ताजा अलर्ट को देखते हुए आने वाले दिन चुनौतीपूर्ण रह सकते हैं। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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