HomeViral News"स्कूल ठीक करो "अभियान से राजस्थान में सरकारी स्कूलों के कायाकल्प का...

“स्कूल ठीक करो “अभियान से राजस्थान में सरकारी स्कूलों के कायाकल्प का बड़ा प्लान, ₹12,500 करोड़ खर्च करेगी भजनलाल सरकार

राजस्थान में सरकारी स्कूलों की बदहाल आधारभूत सुविधाओं को सुधारने के लिए भजनलाल शर्मा सरकार ने तीन साल का बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर रोडमैप घोषित किया है। राज्य सरकार के मुताबिक, सरकारी स्कूलों के विकास पर कुल 12,500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस योजना में नए स्कूल भवनों के निर्माण से लेकर हजारों नए कक्षों, शौचालय परिसरों, मरम्मत कार्यों और डिजिटल शिक्षा सुविधाओं के विस्तार का प्रावधान किया गया है।

यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब राजस्थान में सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर सार्वजनिक और राजनीतिक बहस तेज है। नागरिक समूह ‘School Thik Karo’ अभियान के तहत सरकारी स्कूलों की स्थिति का निरीक्षण करने की कोशिश कर रहे हैं। इसी दौरान स्कूल परिसरों में बाहरी लोगों के प्रवेश, फोटो और वीडियो बनाने को लेकर शिक्षा विभाग के नए दिशा-निर्देशों ने भी विवाद खड़ा किया। कांग्रेस और अन्य आलोचकों ने सरकार पर स्कूलों की वास्तविक स्थिति को लेकर पारदर्शिता से बचने का आरोप लगाया है, जबकि सरकार ने नियमों को बच्चों की सुरक्षा और निजता से जोड़कर उचित ठहराया है।

राजस्थान सरकार के 12,500 करोड़ की योजना में क्या-क्या शामिल?राजस्थान

राज्य सरकार के घोषित रोडमैप के अनुसार, 3,587 नए स्कूल भवनों के निर्माण पर लगभग 2,487.7 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा 83,783 नई कक्षाओं के निर्माण के लिए करीब 8,378.3 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

सरकार की योजना केवल नए निर्माण तक सीमित नहीं है। 22,589 सरकारी स्कूलों में बड़े मरम्मत कार्य किए जाने हैं, जिन पर लगभग 1,129.5 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके अलावा विद्यार्थियों के लिए बेहतर स्वच्छता सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 13,616 नए टॉयलेट कॉम्प्लेक्स बनाने की योजना है, जिस पर करीब 340.4 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

सरकार का कहना है कि स्कूल विकास से जुड़े 3,006 करोड़ रुपये से अधिक के काम पहले ही स्वीकृत हो चुके हैं या अलग-अलग चरणों में चल रहे हैं।

राजस्थान में डिजिटल शिक्षा को भी मिलेगा बढ़ावा

राजस्थान सरकार ने स्कूलों के भौतिक ढांचे के साथ-साथ डिजिटल शिक्षा पर भी जोर दिया है। योजना के तहत 9,000 स्मार्ट क्लासरूम, 7,000 सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) लैब और 80,000 टैबलेट उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। डिजिटल शिक्षा के लिए दिसंबर 2026 तक करीब 1,087 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान बताया गया है।

सरकार का तर्क है कि आधुनिक स्कूल केवल मजबूत भवन और पर्याप्त कक्षाओं तक सीमित नहीं हो सकते। विद्यार्थियों को तकनीक आधारित शिक्षा उपलब्ध कराना भी जरूरी है, खासकर ऐसे समय में जब डिजिटल संसाधन पढ़ाई का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं।

611 स्कूलों के पास अपना भवन नहीं

सरकारी स्कूलों की आधारभूत स्थिति से जुड़े आंकड़े इस योजना की जरूरत को और स्पष्ट करते हैं। विधानसभा में हाल में पेश आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में 611 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जिनके पास अपना भवन तक नहीं है। ये स्कूल किराए के भवनों या साझा परिसरों में संचालित हो रहे हैं।

यह स्थिति विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण है। स्कूल के लिए स्थायी भवन नहीं होने से कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय, खेल मैदान और अन्य सुविधाओं के विकास में भी दिक्कत आती है।इसी व्यापक समस्या को देखते हुए सरकार की नई योजना में नए भवनों और कक्षाओं के निर्माण को सबसे बड़ा हिस्सा दिया गया है।

3,768 स्कूल भवनों को बताया गया असुरक्षित

राजस्थान के शिक्षा विभाग द्वारा किए गए राज्यव्यापी सर्वेक्षण में 3,768 स्कूल भवनों को जर्जर या शैक्षणिक गतिविधियों के लिए असुरक्षित पाया गया है। इनमें से पहले चरण में 300 स्कूलों के नए भवन बनाने की योजना सामने आई थी। इसके लिए करीब 409 करोड़ रुपये का प्रावधान बताया गया था।

सरकार ने कहा है कि ऐसे स्कूलों को चरणबद्ध तरीके से नए भवन उपलब्ध कराए जाएंगे। वहीं, 960 अन्य स्कूलों के पुनर्निर्माण के प्रस्ताव NABARD को भेजे गए हैं और 418 स्कूलों में दूसरे कार्यक्रमों के तहत काम पहले से चल रहा है।

