तीन अलग-अलग म्यूचुअल फंड में पैसा लगाकर ज्यादातर लोग सोचते हैं कि उनका पोर्टफोलियो अच्छे से डायवर्सिफाई हो चुका है। असलियत अक्सर इससे बहुत अलग निकलती है। Mutual Fund Portfolio Overlap की वजह से यह “डायवर्सिफिकेशन” कागज पर ही रह जाता है।
चलिए एक सीधा उदाहरण लेते हैं। मान लीजिए किसी के पास तीन लार्ज-कैप फंड्स हैं — Fund A में 45 स्टॉक्स, Fund B में 48, Fund C में 42। जोड़ने पर लगता है कुल 135 अलग-अलग कंपनियों में पैसा फैला हुआ है।
अब असली गणित देखें — इन तीनों फंड्स में से 22 स्टॉक्स ऐसे हैं जो तीनों में कॉमन हैं। यानी अब कंपनियों की संख्या घटकर सिर्फ 91 रह जाती है, 135 नहीं। और अगर वो 22 कॉमन स्टॉक्स हर फंड में औसतन 3.2% वेटेज रखते हैं, तो सिर्फ यही 22 कंपनियां हर फंड के करीब 70% हिस्से पर कब्जा जमाए बैठी हैं।
यानी तीन फंड्स में पैसा लगाने के बावजूद, आपका 70% निवेश असल में सिर्फ 22 कंपनियों पर टिका है। यही Mutual Fund Portfolio Overlap का असली खेल है, और यही वजह है कि रिटर्न उम्मीद से कम आता है।
Mutual Fund Portfolio Overlap होता क्यों है?
SEBI का नियम है कि लार्ज-कैप फंड्स को अपने कॉर्पस का कम से कम 80% टॉप 100 कंपनियों में लगाना ही पड़ता है। जब निवेश योग्य कंपनियों की लिस्ट ही सीमित हो, तो हर फंड मैनेजर एक जैसी कंपनियों की तरफ खिंचता है — HDFC Bank, Reliance, ICICI Bank, Infosys, TCS।
Mutual Fund Portfolio Overlap खासतौर पर तब ज्यादा होता है जब:
- एक ही AMC के लार्ज-कैप और फ्लेक्सी-कैप फंड दोनों में पैसा लगाया जाए (फंड मैनेजर्स की सोच अक्सर एक जैसी होती है)
- एक जैसी थीम वाले दो फंड्स लिए जाएं (जैसे टेक्नोलॉजी फंड और डिजिटल इनोवेशन फंड)
- तीन या ज्यादा लार्ज-कैप फंड्स एक साथ रखे जाएं

Mutual Fund Portfolio Overlap का नुकसान
पहला नुकसान — रिस्क कम नहीं होता। अगर वो 22 कॉमन स्टॉक्स गिरते हैं, तो तीनों फंड्स एक साथ गिरेंगे, क्योंकि आखिरकार उनका बड़ा हिस्सा उन्हीं कंपनियों पर टिका है। यानी “अलग-अलग फंड” होने का फायदा वहीं खत्म हो जाता है।
दूसरा नुकसान — पैसा। हर फंड का अपना एक्सपेंस रेशियो होता है। Mutual Fund Portfolio Overlap ज्यादा होने का मतलब है कि आप एक ही स्टॉक एक्सपोजर के लिए दो-तीन बार फीस चुका रहे हैं।
तीसरा नुकसान — रीबैलेंसिंग मुश्किल हो जाती है। अगर किसी एक स्टॉक में एक्सपोजर कम करना हो, तो अब आपको तीन-तीन फंड्स में बदलाव ट्रैक करना पड़ेगा, एक की बजाय।
Mutual Fund Portfolio Overlap कितना ज्यादा हो तो चिंता की बात है
एक्सपर्ट्स का आम अनुभव कुछ इस तरह है:
- 30% से कम: ठीक-ठाक है, दोनों फंड्स रखे जा सकते हैं
- 30-60% के बीच: थोड़ी रिडंडेंसी है, एक्सपेंस रेशियो और परफॉर्मेंस देखकर फैसला लें
- 70% या ज्यादा: दोनों में से सिर्फ एक ही रखना समझदारी है
यह चेक करने के लिए Advisorkhoj, PrimeInvestor या Groww जैसे प्लेटफॉर्म्स के फ्री ओवरलैप टूल्स इस्तेमाल किए जा सकते हैं — बस दो-तीन फंड्स सिलेक्ट करें, टूल तुरंत कॉमन स्टॉक्स और ओवरलैप पर्सेंटेज दिखा देता है।
Mutual Fund Portfolio Overlap ठीक करने का सही तरीका
सबसे बड़ी गलती जल्दबाजी में सब कुछ बेचकर एक फंड में शिफ्ट करना है — इससे एग्जिट लोड और टैक्स दोनों का नुकसान हो सकता है (1 साल से पहले बेचने पर STCG 20%, बाद में LTCG 12.5% ₹1.25 लाख से ऊपर के गेन पर)।
बेहतर तरीका है — रिडंडेंट फंड में नई SIP रोक दें, एग्जिट लोड पीरियड खत्म होने का इंतजार करें, फिर धीरे-धीरे सिस्टमैटिक तरीके से रिडीम करके बेहतर फंड में शिफ्ट करें।
असली डायवर्सिफिकेशन के लिए, तीन लार्ज-कैप फंड्स रखने की बजाय, एक लार्ज-कैप + एक मिड/स्मॉल-कैप + एक डेट फंड का मिक्स कहीं बेहतर काम करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. Mutual Fund Portfolio Overlap कैसे चेक करें?
Advisorkhoj, PrimeInvestor या Groww जैसे फ्री ऑनलाइन टूल्स से दो या तीन फंड्स सिलेक्ट करके तुरंत ओवरलैप पर्सेंटेज देखा जा सकता है।
2. कितना ओवरलैप सामान्य माना जाता है?
30% तक ठीक-ठाक माना जाता है, 30-60% के बीच रिव्यू जरूरी है, और 70% से ज्यादा होने पर एक फंड रखना ही बेहतर है।
3. क्या ओवरलैप सिर्फ लार्ज-कैप फंड्स में होता है?
सबसे ज्यादा वहीं होता है, क्योंकि SEBI का नियम है कि 80%+ निवेश टॉप 100 कंपनियों में हो — लेकिन एक जैसी थीम वाले फंड्स में भी यह हो सकता है।
4. ओवरलैप वाले फंड को तुरंत बेच देना चाहिए?
नहीं, एग्जिट लोड और टैक्स चेक करके धीरे-धीरे, सिस्टमैटिक तरीके से रिडीम करना बेहतर रहता है।
5. असली डायवर्सिफिकेशन कैसे मिलता है?
अलग-अलग मार्केट कैप (लार्ज+मिड+स्मॉल) और एसेट क्लास (इक्विटी+डेट) मिलाकर, न कि एक ही कैटेगरी के कई फंड्स रखकर।
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यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है और यह कोई निवेश सलाह नहीं है। यहां दिए गए स्टॉक और पर्सेंटेज उदाहरण सिर्फ समझाने के लिए हैं, असली पोर्टफोलियो अलग हो सकता है। फैसला लेने से पहले अपने फंड्स का असली ओवरलैप चेक करें और सर्टिफाइड फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें।
उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

