अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। खड़गे ने सवाल उठाया कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट दर्ज की जा रही है, तब आम जनता को राहत क्यों नहीं मिल रही। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार तेल कंपनियों और टैक्स वसूली के जरिए जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ा रही है।
पेट्रोल-डीजल कीमतों पर कांग्रेस का बड़ा हमला
कांग्रेस ने हाल के दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई कई बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार को घेरा है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि लगातार ईंधन मूल्य वृद्धि से आम आदमी की जेब पर भारी असर पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि सरकार चुनाव खत्म होने के बाद धीरे-धीरे तेल की कीमतें बढ़ाकर जनता से वसूली कर रही है।
खड़गे ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि देश की जनता महंगाई से पहले ही परेशान है और ऐसे समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि आर्थिक संकट को और गंभीर बना रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल सस्ता होने के बावजूद भारत में तेल महंगा बेचना सरकार की नीतिगत विफलता को दर्शाता है।
कच्चे तेल की कीमत में गिरावट के बावजूद राहत नहीं
अंतरराष्ट्रीय बाजार में बीते कुछ हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखी गई है। इसके बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती नहीं की गई। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी और टैक्स के जरिए भारी राजस्व जुटा रही है जबकि उपभोक्ताओं को राहत देने की कोई कोशिश नहीं हो रही।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में जब क्रूड ऑयल सस्ता होता है तो उसका फायदा उपभोक्ताओं तक पहुंचना चाहिए। लेकिन विपक्ष का कहना है कि सरकार इस अवसर का उपयोग टैक्स बढ़ाने और राजस्व संग्रह के लिए कर रही है। इससे परिवहन लागत और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी वृद्धि होती है।
ईंधन मूल्य वृद्धि से बढ़ रही महंगाई
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। ईंधन महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ती है, जिसका असर सब्जियों, अनाज, दूध और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार की ईंधन नीति सीधे तौर पर महंगाई को बढ़ावा दे रही है।
खड़गे ने कहा कि लगातार बढ़ती कीमतों से मध्यम वर्ग और गरीब परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि घरेलू बजट बिगड़ रहा है और लोगों की बचत पर असर पड़ रहा है। पेट्रोल-डीजल महंगा होने से छोटे व्यापारियों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
राहुल गांधी ने भी साधा निशाना
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को “महंगाई मैन” बताते हुए कहा कि सरकार जनता को राहत देने में पूरी तरह विफल रही है।
राहुल गांधी ने कहा कि सरकार आम लोगों से टैक्स के जरिए पैसा वसूल रही है जबकि तेल कंपनियों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव खत्म होने के बाद सरकार ने धीरे-धीरे ईंधन कीमतें बढ़ाने की रणनीति अपनाई है।
भाजपा का पलटवार और राजनीतिक बयानबाजी
ईंधन कीमतों को लेकर बढ़ती राजनीतिक बयानबाजी के बीच भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और भू-राजनीतिक तनावों के कारण तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।
भाजपा प्रवक्ताओं ने कांग्रेस पर “टूलकिट राजनीति” करने का आरोप लगाया और कहा कि विपक्ष केवल जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहा है। हालांकि विपक्ष लगातार यह सवाल उठा रहा है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम हैं तो देश में पेट्रोल और डीजल सस्ते क्यों नहीं हो रहे।
भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें क्यों अहम मुद्दा हैं
भारत जैसे विकासशील देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें सीधे आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करती हैं। परिवहन, कृषि, उद्योग और रोजमर्रा की जरूरतों पर ईंधन लागत का बड़ा असर पड़ता है। जब ईंधन महंगा होता है तो महंगाई दर बढ़ती है और उपभोक्ता खर्च पर दबाव बनता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए टैक्स पेट्रोल-डीजल की कीमतों का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद उपभोक्ताओं को हमेशा राहत नहीं मिलती।
विपक्ष की मांग: जनता को तुरंत राहत मिले
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार से पेट्रोल-डीजल पर टैक्स कम करने और जनता को राहत देने की मांग की है। मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सरकार को जनता की परेशानियों को समझना चाहिए और ईंधन कीमतों में तत्काल कटौती करनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार यदि वास्तव में महंगाई कम करना चाहती है तो पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार करना चाहिए। इससे ईंधन कीमतों में पारदर्शिता आएगी और आम लोगों को सीधा फायदा मिलेगा।
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निष्कर्ष: पेट्रोल-डीजल कीमतें बनीं बड़ा राजनीतिक मुद्दा
देश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतें अब बड़ा राजनीतिक और आर्थिक मुद्दा बन चुकी हैं। एक ओर विपक्ष मोदी सरकार पर जनता से “ईंधन वसूली” का आरोप लगा रहा है, वहीं सरकार वैश्विक परिस्थितियों का हवाला दे रही है। लेकिन आम जनता के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब कच्चा तेल सस्ता हो रहा है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत कब मिलेगी।

