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कैबिनेट का रेलवे को बड़ा तोहफा: 20,804 करोड़ रुपये की आठ मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी, 9 राज्यों के 31 जिलों को मिलेगा लाभ

केंद्र सरकार ने रेलवे के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) ने बुधवार को देश के नौ राज्यों में आठ मल्टी-ट्रैकिंग रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दे दी। इन परियोजनाओं पर कुल 20,804 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। प्रस्तावित परियोजनाओं के तहत लगभग 1,196 किलोमीटर अतिरिक्त रेल ट्रैक बिछाए जाएंगे। सरकार का कहना है कि इससे व्यस्त रेल मार्गों पर ट्रेनों की आवाजाही सुगम होगी, भीड़ और परिचालन संबंधी बाधाएं कम होंगी तथा यात्री और माल परिवहन की क्षमता बढ़ेगी।

इन परियोजनाओं का असर पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के साथ-साथ तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना तक होगा। कुल मिलाकर 31 जिलों में रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने की योजना है। परियोजनाओं के पूरा होने से करीब 6,911 गांवों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है।

क्यों जरूरी हैं ये रेलवे परियोजनाएं?रेलवे

भारतीय रेलवे देश के सबसे बड़े परिवहन नेटवर्क में शामिल है। कई प्रमुख रूटों पर यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में मौजूदा रेल लाइनों पर क्षमता का दबाव बढ़ता है। एक ही ट्रैक या सीमित संख्या में ट्रैक होने पर ट्रेनों को क्रॉसिंग और सिग्नल के लिए इंतजार करना पड़ता है, जिससे परिचालन प्रभावित होता है।

नई मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं का उद्देश्य ऐसे ही व्यस्त मार्गों की क्षमता बढ़ाना है। सरकार के मुताबिक अतिरिक्त ट्रैक से ट्रेनों को अधिक सुचारु ढंग से संचालित किया जा सकेगा और मालगाड़ियों की आवाजाही के लिए भी पर्याप्त क्षमता उपलब्ध होगी। इससे यात्री सेवाओं को समयबद्ध बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

पांच राज्यों में 656 किलोमीटर ट्रैक का विस्तार

मंजूर किए गए आठ प्रोजेक्टों में से तीन महत्वपूर्ण परियोजनाएं पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में लागू होंगी। इन परियोजनाओं पर करीब 10,783 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इनके तहत लगभग 656 किलोमीटर अतिरिक्त ट्रैक तैयार किए जाएंगे।

इनमें खड़गपुर-जhारसुगुड़ा और कटनी-पेंड्रा रोड सेक्शन में चौथी लाइन तथा बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड के बीच तीसरी लाइन विकसित करने की योजना शामिल है। इन परियोजनाओं से लगभग 4,790 गांवों और करीब 56 लाख लोगों को लाभ मिलने का अनुमान है।

इन क्षेत्रों का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यहां कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट और इस्पात जैसे औद्योगिक माल की बड़ी मात्रा में आवाजाही होती है। अतिरिक्त ट्रैक से मालगाड़ियों को अधिक क्षमता मिलेगी और औद्योगिक क्षेत्रों तक माल पहुंचाने में समय तथा लागत कम हो सकती है।

दक्षिण भारत के रेल नेटवर्क को भी मजबूती

कैबिनेट की मंजूरी का दूसरा बड़ा हिस्सा दक्षिण भारत से जुड़ा है। तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में पांच मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं पर करीब 10,021 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इन परियोजनाओं के जरिए लगभग 540 किलोमीटर अतिरिक्त ट्रैक विकसित किए जाएंगे।

प्रस्तावित परियोजनाओं में अरक्कोनम-रेणिगुंटा और व्हाइटफील्ड-बैंगारपेट जैसे महत्वपूर्ण रेल सेक्शन शामिल हैं। दक्षिण भारत के इन मार्गों पर यात्री और माल यातायात दोनों का दबाव काफी अधिक है। इसलिए अतिरिक्त ट्रैक बनने से चेन्नई, बेंगलुरु और आंध्र प्रदेश के महत्वपूर्ण हिस्सों के बीच रेल संपर्क को फायदा मिलने की उम्मीद है।

6,911 गांवों और करीब 1.1 करोड़ लोगों को फायदा

इन परियोजनाओं का प्रभाव केवल रेलवे स्टेशनों और प्रमुख शहरों तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार के अनुसार, परियोजनाओं से करीब 6,911 गांवों को बेहतर रेल संपर्क मिलेगा। इन क्षेत्रों की कुल आबादी लगभग 1.1 करोड़ बताई गई है।

बेहतर रेल कनेक्टिविटी से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजारों तक पहुंच में सुविधा मिल सकती है। स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में भी रेल परिवहन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

