झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। राजधानी रांची में चल रहा यह विरोध प्रदर्शन अब 13वें दिन में प्रवेश कर चुका है। आंदोलन का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि छह छात्र आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं, जिनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।
इसी बीच राज्य विधानसभा का सत्र शुरू होने वाला है और माना जा रहा है कि यह मुद्दा सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह जोरदार तरीके से उठेगा। विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है, जबकि छात्र संगठनों ने विधानसभा के दौरान अपने आंदोलन को और व्यापक बनाने का ऐलान किया है।
झारखंड भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं का आरोप
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। उनका कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही और योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हुआ।
छात्रों की प्रमुख मांगों में विवादित परीक्षाओं को रद्द करना, पूरे मामले की सीबीआई जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तथा भविष्य की भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाना शामिल है।
छह छात्र आमरण अनशन पर
आंदोलन के दौरान छह छात्र पिछले कई दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं। चिकित्सकों की टीम समय-समय पर उनकी स्वास्थ्य जांच कर रही है।
डॉक्टरों के अनुसार लंबे समय तक भोजन न लेने के कारण अनशन पर बैठे छात्रों में कमजोरी, रक्तचाप में गिरावट और डिहाइड्रेशन जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। हालांकि छात्र नेताओं का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक अनशन जारी रहेगा।
झारखंड विधानसभा सत्र में गरमाएगा मुद्दा
झारखंड विधानसभा का सत्र शुरू होने के साथ ही यह आंदोलन राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण हो गया है। विपक्षी दलों ने संकेत दिया है कि वे भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और सरकार की भूमिका पर सदन में जवाब मांगेंगे।
उधर छात्र संगठनों ने विधानसभा के दौरान बड़े पैमाने पर प्रदर्शन, तिरंगा मार्च और विधानसभा घेराव की रणनीति बनाई है। प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का बयान
बढ़ते दबाव के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि सरकार छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से ले रही है और मामले में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि सरकार जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने छात्रों से संवाद बनाए रखने और शांतिपूर्ण समाधान की अपील भी की।
सीआईडी जांच पहले से जारी
राज्य सरकार पहले ही कथित परीक्षा अनियमितताओं की जांच सीआईडी को सौंप चुकी है। हालांकि प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि राज्य एजेंसी की जांच पर्याप्त नहीं है और पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी, विशेष रूप से सीबीआई, से कराई जानी चाहिए।
उनका तर्क है कि इससे निष्पक्ष जांच सुनिश्चित होगी और भर्ती प्रक्रिया में जनता का भरोसा दोबारा स्थापित किया जा सकेगा।
आंदोलन को मिला राष्ट्रीय समर्थन
झारखंड का यह आंदोलन अब राज्य की सीमाओं से बाहर भी चर्चा का विषय बन गया है। विभिन्न छात्र संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कई सार्वजनिक हस्तियों ने आंदोलन का समर्थन किया है।
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो आंदोलन का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे हैं। उनके आमरण अनशन को लेकर देशभर में चर्चा हुई और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी उनका समर्थन किया।
छात्रों का कहना – भविष्य दांव पर
प्रदर्शन में शामिल अभ्यर्थियों का कहना है कि वर्षों की मेहनत के बाद यदि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता नहीं रहेगी तो युवाओं का सरकारी व्यवस्था पर विश्वास खत्म हो जाएगा।
कई छात्रों ने बताया कि उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में कई वर्ष लगाए हैं। ऐसे में यदि परीक्षा प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं होती तो यह केवल नौकरी का नहीं बल्कि पूरे भविष्य का प्रश्न बन जाता है।
प्रशासन अलर्ट पर
आंदोलन के विस्तार को देखते हुए रांची सहित कई जिलों में प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। विधानसभा सत्र के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जा सकता है।
सुरक्षा एजेंसियां प्रदर्शन स्थलों और विधानसभा परिसर के आसपास विशेष निगरानी रख रही हैं ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो।
राजनीतिक माहौल भी गरमाया
आंदोलन को लेकर राजनीतिक दलों के बीच भी आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। विपक्ष का कहना है कि राज्य सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है, जबकि सरकार का दावा है कि वह मामले की निष्पक्ष जांच करा रही है और जल्द समाधान निकाला जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा सत्र में यह मुद्दा सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
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संवाद की संभावना
ताजा घटनाक्रम में प्रदर्शनकारी छात्रों के एक पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल और मुख्यमंत्री के बीच बैठक की संभावना भी बनी है। छात्र नेताओं ने सिद्धांततः बातचीत के लिए सहमति जताई है, लेकिन उनका कहना है कि बातचीत तभी सार्थक होगी जब सरकार ठोस निर्णय लेने को तैयार होगी।
निष्कर्ष
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा छात्र आंदोलन अब निर्णायक चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है। 13 दिनों से जारी धरने और छह छात्रों के आमरण अनशन ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। विधानसभा सत्र के दौरान इस मुद्दे के और अधिक गरमाने की संभावना है। एक ओर छात्र पारदर्शी भर्ती प्रणाली और सीबीआई जांच की मांग पर अड़े हैं, तो दूसरी ओर सरकार जांच और संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की बात कह रही है।
आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि यह आंदोलन बातचीत के जरिए समाप्त होता है या राज्य की राजनीति और प्रशासन के लिए और बड़ी चुनौती बनकर सामने आता है।