School Thik Karo’ अभियान के बाद बढ़ी निगरानी

सरकारी स्कूलों का मुद्दा हाल के दिनों में ‘School Thik Karo’ अभियान के कारण राजस्थान की राजनीति में प्रमुखता से उभरा। अभियान के तहत स्वयंसेवकों द्वारा सरकारी स्कूलों में जाकर कक्षाओं, शौचालयों और अन्य सुविधाओं की स्थिति देखने और उसे सार्वजनिक करने की कोशिश की गई।

इसके बाद शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश को लेकर नए नियम जारी किए। बिना पूर्व अनुमति किसी बाहरी व्यक्ति को स्कूल परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं है। इसके अलावा विद्यार्थियों और शिक्षकों से संबंधित फोटो, वीडियो, इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग के लिए भी पूर्व लिखित अनुमति जरूरी कर दी गई।

राजनीतिक विवाद भी तेज

स्कूलों की स्थिति को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी बढ़ा है। कांग्रेस ने स्कूल परिसरों में निरीक्षण और रिकॉर्डिंग पर लगाई गई पाबंदियों पर सवाल उठाते हुए इसे पारदर्शिता के खिलाफ बताया है। वहीं, सरकार का कहना है कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और निजता को प्राथमिकता देना जरूरी है।

इस बीच, ‘School Thik Karo’ अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के बीच एक स्कूल निरीक्षण के दौरान कथित टकराव ने भी विवाद को बढ़ाया। संगठन ने अपने कार्यकर्ताओं पर हमले का आरोप लगाया, जबकि स्थानीय लोगों ने अलग पक्ष रखते हुए आरोपों से इनकार किया।

ऐसे माहौल में 12,500 करोड़ रुपये की योजना को केवल शिक्षा सुधार कार्यक्रम के तौर पर नहीं, बल्कि मौजूदा राजनीतिक और सार्वजनिक दबाव के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

राजस्थान सरकार के सामने बड़ी चुनौती क्रियान्वयन की

इतनी बड़ी राशि की घोषणा अपने आप में महत्वपूर्ण है, लेकिन असली चुनौती इसका प्रभावी क्रियान्वयन होगी। राजस्थान में बड़ी संख्या में स्कूल भवनों की मरम्मत, नए भवनों का निर्माण, हजारों कक्षाओं का निर्माण और डिजिटल सुविधाओं की स्थापना एक व्यापक प्रशासनिक अभियान की मांग करेगी।

यह भी जरूरी होगा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर लगातार निगरानी रखी जाए और बजट का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्यों के लिए हो। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में काम समय पर पूरा करना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

आगे और समाचार पढ़े:

शिक्षा व्यवस्था के लिए क्या मायने?

यदि योजना निर्धारित समय में लागू होती है, तो राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सुरक्षित भवन, पर्याप्त कक्षाएं, बेहतर शौचालय, स्मार्ट क्लासरूम, ICT लैब और टैबलेट जैसी सुविधाएं विद्यार्थियों के सीखने के वातावरण को बेहतर बना सकती हैं।

हालांकि, केवल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश से शिक्षा की गुणवत्ता पूरी तरह नहीं सुधरेगी। शिक्षकों की उपलब्धता, प्रशिक्षण, छात्र-शिक्षक अनुपात, उपस्थिति, सीखने के परिणाम और विद्यार्थियों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा।

राज्य शिक्षा विभाग ने हाल में शिक्षकों के लिए जेंडर-सेंसिटाइजेशन प्रशिक्षण की योजना भी सामने रखी है, खासकर विद्यार्थियों की शिकायतों के बाद। इससे संकेत मिलता है कि सरकार के सामने स्कूल व्यवस्था में केवल भवन निर्माण ही नहीं, बल्कि सुरक्षा और प्रशासन से जुड़े मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं।

निष्कर्ष

राजस्थान सरकार की 12,500 करोड़ रुपये की तीन वर्षीय स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर योजना राज्य की सरकारी शिक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ा निवेश है। 3,587 नए भवन, 83,783 कक्षाएं, 22,589 स्कूलों में बड़े मरम्मत कार्य और 13,616 टॉयलेट कॉम्प्लेक्स का लक्ष्य बुनियादी सुविधाओं की मौजूदा कमी को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

इसके साथ ही 9,000 स्मार्ट क्लासरूम, 7,000 ICT लैब और 80,000 टैबलेट का प्रावधान शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल रूप से मजबूत करने की कोशिश है।

लेकिन योजना की सफलता केवल घोषित बजट से तय नहीं होगी। समय पर निर्माण, गुणवत्ता, पारदर्शिता और वास्तविक जरूरत वाले स्कूलों तक संसाधनों की पहुंच इसके सबसे महत्वपूर्ण पैमाने होंगे। राजस्थान में सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर चल रही बहस के बीच अब सरकार के सामने घोषणा को जमीन पर उतारने और जनता का भरोसा कायम करने की बड़ी जिम्मेदारी है।

WhatsApp Group
Join Now
PandeyAbhishek
PandeyAbhishek
Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular