कोलकाता की तंग गलियों में पली-बढ़ी एक लड़की, जिसके पिता की मौत ने परिवार को कंगाल कर दिया। जो दूध बेचकर, ट्यूशन पढ़ाकर खुद पढ़ी। Mamata Banerjee Biography जिसने अकेले दम पर 34 साल पुरानी वामपंथी सत्ता को उखाड़ फेंका। यही है ममता बनर्जी की कहानी — बंगाल की “दीदी” की कहानी।
ममता बनर्जी आज न सिर्फ पश्चिम बंगाल की सबसे ताकतवर नेता हैं, बल्कि भारतीय राजनीति में वे उन चुनिंदा महिला नेताओं में हैं जो अपनी शर्तों पर, अपनी ज़मीन पर खड़ी हैं। सफ़ेद सूती साड़ी, हवाई चप्पल और एक कपड़े का थैला — यही उनकी पहचान है। कोई बंगला नहीं, कोई गाड़ी नहीं, कोई दिखावा नहीं।
Mamata Banerjee Biography
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| पूरा नाम | ममता बनर्जी |
| जन्म तिथि | 5 जनवरी 1955 |
| जन्म स्थान | कोलकाता, पश्चिम बंगाल |
| आयु (2026 में) | 71 वर्ष |
| पार्टी | अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) |
| वर्तमान पद | मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल (2011 से अब तक) |
| विधानसभा क्षेत्र | भवानीपुर, कोलकाता |
| लोकसभा कार्यकाल | 1984, 1991, 1996, 1998, 1999, 2004, 2009 |
| विधायक कार्यकाल | 2011, 2016, 2021 |
| वैवाहिक स्थिति | अविवाहित |
| कुल संपत्ति (2026 Affidavit) | ₹15.37 लाख (नकद: ₹75,700) |
| धर्म | हिंदू |
प्रारंभिक जीवन और परिवार
ममता बनर्जी का जन्म 5 जनवरी 1955 को कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) के कालीघाट इलाके में एक निम्न-मध्यम वर्गीय बंगाली ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनके पिता प्रोमिलेश्वर बनर्जी एक स्वतंत्रता सेनानी थे, और माता गायत्री देवी थीं।
जब ममता मात्र 17 साल की थीं, तब उनके पिता का निधन हो गया। घर में अचानक आर्थिक संकट आ गया। बड़ी बेटी होने के नाते ममता ने माँ के साथ कंधे से कंधा मिलाकर घर संभाला। वे दूध बेचती थीं, पड़ोस के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती थीं, और स्टेनोग्राफी का काम भी किया — बस इसलिए कि पढ़ाई बंद न हो और घर चलता रहे।
यही वो संघर्ष था जिसने उनके अंदर गरीब और वंचित लोगों के लिए वो आग जलाई जो आज भी बुझी नहीं है। “माँ, माटी, मानुष” सिर्फ एक नारा नहीं — यह उनकी खुद की जिंदगी है।

शिक्षा: ममता बनर्जी
आर्थिक तंगी के बावजूद ममता बनर्जी ने कभी पढ़ाई नहीं छोड़ी। उन्होंने एक के बाद एक डिग्री हासिल कीं:-
- 1970 — देशबंधु शिशु शिक्षालय से Higher Secondary
- इतिहास में ऑनर्स (B.A.) — जोगमाया देवी कॉलेज, कोलकाता
- इस्लामिक इतिहास में M.A. — कलकत्ता विश्वविद्यालय
- B.Ed. — श्री शिक्षायतन कॉलेज
- LLB (वकालत) — जोगेश चंद्र चौधरी लॉ कॉलेज, कोलकाता
वकालत की डिग्री ने उन्हें वो मुकाम दिलाया जो शायद ही किसी मुख्यमंत्री को मिला हो — ममता बनर्जी भारत की पहली ऐसी मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने पद पर रहते हुए सर्वोच्च न्यायालय में वकील के रूप में बहस की।
राजनीतिक सफर की शुरुआत — छात्रा से सांसद तक
ममता बनर्जी की राजनीति की शुरुआत उस दौर में हुई जब पश्चिम बंगाल पर वामपंथी (CPM) का एकछत्र राज था। कॉलेज के दिनों में ही वे कांग्रेस (आई) की छात्र इकाई “छात्र परिषद” से जुड़ गईं।
कुछ महत्वपूर्ण पड़ाव:
1975 — इंदिरा गांधी के समर्थन के बावजूद ममता ने जयप्रकाश नारायण के काफिले को रोककर अपनी बेबाक राजनीति का परिचय दिया। यह उनके साहस का पहला बड़ा सार्वजनिक प्रदर्शन था।
1976-1980 — पश्चिम बंगाल महिला कांग्रेस की महासचिव बनीं।
1984 — पहली बड़ी जीत: जादवपुर लोकसभा सीट से CPM के दिग्गज नेता बैरिस्टर सोमनाथ चटर्जी को हराकर मात्र 29 साल की उम्र में संसद पहुंचीं। तब वे देश की सबसे युवा सांसदों में थीं। वामपंथ का यह गढ़ एक युवा महिला ने ध्वस्त कर दिया था — पूरे बंगाल में हलचल मच गई।
1991 — South Kolkata से जीतकर P.V. नरसिम्हा राव सरकार में मानव संसाधन, युवा मामले, खेल और महिला-बाल विकास की राज्य मंत्री बनीं।
1996, 1998, 1999, 2004, 2009 — South Kolkata से लगातार जीतती रहीं। कुल 7 बार लोकसभा सांसद रहीं।
1999 — NDA सरकार में भारत की पहली महिला रेल मंत्री बनीं। बाद में कोयला मंत्री भी रहीं
TMC की स्थापना — जब दीदी ने अपनी राह खुद बनाई
कांग्रेस के साथ बढ़ते मतभेदों के बाद 1997 में ममता को पार्टी से निकाल दिया गया। लेकिन इससे टूटने की बजाय उन्होंने एक नई इबारत लिखी।
1 जनवरी 1998 को उन्होंने अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC/TMC) की स्थापना की। पार्टी का नारा बना — “माँ, माटी, मानुष” (माँ, मिट्टी, इंसान)। TMC तुरंत पश्चिम बंगाल में मुख्य विपक्षी दल बन गई।
यह फैसला आसान नहीं था। कांग्रेस जैसी बड़ी पार्टी छोड़कर नई पार्टी शुरू करना एक बड़ा जोखिम था। लेकिन जिसने 17 साल की उम्र में अपने परिवार को संभाल लिया, उसके लिए यह जोखिम कहाँ बड़ा था?

सिंगूर-नंदीग्राम — वो आंदोलन जिसने इतिहास बदला
अगर एक घटना है जिसने ममता बनर्जी को “गरीबों की मसीहा” बनाया, तो वह है सिंगूर-नंदीग्राम आंदोलन।
2006-2007: वाम सरकार ने टाटा नैनो कार फैक्ट्री के लिए सिंगूर के किसानों की उपजाऊ ज़मीन ज़बरदस्ती छीनी। नंदीग्राम में पुलिस फायरिंग में कई किसान मारे गए। पूरे बंगाल में आक्रोश था।
ममता बनर्जी सड़क पर उतर आईं। उन्होंने 25 दिन का भूख हड़ताल किया। किसानों के साथ धरने पर बैठीं। इस आंदोलन ने अंततः टाटा को गुजरात जाने पर मजबूर कर दिया।
यह आंदोलन सिर्फ एक फैक्ट्री के खिलाफ नहीं था — यह 34 साल की तानाशाही के खिलाफ बंगाल की जनता की आवाज़ थी। और ममता उस आवाज़ की मुखिया बन गईं।
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पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्यमंत्री
20 मई 2011 — यह तारीख पश्चिम बंगाल के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है।
TMC ने 2011 विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत हासिल किया — 294 में से 184 से अधिक सीटें। 34 वर्षीय CPM-वाम मोर्चे का शासन समाप्त हुआ। और ममता बनर्जी बनीं पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्यमंत्री।
राजभवन में शपथ लेने के बाद वे पैदल ही राइटर्स बिल्डिंग (राज्य सचिवालय) गईं। उनके पीछे लाखों समर्थकों का हुजूम था। बंगाल बदल रहा था।
तीन बार CM — प्रमुख योजनाएं और उपलब्धियां
ममता बनर्जी ने 2011, 2016 और 2021 — तीन बार लगातार बहुमत हासिल किया। उनके शासन में कई ऐतिहासिक कल्याण योजनाएं शुरू हुईं:

कन्याश्री प्रकल्प — दुनिया ने सराहा
लड़कियों को स्कूल में रोकने और बाल विवाह रोकने के लिए शुरू की गई यह योजना 2017 में 62 देशों की 552 योजनाओं में पहले स्थान पर रही और United Nations Public Service Award जीती। आज तक 93 लाख से अधिक लड़कियां इससे लाभान्वित हो चुकी हैं।
प्रमुख योजनाओं की सूची
