भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था तेजी से विस्तार कर रही है और इसके साथ ही गिग (Gig) वर्कफोर्स भी नए आयाम छूने की ओर बढ़ रही है। बेंगलुरु स्थित रणनीतिक परामर्श कंपनी रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स (Redseer Strategy Consultants) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2030 तक भारत की मासिक सक्रिय गिग इंटरनेट वर्कफोर्स बढ़कर 1.7 करोड़ से 2.1 करोड़ (17-21 मिलियन) तक पहुंच सकती है। वर्तमान में यह संख्या लगभग 60 लाख है।
रिपोर्ट का अनुमान है कि अगले कुछ वर्षों में ऐप-आधारित रोजगार के अवसर लगभग तीन गुना तक बढ़ सकते हैं, जिससे करोड़ों लोगों को आजीविका का नया माध्यम मिलेगा।
क्या है गिग इंटरनेट वर्कफोर्स
गिग वर्कफोर्स से आशय उन लोगों से है जो मोबाइल ऐप या डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सेवाएं प्रदान करते हैं। इसमें फूड डिलीवरी, किराना डिलीवरी, टैक्सी और बाइक टैक्सी सेवा, होम रिपेयर, ब्यूटी सर्विस, लॉजिस्टिक्स, फ्रीलांस डिजिटल कार्य और अन्य ऑन-डिमांड सेवाएं शामिल हैं।
पिछले कुछ वर्षों में स्मार्टफोन और इंटरनेट की पहुंच बढ़ने के साथ यह क्षेत्र तेजी से विकसित हुआ है। आज लाखों लोग पूर्णकालिक या अंशकालिक रूप से इन प्लेटफॉर्मों से जुड़कर आय अर्जित कर रहे हैं।
2030 तक 60 लाख से बढ़कर 2.1 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान
रेडसीर की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में भारत में लगभग 60 लाख लोग नियमित रूप से विभिन्न गिग इंटरनेट प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हैं। वर्ष 2030 तक यह संख्या 1.7 करोड़ से 2.1 करोड़ के बीच पहुंच सकती है।
रिपोर्ट का कहना है कि यह वृद्धि केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों में भी ऐप-आधारित सेवाओं के विस्तार के कारण रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
पहली बार नौकरी करने वालों के लिए बड़ा अवसर
रिपोर्ट की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गिग अर्थव्यवस्था लाखों लोगों के लिए रोजगार का पहला अवसर बन रही है।
सर्वेक्षण के अनुसार, 54 प्रतिशत गिग वर्कर ऐसे हैं जो प्लेटफॉर्म से जुड़ने से पहले किसी भुगतान वाले रोजगार में नहीं थे। वहीं अनुमान है कि 2030 तक बनने वाली कुल गिग वर्कफोर्स में 30 प्रतिशत से अधिक लोग पहली बार रोजगार बाजार में प्रवेश करेंगे।
इसका अर्थ है कि छात्र, ग्रामीण युवा, महिलाएं और ऐसे लोग जिन्हें पारंपरिक नौकरी नहीं मिल पाती, उनके लिए गिग सेक्टर एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकता है।
2030 तक आय में भी बेहतर अवसर
रिपोर्ट के अनुसार, पूर्णकालिक गिग वर्कर समान प्रकार के कई औपचारिक और अनौपचारिक रोजगारों की तुलना में करीब 2.5 गुना अधिक मासिक शुद्ध आय अर्जित कर सकते हैं।
हालांकि आय शहर, कार्य के प्रकार, अनुभव और काम के घंटों पर निर्भर करती है, लेकिन कई श्रमिकों ने बताया कि प्लेटफॉर्म आधारित काम से उन्हें आर्थिक रूप से अधिक स्वतंत्रता मिली है।
लचीले कार्य समय की बढ़ती मांग
गिग अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता इसका लचीला कार्य ढांचा है।
रिपोर्ट के अनुसार, 90 प्रतिशत से अधिक मासिक सक्रिय गिग वर्कर अंशकालिक (पार्ट-टाइम) रूप से काम करना पसंद करते हैं। इससे वे पढ़ाई, पारिवारिक जिम्मेदारियों या अन्य कार्यों के साथ अतिरिक्त आय भी अर्जित कर सकते हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में लचीले कार्य मॉडल की मांग और बढ़ेगी।
2030 तक महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर
रिपोर्ट में कहा गया है कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना गिग अर्थव्यवस्था के अगले विकास चरण का सबसे बड़ा अवसर हो सकता है।
