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भिवंडी में चार मंजिला इमारत ढही, 9 लोगों की मौत; कई लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका, राहत-बचाव अभियान जारी

महाराष्ट्र के ठाणे जिले के भिवंडी शहर में शुक्रवार तड़के एक दर्दनाक हादसे में चार मंजिला आवासीय इमारत ढह गई। इस हादसे में कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका है। दुर्घटना के बाद राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), दमकल विभाग, पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने संयुक्त रूप से बड़े स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। अधिकारियों का कहना है कि मलबा हटाने का कार्य लगातार जारी है और मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

भिवंडी में देर रात अचानक भरभराकर गिरी इमारतभिवंडी

जानकारी के अनुसार, भिवंडी के एक घनी आबादी वाले इलाके में स्थित ग्राउंड प्लस चार मंजिला आवासीय इमारत देर रात अचानक भरभराकर गिर गई। स्थानीय लोगों ने तेज आवाज सुनते ही पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी। देखते ही देखते पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर जमा हो गए।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अधिकांश लोग उस समय अपने घरों में सो रहे थे। अचानक इमारत का एक बड़ा हिस्सा ढह गया और कई परिवार मलबे के नीचे दब गए। आसपास रहने वाले लोगों ने शुरुआती दौर में अपने स्तर पर बचाव कार्य शुरू किया और कई लोगों को बाहर निकालने की कोशिश की।

भिवंडी हादसे में नौ लोगों की मौत की पुष्टि 

प्रशासन ने पुष्टि की है कि अब तक नौ लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि तीन से अधिक लोग घायल हुए हैं। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। अधिकारियों के अनुसार राहत अभियान समाप्त होने के बाद ही मृतकों और प्रभावित लोगों की वास्तविक संख्या स्पष्ट हो सकेगी।

कई लोगों के फंसे होने की आशंका

बचाव एजेंसियों का अनुमान है कि अभी भी कुछ लोग मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं। इसी आशंका को देखते हुए एनडीआरएफ, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल, दमकल विभाग और पुलिस की टीमें आधुनिक उपकरणों की सहायता से खोज अभियान चला रही हैं।

राहतकर्मी भारी मशीनों के साथ-साथ अत्यधिक सावधानी बरतते हुए मलबा हटा रहे हैं ताकि यदि कोई व्यक्ति जीवित हो तो उसे सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। बचाव अभियान के दौरान स्थानीय नागरिक भी प्रशासन की सहायता करते दिखाई दिए।

भिवंडी घटनास्थल पर एनडीआरएफ और कई एजेंसियां मौके पर

घटना की सूचना मिलते ही राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की विशेष टीम घटनास्थल पर पहुंच गई। इसके अलावा दमकल विभाग, ठाणे जिला प्रशासन, पुलिस, चिकित्सा दल और नगर निगम के कर्मचारी भी राहत कार्य में जुट गए।

राहत एजेंसियों ने आसपास के क्षेत्र को पूरी तरह घेर लिया ताकि बचाव कार्य बिना किसी बाधा के जारी रह सके। एंबुलेंसों को भी मौके पर तैनात किया गया है ताकि घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया जा सके।

जर्जर इमारत होने की आशंका

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार संबंधित इमारत काफी पुरानी थी। कुछ स्थानीय रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि भवन की स्थिति लंबे समय से कमजोर बताई जा रही थी। हालांकि प्रशासन ने कहा है कि हादसे के वास्तविक कारणों की पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही की जाएगी।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इमारत का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराया गया था या नहीं, तथा क्या भवन को पहले कभी खतरनाक घोषित किया गया था।

मानसून में बढ़ जाती हैं ऐसी घटनाएं

महाराष्ट्र में हर वर्ष मानसून के दौरान पुरानी और जर्जर इमारतों के गिरने की घटनाएं सामने आती हैं। लगातार बारिश से भवनों की संरचना कमजोर हो जाती है और कई बार अचानक हादसे हो जाते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर संरचनात्मक निरीक्षण, मरम्मत और खतरनाक इमारतों को खाली कराने की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके।

स्थानीय लोगों में दहशत

हादसे के बाद पूरे इलाके में भय और शोक का माहौल है। जिन परिवारों के सदस्य अभी भी लापता हैं, वे राहत कार्य स्थल के आसपास चिंतित होकर इंतजार कर रहे हैं। कई लोगों ने प्रशासन से राहत कार्य तेज करने की अपील की।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि समय रहते जर्जर भवनों पर कार्रवाई की जाए तो अनेक लोगों की जान बचाई जा सकती है।

प्रशासन ने जांच के दिए आदेश

महाराष्ट्र सरकार और स्थानीय प्रशासन ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों ने कहा कि हादसे के लिए यदि किसी प्रकार की लापरवाही जिम्मेदार पाई जाती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

साथ ही जिले की अन्य पुरानी और जोखिमपूर्ण इमारतों का भी निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि संभावित खतरे को समय रहते टाला जा सके।

राहत कार्य सबसे बड़ी प्राथमिकता

प्रशासन का कहना है कि फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। बचाव अभियान चौबीसों घंटे जारी रहेगा और तब तक नहीं रोका जाएगा जब तक यह सुनिश्चित न हो जाए कि सभी लोगों का पता लगा लिया गया है।

चिकित्सा दल भी मौके पर मौजूद हैं और घायलों को तत्काल प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।

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विशेषज्ञों ने जताई चिंता

शहरी नियोजन और भवन सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि महानगरों और तेजी से विकसित हो रहे शहरों में पुरानी इमारतों की नियमित जांच अत्यंत आवश्यक है। समय पर मरम्मत, पुनर्विकास और भवन सुरक्षा मानकों का पालन नहीं होने पर ऐसी दुर्घटनाएं बार-बार सामने आ सकती हैं।

उनका मानना है कि स्थानीय निकायों को भवनों के संरचनात्मक ऑडिट की प्रक्रिया को और अधिक सख्ती से लागू करना चाहिए तथा खतरनाक घोषित इमारतों को खाली कराने के लिए प्रभावी नीति अपनानी चाहिए।

निष्कर्ष

भिवंडी में चार मंजिला आवासीय इमारत का ढहना एक बड़ी मानवीय त्रासदी बनकर सामने आया है। नौ लोगों की मौत और कई लोगों के अब भी मलबे में फंसे होने की आशंका ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। एनडीआरएफ, दमकल विभाग और स्थानीय प्रशासन लगातार राहत एवं बचाव अभियान चला रहे हैं।

वहीं इस हादसे ने एक बार फिर जर्जर इमारतों की सुरक्षा, नियमित संरचनात्मक निरीक्षण और समय पर प्रशासनिक कार्रवाई की आवश्यकता को उजागर कर दिया है। जांच पूरी होने के बाद हादसे के वास्तविक कारण सामने आएंगे, लेकिन फिलहाल पूरे राज्य की नजर राहत अभियान और प्रभावित परिवारों की सुरक्षा पर टिकी हुई है।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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