| योजना | लाभार्थी | विशेषता |
|---|---|---|
| कन्याश्री प्रकल्प | छात्राएं | UN Award विजेता, बाल विवाह रोकथाम |
| स्वास्थ्य साथी | परिवार | 5 लाख तक मुफ़्त इलाज |
| लक्ष्मी भंडार | महिलाएं | ₹1,000-1,200 मासिक सहायता |
| रूपश्री | गरीब परिवारों की बेटियां | विवाह के लिए ₹25,000 |
| सबुज साथी | छात्र-छात्राएं | मुफ़्त साइकिल |
| युवश्री | बेरोज़गार युवा | आर्थिक सहायता |
2016: TMC ने 211 सीटें जीतीं — बिना किसी सहयोगी के, 1962 के बाद पहली बार ऐसा हुआ।
2021: TMC ने 213 सीटें जीतीं। हालांकि ममता खुद नंदीग्राम से Suvendu Adhikari से 1,956 वोटों से हार गईं, लेकिन उनकी पार्टी जीती और वे फिर CM बनीं।
ममता बनर्जी और 2026 विधानसभा चुनाव (ताज़ा अपडेट — अप्रैल 2026)
पश्चिम बंगाल में एक बार फिर चुनाव का माहौल गर्म है। इस बार दांव और भी बड़ा है — ममता चौथी बार मुख्यमंत्री बनने की कोशिश में हैं।
8 अप्रैल 2026 को ममता बनर्जी ने भवानीपुर विधानसभा सीट से अपना नामांकन दाखिल किया। एक बार फिर BJP नेता और विपक्ष के नेता Suvendu Adhikari से उनका मुकाबला होगा — वही Suvendu जिन्होंने 2021 में नंदीग्राम में उन्हें हराया था।
चुनाव कार्यक्रम:
- पहला चरण: 23 अप्रैल 2026
- दूसरा चरण: 29 अप्रैल 2026
- मतगणना: 4 मई 2026
प्रमुख मुद्दे: TMC ने लक्ष्मी भंडार और ’10 प्रतिज्ञाओं’ को प्रमुखता से उठाया है। 2026 के manifesto में general category महिलाओं को ₹1,500, SC/ST महिलाओं को ₹1,700 और बेरोज़गार युवाओं को ₹1,500 प्रतिमाह देने का वादा है।
BJP ने गैरकानूनी प्रवासियों के मुद्दे और कानून-व्यवस्था को अपना मुख्य चुनावी हथियार बनाया है।
मतदाता सूची विवाद: चुनाव से पहले एक बड़ा विवाद खड़ा हुआ जब Election Commission के Special Intensive Revision (SIR) अभ्यास में करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए। ममता ने इसे “लोकतंत्र की हत्या” करार दिया और Supreme Court का दरवाज़ा खटखटाया।
Opinion Poll (Matrize, अप्रैल 2026): TMC: 140-160 सीटें | BJP: 130-150 सीटें — मुकाबला बेहद करीबी है।
विवाद और आलोचनाएं
एक संतुलित जीवन-परिचय के लिए उन विवादों का ज़िक्र भी ज़रूरी है जो ममता बनर्जी के कार्यकाल से जुड़े रहे हैं:
सारदा चिट फंड घोटाला — TMC के कई नेताओं का नाम इस घोटाले में आया। ममता पर अपने नेताओं को बचाने का आरोप लगा।
नारदा स्टिंग ऑपरेशन — एक स्टिंग में TMC के कई मंत्रियों और सांसदों को रिश्वत लेते दिखाया गया। CBI जांच लंबे समय तक चली।
शिक्षक भर्ती घोटाला — स्कूल शिक्षकों की भर्ती में भ्रष्टाचार के आरोप में कई TMC नेता गिरफ्तार हुए।
संदेशखाली विवाद (2024) — TMC के स्थानीय नेताओं पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगे। विपक्ष ने ममता पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया।
RG Kar Medical College Case (2024) — कोलकाता के इस मेडिकल कॉलेज में एक महिला डॉक्टर के बलात्कार और हत्या ने पूरे देश को हिला दिया। पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठे।
I-PAC ED Raid (जनवरी 2026) — Enforcement Directorate ने TMC से जुड़ी consultancy I-PAC के दफ्तरों पर छापे मारे। ममता के दफ्तर पहुंचने पर ED ने कागज़ात हटाने का आरोप लगाया।
कवयित्री, चित्रकार, लेखिका — राजनीति के बाहर ममता
जो लोग ममता बनर्जी को सिर्फ एक लड़ाकू राजनेता के रूप में जानते हैं, वे उनके व्यक्तित्व का एक बड़ा हिस्सा मिस करते हैं।
