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मोबाइल फोन का डिब्बा बना टिफिन, यूपी के शख्स का जुगाड़ सोशल मीडिया पर वायरल

सोशल मीडिया पर कब क्या वायरल हो जाए, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। कभी कोई मजेदार वीडियो लोगों का ध्यान खींचता है तो कभी किसी आम व्यक्ति का अनोखा जुगाड़ इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन जाता है। ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश से सामने आया है, जहां एक व्यक्ति ने मोबाइल फोन के बॉक्स को ही टिफिन बॉक्स की तरह इस्तेमाल कर लिया। उसकी यह अनोखी तरकीब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और इंटरनेट यूजर्स ने इसे मजाकिया अंदाज में ‘रियल अनबॉक्सिंग’ करार दिया।

उत्तर प्रदेश के इस व्यक्ति की तस्वीर या उससे जुड़ा कंटेंट सोशल मीडिया पर लोगों के बीच तेजी से साझा किया जा रहा है। आमतौर पर मोबाइल फोन खरीदने के बाद उसका बॉक्स कुछ समय तक संभालकर रखा जाता है और बाद में या तो किसी सामान को रखने में इस्तेमाल होता है या फिर घर के किसी कोने में पड़ा रहता है। लेकिन इस व्यक्ति ने मोबाइल बॉक्स को एक अलग ही काम में लगा दिया।

मोबाइल बॉक्स का अनोखा इस्तेमालमोबाइल

मोबाइल फोन के बॉक्स को टिफिन की तरह इस्तेमाल करने का यह तरीका देखने में भले ही साधारण लगे, लेकिन सोशल मीडिया पर इसे लेकर लोगों की दिलचस्पी काफी बढ़ गई। तस्वीर में फोन रखने के लिए बने बॉक्स का इस्तेमाल खाने का सामान रखने के लिए किया गया दिखाई देता है।

इंटरनेट पर लोगों ने इस दृश्य को हास्य के साथ लिया। मोबाइल फोन के बॉक्स को देखकर ‘अनबॉक्सिंग’ शब्द आमतौर पर नए स्मार्टफोन को पैकेजिंग से निकालने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन यहां बॉक्स में फोन के बजाय खाना दिखाई देने के कारण यूजर्स ने इसे ‘रियल अनबॉक्सिंग’ कहना शुरू कर दिया।

इस पूरे मामले की खासियत यही है कि इसमें किसी महंगे गैजेट या तकनीकी उपलब्धि के बजाय एक साधारण चीज के रचनात्मक इस्तेमाल ने लोगों का ध्यान खींचा।

इंटरनेट पर शुरू हुआ मजेदार कमेंट्स का दौर

वायरल तस्वीर सामने आते ही सोशल मीडिया यूजर्स ने तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं। कई लोगों ने इस जुगाड़ को मजेदार बताया, जबकि कुछ ने इसे रोजमर्रा की चीजों को दोबारा इस्तेमाल करने की मिसाल के तौर पर देखा।

रियल अनबॉक्सिंग’ वाली टिप्पणी सबसे ज्यादा चर्चा में रही। सामान्य तौर पर किसी नए फोन की पैकेजिंग खोलते समय लोग बॉक्स के अंदर मौजूद फोन, चार्जर और अन्य सामान देखने के लिए उत्साहित रहते हैं। यहां स्थिति बिल्कुल उलट थी—फोन के बॉक्स में खाने का सामान रखा गया था।यही उलटफेर सोशल मीडिया के लिए मनोरंजन का कारण बन गया।

जुगाड़ की सोच ने फिर खींचा ध्यान

भारत में रोजमर्रा की जरूरतों के लिए उपलब्ध चीजों का वैकल्पिक इस्तेमाल करने की परंपरा को अक्सर ‘जुगाड़’ कहा जाता है। कई बार यह जुगाड़ केवल पैसे बचाने का तरीका नहीं होता, बल्कि किसी समस्या का तत्काल और आसान समाधान भी बन जाता है।

उत्तर प्रदेश के इस मामले में भी व्यक्ति ने किसी विशेष टिफिन की जगह पहले से उपलब्ध मोबाइल बॉक्स का इस्तेमाल किया। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि उसने इसे कितने समय से टिफिन के तौर पर इस्तेमाल करना शुरू किया या इसके पीछे उसका मुख्य उद्देश्य क्या था।