पर्यटन की दृष्टि से भी कई क्षेत्रों को लाभ मिलने की संभावना है। रेल संपर्क बेहतर होने से धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी। परियोजनाओं से जुड़े क्षेत्रों में प्रमुख पर्यटन स्थलों और औद्योगिक केंद्रों तक कनेक्टिविटी मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।

माल ढुलाई क्षमता में 74 मिलियन टन सालाना इजाफा

रेलवे के लिए इन परियोजनाओं का एक बड़ा उद्देश्य माल ढुलाई क्षमता को बढ़ाना है। अनुमान के मुताबिक, अतिरिक्त बुनियादी ढांचे से करीब 74 मिलियन टन प्रति वर्ष अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता तैयार हो सकती है। इसमें कोयला, सीमेंट, इस्पात, पेट्रोलियम उत्पाद, उर्वरक, ऑटोमोबाइल और खाद्यान्न जैसी वस्तुओं का परिवहन शामिल होगा।

माल ढुलाई को सड़क से रेल की ओर स्थानांतरित करने से लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा रेल परिवहन अपेक्षाकृत कम ईंधन में बड़ी मात्रा में माल ढो सकता है, जिससे ईंधन की बचत और कार्बन उत्सर्जन में कमी की संभावना रहती है।

PM Gati Shakti से जुड़ी परियोजनाएं

सरकार ने इन परियोजनाओं को PM Gati Shakti National Master Plan के अनुरूप बताया है। इस योजना का उद्देश्य विभिन्न परिवहन माध्यमों—रेल, सड़क, बंदरगाह और अन्य लॉजिस्टिक्स नेटवर्क—को बेहतर तरीके से जोड़कर देश की परिवहन व्यवस्था को अधिक कुशल बनाना है।

मल्टी-ट्रैकिंग से रेलवे की क्षमता बढ़ने के साथ ही औद्योगिक क्षेत्रों, खनन क्षेत्रों, कृषि उत्पाद बाजारों और बंदरगाहों तक माल की आवाजाही अधिक प्रभावी हो सकती है। इससे देश की लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

2030 तक पूरा करने का लक्ष्य

मंजूर परियोजनाओं को वित्त वर्ष 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि इतने बड़े रेल विस्तार कार्यों में भूमि, निर्माण, तकनीकी मंजूरी और स्थानीय परिस्थितियों जैसी कई चुनौतियां सामने आ सकती हैं। सरकार के लिए यह महत्वपूर्ण होगा कि परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जाए ताकि अनुमानित आर्थिक और सामाजिक लाभ जल्द लोगों तक पहुंच सकें।

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रेलवे आधुनिकीकरण की बड़ी तस्वीर

इन आठ परियोजनाओं को केवल नए ट्रैक बिछाने की योजना के रूप में नहीं देखा जा रहा है। यह भारतीय रेलवे की क्षमता बढ़ाने और मौजूदा नेटवर्क पर दबाव कम करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

हाल के वर्षों में सरकार ने रेलवे में विद्युतीकरण, स्टेशन आधुनिकीकरण, समर्पित माल गलियारों और मल्टी-ट्रैकिंग पर जोर दिया है। हाल ही में देश का डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर नेटवर्क भी पूरा होने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज कर चुका है। ऐसे में नई मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाएं यात्री और माल परिवहन दोनों की क्षमता को आगे बढ़ाने की कड़ी में देखी जा सकती हैं।

निष्कर्ष

केंद्र सरकार की ओर से मंजूर 20,804 करोड़ रुपये की आठ रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाएं भारतीय रेल नेटवर्क के विस्तार और क्षमता वृद्धि के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। लगभग 1,196 किलोमीटर अतिरिक्त ट्रैक से नौ राज्यों के 31 जिलों में रेल परिचालन को मजबूती मिलेगी। करीब 6,911 गांवों और लगभग 1.1 करोड़ लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ मिलने की उम्मीद है।

परियोजनाओं से न केवल यात्री ट्रेनों की आवाजाही सुगम होने की उम्मीद है, बल्कि माल ढुलाई क्षमता में भी बड़ा इजाफा होगा। कोयला, सीमेंट, इस्पात, पेट्रोलियम और खाद्यान्न जैसे जरूरी सामान की आवाजाही तेज होने से उद्योग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को फायदा मिल सकता है।

सरकार का लक्ष्य इन परियोजनाओं को 2030 तक पूरा करना है। यदि निर्धारित समयसीमा में काम पूरा होता है, तो यह निवेश भारत के रेल नेटवर्क को अधिक सक्षम, तेज और आर्थिक रूप से प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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