ममता बनर्जी एक स्व-प्रशिक्षित चित्रकार हैं। उनकी paintings कई बार नीलाम हो चुकी हैं। वे कवयित्री भी हैं — उनकी पुस्तक ‘कबिता बितान’ में 946 कविताएं हैं, जिसके लिए उन्हें 2022 में पश्चिमबंगा अकादमी पुरस्कार मिला। इसके अलावा वे कई किताबें लिख चुकी हैं — बंगाली और अंग्रेज़ी दोनों में।
वे अपने पुश्तैनी घर में ही रहती हैं। कोई बड़ी कोठी नहीं, कोई ब्रांडेड कपड़े नहीं। 2026 के चुनावी हलफनामे में उन्होंने घोषित किया कि उनके नाम पर न कोई ज़मीन है, न कोई गाड़ी। बैंक में ₹12.7 लाख और हाथ में ₹75,700 — बस यही उनकी “दौलत” है।
पुरस्कार और सम्मान
- United Nations Public Service Award (2017) — कन्याश्री प्रकल्प के लिए; 62 देशों की 552 योजनाओं में प्रथम
- Bloomberg 50 Most Influential (2012) — वित्त जगत के 50 सर्वाधिक प्रभावशाली लोगों में
- Skoch Chief Minister of the Year Award (2018)
- पश्चिमबंगा अकादमी पुरस्कार (2022) — ‘कबिता बितान’ के लिए
- Honorary D.Litt — कलकत्ता विश्वविद्यालय (2018) और St. Xavier’s University (2023)
- Honorary Doctorate — KIIT University, भुवनेश्वर
- UN FAO Recognition (2026) — ‘मातिर सृष्टि’ कार्यक्रम के लिए
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
ममता बनर्जी की उम्र कितनी है?
ममता बनर्जी का जन्म 5 जनवरी 1955 को हुआ था। अप्रैल 2026 में वे 71 वर्ष की हैं।
क्या ममता बनर्जी विवाहित हैं?
नहीं। ममता बनर्जी अविवाहित हैं और अपनी माँ के साथ कोलकाता के कालीघाट में अपने पुश्तैनी घर में रहती हैं।
ममता बनर्जी की कुल संपत्ति (Net Worth) कितनी है?
2026 के चुनावी हलफनामे के अनुसार उनकी कुल संपत्ति ₹15.37 लाख है — जिसमें बैंक में ₹12.7 लाख और नकद ₹75,700 है। उनके नाम पर कोई अचल संपत्ति या वाहन नहीं है।
TMC (तृणमूल कांग्रेस) की स्थापना कब हुई?
1 जनवरी 1998 को ममता बनर्जी ने अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC/TMC) की स्थापना की, कांग्रेस से अलग होने के बाद।
ममता बनर्जी पहली बार मुख्यमंत्री कब बनीं?
20 मई 2011 को — जब TMC ने 34 साल पुराने वाम मोर्चा शासन को हराया। वे पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्यमंत्री हैं।
ममता बनर्जी की शिक्षा क्या है?
उन्होंने इतिहास में B.A. ऑनर्स, इस्लामिक इतिहास में M.A., B.Ed. और LLB की डिग्रियां हासिल की हैं।
ममता बनर्जी को “दीदी” क्यों कहते हैं?
“दीदी” बंगाली में “बड़ी बहन” को कहते हैं। ममता अपने समर्थकों के बीच एक बड़ी बहन जैसी हैं — जो उनके साथ हर मुश्किल में खड़ी रहती हैं। वे खुद भी यही कहती हैं।
2026 में ममता बनर्जी कहाँ से चुनाव लड़ रही हैं?
2026 विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी भवानीपुर सीट से चुनाव लड़ रही हैं, जहाँ उनका मुकाबला BJP के Suvendu Adhikari से है। मतदान 23 और 29 अप्रैल 2026 को है।
कन्याश्री योजना क्या है?
कन्याश्री प्रकल्प ममता बनर्जी सरकार की लड़कियों के लिए सशर्त नकद सहायता योजना है, जिसका उद्देश्य बाल विवाह रोकना और लड़कियों को शिक्षित करना है। इसे 2017 में UN Public Service Award मिला और अब तक 93 लाख से अधिक लड़कियां लाभान्वित हो चुकी हैं।
यह लेख अप्रैल 2026 की नवीनतम जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। चुनाव परिणाम आने पर इसे अपडेट किया जाएगा।

