अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच तेहरान ने एक बार फिर कड़ा संदेश दिया है। ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार मेजर जनरल याह्या रहीम सफवी ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका या इजरायल की ओर से दोबारा हमला किया जाता है तो मौजूदा युद्ध का दायरा हिंद महासागर और उससे आगे तक फैल सकता है। सफवी ने कहा कि संघर्ष पहले ही फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य से लाल सागर तक पहुंच चुका है और आगे इसकी भौगोलिक सीमा बढ़ सकती है।
ईरान की यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव के साथ-साथ कूटनीतिक गतिविधियां भी जारी हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान अमेरिका और ईरान से जुड़े शीर्ष अधिकारियों के बीच बातचीत की कोशिशें भी हुई हैं, लेकिन सैन्य टकराव की आशंका अभी बनी हुई है।
ईरान ने क्या कहा?
ईरानी सैन्य सलाहकार याह्या रहीम सफवी ने ईरान की सरकारी मीडिया से जुड़े फॉर्स न्यूज एजेंसी द्वारा जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि अगर अमेरिका या इजरायल ने दोबारा हमला किया तो युद्ध का मोर्चा और फैल सकता है।
उनके मुताबिक, संघर्ष फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से लाल सागर तक पहुंच चुका है। ऐसे में आगे की सैन्य कार्रवाई की स्थिति में इसका विस्तार हिंद महासागर और संभवतः उससे भी आगे हो सकता है। यह बयान ईरान की ओर से हिंद महासागर का सीधे उल्लेख किए जाने के कारण खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सफवी ने यह भी कहा कि ईरानी सशस्त्र बलों ने संभावित नए अमेरिकी-इजरायली हमलों के लिए योजनाएं तैयार की हैं और सेना सबसे खराब स्थिति के लिए भी तैयार है।
होर्मुज से लाल सागर तक क्यों बढ़ा तनाव?
पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्ष में समुद्री मार्ग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है। इसके जरिए वैश्विक तेल और गैस व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
दूसरी ओर, लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच समुद्री व्यापार के लिए अहम हैं। हाल के संघर्ष में यमन के हूती लड़ाकों की गतिविधियों और लाल सागर के तटीय इलाकों में बदलते सैन्य समीकरणों ने समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है।
ईरान लंबे समय से हूती समूह को राजनीतिक और सैन्य समर्थन देने की बात से जुड़ा रहा है, हालांकि तेहरान यमन के युद्ध में प्रत्यक्ष भागीदारी से इनकार करता है।
हिंद महासागर का जिक्र क्यों महत्वपूर्ण है?
ईरान की नई चेतावनी में हिंद महासागर का उल्लेख इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है।
हिंद महासागर में अमेरिका और ब्रिटेन का डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डा भी स्थित है। यह रणनीतिक स्थान पश्चिम एशिया, दक्षिण एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ईरानी अधिकारियों की ओर से पहले भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों और जहाजों को निशाना बनाने की चेतावनी दी गई है, लेकिन ताजा बयान में पहली बार शीर्ष नेता के सलाहकार ने सीधे हिंद महासागर तक संघर्ष फैलने की संभावना का उल्लेख किया है।
भारत के लिए क्यों बढ़ सकती है चिंता?
हिंद महासागर में तनाव बढ़ने का असर भारत पर भी पड़ सकता है। भारत पश्चिम एशिया से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और अन्य ऊर्जा संसाधन आयात करता है। इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र भारत के समुद्री व्यापार और भारतीय प्रवासी समुदाय के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, हिंद महासागर तक संघर्ष फैलने की स्थिति भारत के ऊर्जा आयात और पश्चिम एशिया से जुड़े समुद्री व्यापार मार्गों पर दबाव बढ़ा सकती है।
हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान वास्तव में संघर्ष को हिंद महासागर तक ले जाने की कार्रवाई करेगा या यह चेतावनी संभावित अमेरिकी-इजरायली हमले को रोकने के लिए रणनीतिक संदेश के रूप में दी गई है।
अमेरिका-ईरान के बीच कूटनीतिक कोशिशें भी जारी
सैन्य बयानबाजी के बीच अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की कोशिशें भी चल रही हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान दोनों देशों के अधिकारियों के बीच संपर्क हुआ है। ईरान ने युद्ध समाप्त करने के लिए अपनी कुछ शर्तें भी रखी हैं, जिनमें प्रतिबंधों में राहत और विदेशों में जमी उसकी संपत्तियों से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिका की धमकियों को खारिज करते हुए कहा कि ईरानी जनता दबाव के आगे नहीं झुकेगी, जबकि उन्होंने कूटनीति के जरिए समाधान की संभावना भी खुली रखी है।
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अब आगे क्या?
ईरान की ताजा चेतावनी ने पश्चिम एशिया के संघर्ष के संभावित विस्तार को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। अगर अमेरिका या इजरायल की ओर से नया बड़ा सैन्य हमला होता है और ईरान जवाब में समुद्री क्षेत्र में कार्रवाई का दायरा बढ़ाता है, तो इसका असर होर्मुज, लाल सागर, बाब-अल-मंदेब और हिंद महासागर के समुद्री मार्गों पर पड़ सकता है।
फिलहाल स्थिति तेजी से बदल रही है। इसलिए आने वाले दिनों में सैन्य गतिविधियों के साथ-साथ अमेरिका-ईरान के बीच होने वाली कूटनीतिक बातचीत और क्षेत्रीय देशों की भूमिका पर भी दुनिया की नजर रहेगी।

