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Working Capital की Planning कैसे करें? ये रही पूरी गाइड इसके फॉर्मूला के साथ

Working Capital या कार्यशील पूंजी नियोजन की Planning कैसे करें, यह सवाल हर उस बिजनेस ओनर के लिए बेहद जरूरी है जो अपने रोजमर्रा के ऑपरेशन्स को बिना किसी कैश फ्लो दिक्कत के चलाना चाहता है। कई मुनाफे में चल रहे बिजनेस भी सिर्फ खराब कार्यशील पूंजी नियोजन की वजह से अचानक पैसों की कमी से जूझने लगते हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कार्यशील पूंजी नियोजन की Planning कैसे करें।

Working Capital क्या है?

इस का सीधा फॉर्मूला है, Current Assets माइनस Current Liabilities। इसमें Current Assets में कैश, बैंक बैलेंस, ग्राहकों से मिलने वाला बकाया (Accounts Receivable) और इन्वेंट्री शामिल होती है, जबकि Current Liabilities में सप्लायर्स को देय राशि, सैलरी और शॉर्ट-टर्म लोन आते हैं। परिचालन योजना के लिए एक और उपयोगी फॉर्मूला है, WCR (Working Capital Requirement) = (इन्वेंट्री + प्राप्य राशि) – देय राशि।

Permanent और Temporary Working Capital में फर्क समझें

इसे समझने के लिए सबसे पहले Permanent और Temporary Working Capital का फर्क जानना जरूरी है। Permanent Working Capital वह न्यूनतम रकम है, जो बिजनेस को हमेशा चाहिए होती है, जैसे एक डिस्ट्रीब्यूटर के लिए न्यूनतम स्टॉक लेवल। इसे हमेशा लॉन्ग-टर्म सोर्स (मालिक की पूंजी या लॉन्ग-टर्म लोन) से फंड करना चाहिए, न कि शॉर्ट-टर्म क्रेडिट से।

वहीं Temporary Working Capital वह अतिरिक्त पूंजी है, जो फेस्टिव सीजन स्टॉक-अप या बड़े ऑर्डर जैसे पीक बिजनेस पीरियड्स में चाहिए होती है, और इसे शॉर्ट-टर्म वर्किंग कैपिटल लोन या ओवरड्राफ्ट से फंड करना बेहतर रहता है। इन दोनों में फर्क समझने से गलत सोर्स से गलत जरूरत को फंड करने की गलती से बचा जा सकता है।

कैसे कैलकुलेट करें?

Working Capital Cycle (जिसे Cash Conversion Cycle भी कहते हैं) यह बताता है कि कैश को ऑपरेशन्स में लगने से वापस मिलने तक कितने दिन लगते हैं। इसका फॉर्मूला है, Cash Cycle = Debtor Days + Inventory Days – Creditor Days।  उदाहरण के तौर पर, अगर किसी बिजनेस का 89-दिन का कैश साइकल है और मासिक बिक्री ₹45 लाख है, तो इसका मतलब करीब ₹1.35 करोड़ पूंजी में फंसी हुई है।

अगर Debtor Days को 75 से 45 और Inventory Days को 42 से 30 तक घटाया जाए, तो साइकल 47 दिन तक सिमट सकता है, जिससे करीब ₹63 लाख कैश मुक्त हो सकता है। यही असली Working Capital Planning की ताकत है।

सही मात्रा कैसे तय करें?

भारतीय MSME के लिए Nayak Committee की सिफारिश के अनुसार, कुल जरूरत का अनुमान अनुमानित सालाना टर्नओवर के 25 प्रतिशत के बराबर लगाया जाता है। बैंक आमतौर पर इसका एक हिस्सा फाइनेंस करते हैं, बाकी हिस्सा बिजनेस को खुद मार्जिन मनी के तौर पर लगाना होता है। Working Capital Ratio (Current Assets ÷ Current Liabilities) भी एक अहम इंडिकेटर है, भारतीय SMEs के लिए 1.2 से 2.5 के बीच का रेशियो स्वस्थ माना जाता है।

Working Capital cash flow calculator ledger

फंडिंग विकल्प

अगर आंतरिक स्रोत काफी न हों, तो PMMY (Mudra Loan) के तहत Tarun Plus कैटेगरी में ₹20 लाख तक, और CGTMSE-समर्थित कोलैटरल-फ्री क्रेडिट ₹10 करोड़ तक ली जा सकती है। TReDS (RBI-रेगुलेटेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग प्लेटफॉर्म) भी MSME इनवॉइस के लिए एक उपयोगी विकल्प है।

ध्यान रहे, Section 43B(h) के तहत रजिस्टर्ड MSME को समय पर भुगतान (45 दिन तक) न करने पर टैक्स डिडक्शन में देरी होती है, जो Working Capital Planning को सीधे प्रभावित करता है। अगर आप MSME Registration की पूरी जानकारी चाहते हैं, तो वह भी जरूर पढ़ें, क्योंकि रजिस्ट्रेशन के बिना कई फंडिंग विकल्प उपलब्ध नहीं होते।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. Working Capital की Planning कैसे करें, सबसे पहला कदम क्या है?
सबसे पहले Current Assets और Current Liabilities की सही गणना करें, फिर Working Capital Cycle को समझें।

2. भारतीय SMEs के लिए Working Capital Ratio कितना सही है?
1.2 से 2.5 के बीच का रेशियो स्वस्थ माना जाता है, इससे कम होने पर लिक्विडिटी की समस्या हो सकती है।

3. Permanent और Temporary Working Capital में क्या फर्क है?
Permanent, साल भर की न्यूनतम जरूरत है (लॉन्ग-टर्म सोर्स से फंड करें), जबकि Temporary सीजनल पीक डिमांड है (शॉर्ट-टर्म लोन से फंड करें)।

4. Working Capital के लिए कौन सी सरकारी स्कीम मदद कर सकती है?
PMMY (Mudra Loan), CGTMSE-समर्थित लोन और TReDS प्लेटफॉर्म Working Capital के लिए उपयोगी विकल्प हैं।

उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है। सटीक वित्तीय सलाह के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट या वित्तीय सलाहकार से संपर्क करें।

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