फिर भी, इंटरनेट पर इस छोटी-सी घटना ने यह दिखा दिया कि साधारण और रोजमर्रा की चीजें भी किस तरह लोगों का ध्यान खींच सकती हैं।

सोशल मीडिया के दौर में छोटी घटना भी बन जाती है बड़ी खबर

आज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लोगों को ऐसी घटनाएं साझा करने का अवसर देते हैं, जो पहले शायद स्थानीय स्तर से आगे नहीं जातीं। किसी सड़क किनारे का जुगाड़, किसी दुकानदार का अनोखा तरीका या किसी व्यक्ति की रचनात्मक सोच कुछ ही घंटों में हजारों लोगों तक पहुंच सकती है।

इस मामले में भी मोबाइल बॉक्स को टिफिन के रूप में इस्तेमाल करने की तस्वीर ने यही किया। एक सामान्य व्यक्ति की रोजमर्रा की आदत इंटरनेट पर मनोरंजन का विषय बन गई।

ऐसे वायरल कंटेंट की लोकप्रियता का एक कारण यह भी है कि इसमें आम लोगों को अपनी जिंदगी से जुड़ी चीजें नजर आती हैं। हर घर में मोबाइल फोन के पुराने बॉक्स आसानी से मिल सकते हैं और इसलिए लोगों को यह जुगाड़ तुरंत समझ में आता है।

फेंकने के बजाय इस्तेमाल’ की सोच

इस घटना का एक सकारात्मक पहलू पुन: उपयोग यानी reuse की सोच भी है। मोबाइल फोन के बॉक्स आमतौर पर मजबूत होते हैं और उन्हें कई लोग दस्तावेज, छोटे इलेक्ट्रॉनिक सामान या दूसरी वस्तुएं रखने के लिए इस्तेमाल करते हैं।

हालांकि, यदि किसी बॉक्स में भोजन रखा जा रहा हो तो स्वच्छता और सामग्री की सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है। हर प्रकार की पैकेजिंग खाद्य पदार्थ रखने के लिए डिजाइन नहीं की जाती। इसलिए ऐसे किसी भी वैकल्पिक इस्तेमाल में यह देखना आवश्यक है कि बॉक्स साफ-सुथरा हो और भोजन उसके संपर्क में आने से सुरक्षित रहे।फिर भी, वायरल तस्वीर का मुख्य आकर्षण स्वास्थ्य संबंधी सलाह नहीं, बल्कि उसका हास्यपूर्ण और अप्रत्याशित दृश्य है।

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मोबाइल बॉक्स में  ‘फोन नहीं, खाना निकला’

सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर सबसे मजेदार बात यही रही कि मोबाइल बॉक्स देखकर लोगों को ‘फोन’ की उम्मीद होती है, लेकिन उसमें टिफिन देखकर पूरा संदर्भ बदल जाता है।

यही वजह है कि ‘रियल अनबॉक्सिंग’ जैसे शब्द इस घटना से जुड़ गए। लोगों ने मोबाइल फोन की दुनिया में इस्तेमाल होने वाली भाषा को रोजमर्रा के खाने के डिब्बे से जोड़ दिया और एक साधारण तस्वीर को मजेदार सोशल मीडिया कंटेंट में बदल दिया।

निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश के एक व्यक्ति द्वारा मोबाइल फोन के बॉक्स को टिफिन के रूप में इस्तेमाल करने का मामला इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, इस अनोखे इस्तेमाल ने इंटरनेट यूजर्स को खूब हंसाया और लोगों ने इसे मजाकिया अंदाज में ‘रियल अनबॉक्सिंग’ का नाम दिया।

इस घटना में न कोई बड़ी तकनीकी उपलब्धि है और न कोई जटिल कहानी। इसकी लोकप्रियता का कारण इसकी सादगी, हास्य और देसी जुगाड़ है। एक ऐसा मोबाइल बॉक्स, जो आमतौर पर फोन की पैकेजिंग का हिस्सा होता है, किसी के लिए भोजन रखने का साधन बन गया।

सोशल मीडिया की यही खासियत है कि वह रोजमर्रा की छोटी-सी घटना को भी व्यापक चर्चा में ला सकता है। उत्तर प्रदेश के इस शख्स का अनोखा टिफिन भी इसका एक मजेदार उदाहरण बन गया है—जहां ‘अनबॉक्सिंग’ में फोन नहीं, बल्कि खाना निकला।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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