ब्याज दरें बढ़ने पर ज्यादातर डेट फंड्स को नुकसान होता है, क्योंकि बॉन्ड की कीमत और ब्याज दर उल्टी दिशा में चलते हैं। लेकिन Floating Rate Fund India इसी नियम को उलट देता है, यहां ब्याज दर बढ़ने पर फंड को नुकसान की बजाय फायदा होने की संभावना बनती है।
यहां हम Floating Rate Fund India का असली मैकेनिज्म, खुद कैलकुलेट किया गया उदाहरण, RBI के मौजूदा प्रोडक्ट्स और टैक्स नियमों के साथ, समझा रहे हैं।
Floating Rate Fund India असल में काम कैसे करता है
नॉर्मल फिक्स्ड-रेट बॉन्ड में कूपन रेट पूरी अवधि तक एक जैसा रहता है। Floating Rate Fund India में शामिल बॉन्ड्स का कूपन एक बेंचमार्क (जैसे रेपो रेट या MIBOR) से जुड़ा होता है, और हर 3, 6 या 12 महीने में रीसेट होता रहता है।
उदाहरण के लिए, अगर कोई बॉन्ड MIBOR + 2% पर जारी हुआ है, और मौजूदा MIBOR 5% है, तो पहला ब्याज 7% मिलेगा। अगर RBI रेपो रेट 1% बढ़ा दे और MIBOR भी उसी हिसाब से बढ़े, तो अगली बार यही बॉन्ड 8% ब्याज देने लगेगा।
Floating Rate Fund India: खुद कैलकुलेट किया गया प्राइस प्रोटेक्शन
यहीं असली फायदा छुपा है। हमने खुद यह गणित निकाला — मान लीजिए ₹1,000 का बॉन्ड है, और रेपो रेट में 1% (100 बेसिस पॉइंट) की बढ़ोतरी होती है:
- नॉर्मल फिक्स्ड-रेट बॉन्ड (ड्यूरेशन 4): कीमत गिरकर ₹960 पर आ जाती है — यानी 4% का सीधा नुकसान
- फ्लोटिंग-रेट बॉन्ड (ड्यूरेशन सिर्फ 0.3): कीमत सिर्फ ₹997 तक गिरती है — यानी सिर्फ 0.3% का मामूली असर
यानी सिर्फ प्रति ₹1,000 पर ₹37 का फर्क, वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि Floating Rate Fund India का कूपन रीसेट होकर नई दरों के साथ खुद को एडजस्ट कर लेता है, जबकि फिक्स्ड बॉन्ड की कीमत पुरानी, अब कम आकर्षक दर की वजह से गिर जाती है।
साथ ही इनकम साइड भी बेहतर होती है — ऊपर वाले उदाहरण में ही, ब्याज दर 7% से बढ़कर 8% हो जाती है।

Floating Rate Fund India: भारत में विकल्प
भारत में असली फ्लोटिंग-रेट बॉन्ड जारी करने वाले सीमित हैं, इसलिए म्यूचुअल फंड्स अक्सर Interest Rate Swaps (IRS) और Overnight Index Swaps (OIS) जैसे डेरिवेटिव्स इस्तेमाल करते हैं, ताकि फिक्स्ड-कूपन पोर्टफोलियो को इफेक्टिवली फ्लोटिंग-रेट में बदला जा सके।
एक सीधा, रिटेल-फ्रेंडली विकल्प RBI Floating Rate Savings Bonds (FRSB) है — इनकी दर NSC रेट + 0.35% स्प्रेड से तय होती है, हर 6 महीने में रीसेट होती है, और अभी मौजूदा दर 8.05% सालाना है। 7 साल की अवधि, सॉवरेन गारंटी, और सीनियर सिटीजन्स के लिए लॉक-इन के बाद अर्ली एग्जिट का ऑप्शन भी मिलता है।
SEBI का नियम है कि Floating Rate Fund India कैटेगरी वाले म्यूचुअल फंड को कम से कम 65% कॉर्पस फ्लोटिंग-रेट इंस्ट्रूमेंट्स में लगाना जरूरी है।
Floating Rate Fund India: यह हमेशा फायदेमंद नहीं होता
यहां एक ईमानदार बात जरूरी है, Floating Rate Fund India सिर्फ ब्याज दरें बढ़ने की स्थिति में फायदेमंद साबित होता है। अगर RBI रेपो रेट घटाए, तो इसी फंड की इनकम भी घट जाएगी, जबकि उस वक्त फिक्स्ड-रेट बॉन्ड फंड्स में कीमत बढ़ने का फायदा मिल सकता है।
यानी यह “हमेशा बेहतर” विकल्प नहीं, बल्कि “ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद हो तो बेहतर” विकल्प है। साथ ही, डेट फंड्स पर अब इंडेक्सेशन का फायदा नहीं मिलता, गेन्स आपके स्लैब रेट पर ही टैक्स होते हैं।
अगर आप FD और डेट फंड की तुलना समझना चाहते हैं, तो Fixed Deposit vs Recurring Deposit वाला आर्टिकल जरूर पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. Floating Rate Fund India ब्याज दरें बढ़ने पर क्यों फायदेमंद है?
क्योंकि इसका कूपन रेट बेंचमार्क के साथ रीसेट होता रहता है, जिससे फिक्स्ड-रेट बॉन्ड्स जितना प्राइस नुकसान नहीं होता।
2. RBI Floating Rate Savings Bond की मौजूदा दर क्या है?
अभी 8.05% सालाना, जो NSC रेट + 0.35% स्प्रेड पर आधारित है और हर 6 महीने में रीसेट होती है।
3. क्या Floating Rate Fund India हमेशा फायदेमंद रहता है?
नहीं, अगर ब्याज दरें घटें तो इसकी इनकम भी घट जाती है — यह सिर्फ रेट-हाइक साइकल में फायदेमंद है।
4. भारत में असली फ्लोटिंग-रेट बॉन्ड्स की कमी कैसे पूरी होती है?
फंड मैनेजर्स Interest Rate Swaps और Overnight Index Swaps जैसे डेरिवेटिव्स इस्तेमाल करके फिक्स्ड-कूपन पोर्टफोलियो को फ्लोटिंग में बदलते हैं।
5. क्या इन फंड्स पर टैक्स में कोई खास फायदा है?
नहीं, अन्य डेट फंड्स की तरह ही, गेन्स पर इंडेक्सेशन के बिना स्लैब रेट पर टैक्स लगता है।
आगे और समाचार पढ़ें:
- Free Digital Marketing Course: ये हैं टॉप 5 सर्टिफिकेशन कोर्सेस जो आपके लिए मददगार है!
- Digital Marketing क्या है? ये क्यों जरूरी है? जानिए इसके बारे में सबकुछ!
- Google AI Overviews से SEO पर क्या असर पड़ रहा है? जानें पूरी सच्चाई
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है और यह कोई निवेश सलाह नहीं है। ब्याज दरें और फंड रिटर्न बदलते रहते हैं, इसलिए फैसला लेने से पहले मौजूदा दरें जरूर चेक करें और सर्टिफाइड फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें। उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

