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वंदे मातरम्’ के अपमान को बनाया जाएगा दंडनीय अपराध? संसद में संशोधन विधेयक लाने की तैयारी

केंद्र सरकार संसद के मानसून सत्र में एक महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की तैयारी में है, जिसके तहत राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का अपमान या इसके गायन में जानबूझकर बाधा डालना दंडनीय अपराध बनाया जा सकता है। प्रस्तावित ‘राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026’ का उद्देश्य ‘वंदे मातरम्’ को कानूनी संरक्षण के मामले में राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के समान दर्जा देना है। यह विधेयक संसद के उच्च सदन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पेश किए जाने की संभावना है।

यदि यह विधेयक संसद से पारित हो जाता है, तो ‘वंदे मातरम्’ के अपमान, इसके गायन में जानबूझकर व्यवधान उत्पन्न करने या सार्वजनिक रूप से इसका अनादर करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी। प्रस्तावित संशोधन को राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को और मजबूत करने की दिशा में सरकार का एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

क्या है प्रस्तावित वंदे मातरम संशोधन?

सरकार राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 (Prevention of Insults to National Honour Act, 1971) में संशोधन करना चाहती है। वर्तमान कानून के तहत राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रीय गान के अपमान को दंडनीय अपराध माना जाता है। नए संशोधन का उद्देश्य इसी कानूनी दायरे में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को भी शामिल करना है।

प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर ‘वंदे मातरम्’ के गायन में बाधा डालता है, उसका अपमान करता है या सार्वजनिक रूप से उसका अनादर करता है, तो उसके विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकेगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार ऐसे मामलों में तीन वर्ष तक के कारावास, जुर्माना या दोनों का प्रावधान प्रस्तावित है।

संसद में पेश होने की तैयारीवंदे मातरम्

राज्यसभा के कार्यसूची दस्तावेज़ के अनुसार मानसून सत्र के पहले दिन इस संशोधन विधेयक को पेश किए जाने की संभावना जताई गई है। संसद में पेश होने के बाद इस पर चर्चा होगी और दोनों सदनों से पारित होने के बाद ही यह कानून का रूप ले सकेगा।

संसदीय कार्यवाही के दौरान सरकार इस संशोधन की आवश्यकता, इसके उद्देश्य और कानूनी प्रावधानों पर विस्तार से अपना पक्ष रख सकती है।

सरकार का उद्देश्य

सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रीय पहचान से जुड़े प्रतीकों का सम्मान लोकतांत्रिक व्यवस्था और राष्ट्रीय एकता के लिए आवश्यक है। इसी सोच के तहत ‘वंदे मातरम्’ को भी विधिक संरक्षण देने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार यह कदम राष्ट्रीय गीत के सम्मान को सुनिश्चित करने तथा उसके जानबूझकर अपमान की घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।

वंदे मातरम्’ का ऐतिहासिक महत्व

‘वंदे मातरम्’ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक प्रमुख प्रतीक रहा है। इसकी रचना बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने अपने प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में की थी। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह गीत देशभक्ति और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बन गया था।

स्वतंत्र भारत में ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गीत का दर्जा प्राप्त हुआ। हालांकि संविधान में ‘राष्ट्रीय गीत’ शब्द का अलग से उल्लेख नहीं है, लेकिन लंबे समय से इसे राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त है और विभिन्न सरकारी तथा सार्वजनिक कार्यक्रमों में इसका विशेष स्थान रहा है।

मौजूदा कानून में क्या है?

वर्तमान राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रीय गान का अपमान दंडनीय अपराध है।

यदि प्रस्तावित संशोधन पारित होता है, तो ‘वंदे मातरम्’ भी इसी कानूनी संरक्षण के दायरे में आ जाएगा। इससे राष्ट्रीय गीत के सम्मान से जुड़े मामलों में स्पष्ट कानूनी व्यवस्था लागू होगी।

राजनीतिक प्रतिक्रियाओं की संभावना

विधेयक संसद में पेश होने से पहले ही राजनीतिक हलकों में इसकी चर्चा शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि संसद में इस पर व्यापक बहस हो सकती है।

सरकार इसे राष्ट्रीय सम्मान और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा से जुड़ा कदम बता सकती है, जबकि विपक्ष के कुछ दल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, कानून के दायरे और इसके संभावित प्रभावों को लेकर सवाल उठा सकते हैं। फिलहाल विधेयक पर औपचारिक संसदीय चर्चा होना बाकी है।

कानूनी विशेषज्ञों की राय

संवैधानिक मामलों के जानकारों का मानना है कि यदि विधेयक कानून बनता है, तो इसके प्रावधानों की व्याख्या और अनुपालन महत्वपूर्ण होगा। विशेषज्ञों के अनुसार अदालतें यह देख सकती हैं कि किसी मामले में कथित अपमान जानबूझकर किया गया था या नहीं।

वे यह भी मानते हैं कि कानून लागू करते समय राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक होगा।

संसद में हो सकती है विस्तृत चर्चा

मानसून सत्र के दौरान इस विधेयक पर विभिन्न राजनीतिक दल अपनी-अपनी राय रख सकते हैं। कई सांसद संशोधन या सुझाव भी दे सकते हैं।

यदि दोनों सदनों से विधेयक पारित हो जाता है और राष्ट्रपति की मंजूरी मिल जाती है, तो यह संशोधन पूरे देश में लागू हो जाएगा।

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राष्ट्रीय महत्व का विषय

राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन, राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। इसलिए इस संबंध में लाया जा रहा कोई भी विधायी कदम स्वाभाविक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा का विषय बनता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान को संस्थागत रूप से मजबूत करना है, जबकि इसके व्यावहारिक प्रभावों पर अंतिम राय संसद में होने वाली बहस और कानून के अंतिम स्वरूप के बाद ही स्पष्ट होगी।

निष्कर्ष

केंद्र सरकार द्वारा ‘राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026’ लाने की तैयारी भारतीय संसद के मानसून सत्र का एक महत्वपूर्ण विधायी कदम माना जा रहा है। प्रस्तावित संशोधन के तहत ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गान के समान कानूनी संरक्षण देने और उसके अपमान या गायन में जानबूझकर बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाने का प्रावधान किया गया है।

अब सभी की निगाहें संसद की कार्यवाही पर टिकी हैं, जहां इस विधेयक पर विस्तृत चर्चा होगी। बहस के दौरान सरकार और विपक्ष अपने-अपने तर्क रखेंगे और उसके बाद ही यह तय होगा कि यह प्रस्तावित संशोधन कानून का रूप ले पाता है या नहीं।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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