होम सर्विस, ब्यूटी सेवाओं, ऑनलाइन प्रोफेशनल सेवाओं और डिजिटल फ्रीलांसिंग जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। यदि सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं बेहतर होती हैं, तो बड़ी संख्या में महिलाएं इस क्षेत्र से जुड़ सकती हैं।
छोटे शहर बनेंगे विकास का नया केंद्र
अब तक गिग प्लेटफॉर्म का सबसे बड़ा बाजार दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे बड़े शहर रहे हैं।
लेकिन ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स और ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार के कारण टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी तेजी से मांग बढ़ रही है।विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में गिग रोजगार का बड़ा हिस्सा छोटे शहरों और अर्ध-शहरी क्षेत्रों से आएगा।
डिजिटल इंडिया का असर
सरकार की डिजिटल इंडिया पहल, तेज इंटरनेट, यूपीआई भुगतान प्रणाली और स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच ने गिग अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार दिया है।
आज अधिकांश प्लेटफॉर्म पूरी तरह डिजिटल हैं, जहां पंजीकरण से लेकर भुगतान तक की प्रक्रिया ऑनलाइन होती है।डिजिटल भुगतान व्यवस्था ने लाखों लोगों के लिए प्लेटफॉर्म आधारित रोजगार को सरल बनाया है।
चुनौतियां भी कम नहीं
हालांकि गिग सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके सामने कई चुनौतियां भी हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा, पेंशन, न्यूनतम आय, कार्यस्थल सुरक्षा और एल्गोरिदम आधारित कार्य आवंटन जैसे मुद्दे अभी भी महत्वपूर्ण हैं।
कई गिग वर्कर लंबे समय से बेहतर सुरक्षा और कल्याण योजनाओं की मांग करते रहे हैं।
सरकार की पहल
हाल के वर्षों में केंद्र और कई राज्य सरकारों ने गिग वर्करों के लिए सामाजिक सुरक्षा संबंधी कदम उठाने की दिशा में पहल की है।
श्रम कानूनों में प्लेटफॉर्म वर्कर और गिग वर्कर को अलग श्रेणी के रूप में शामिल करने तथा कल्याणकारी योजनाओं का दायरा बढ़ाने पर लगातार चर्चा हो रही है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सामाजिक सुरक्षा और कौशल विकास को मजबूत किया जाए तो यह क्षेत्र देश के रोजगार परिदृश्य में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ
गिग अर्थव्यवस्था के विस्तार से केवल रोजगार ही नहीं बढ़ेगा, बल्कि उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं, डिजिटल लेन-देन में वृद्धि और स्थानीय व्यवसायों को भी फायदा मिलेगा।
लॉजिस्टिक्स, ई-कॉमर्स, फूड डिलीवरी, ऑनलाइन हेल्थकेयर और घरेलू सेवाओं जैसे क्षेत्रों में तेजी आने से समग्र आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है।
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विशेषज्ञों की राय
रेडसीर के अनुसार, गिग इंटरनेट वर्कफोर्स का सबसे बड़ा महत्व यह है कि यह लोगों को पारंपरिक रोजगार संरचनाओं तक सीमित रहने के बजाय अपनी सुविधा के अनुसार काम करने का अवसर देती है।
यह मॉडल उन लोगों के लिए भी उपयोगी है जो अतिरिक्त आय अर्जित करना चाहते हैं, करियर बदल रहे हैं या पहली बार रोजगार की दुनिया में कदम रख रहे हैं।
निष्कर्ष
रेडसीर की रिपोर्ट बताती है कि भारत की गिग इंटरनेट अर्थव्यवस्था आने वाले वर्षों में रोजगार सृजन का एक बड़ा माध्यम बन सकती है। वर्तमान के लगभग 60 लाख सक्रिय गिग वर्करों की संख्या 2030 तक बढ़कर 1.7 करोड़ से 2.1 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। यह वृद्धि डिलीवरी, राइड-हेलिंग, होम सर्विस और अन्य ऐप-आधारित सेवाओं के विस्तार से संभव होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार, उद्योग और डिजिटल प्लेटफॉर्म मिलकर सामाजिक सुरक्षा, कौशल विकास और सुरक्षित कार्य परिस्थितियों पर ध्यान दें, तो गिग अर्थव्यवस्था न केवल करोड़ों लोगों को रोजगार दे सकती है, बल्कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

