उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड ने एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से की गई अपील तथा अंकिता के माता-पिता के विरोध प्रदर्शन ने दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल के रूप में नियुक्ति को राजनीतिक और सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला दिया है। अंकिता का परिवार मांग कर रहा है कि मामले में कथित वीआईपी कनेक्शन की सीबीआई जांच पूरी होने तक इस नियुक्ति पर रोक लगाई जाए।
राहुल गांधी ने राष्ट्रपति से क्या अपील की?
राहुल गांधी ने 15 अक्टूबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति पर पुनर्विचार करने और सीबीआई जांच पूरी होने तक उन्हें पदभार ग्रहण न करने देने का आग्रह किया। राहुल गांधी का कहना है कि अंकिता के परिवार को अब तक न्याय मिलने की पूरी उम्मीद नहीं मिली है और मामले में कथित वीआईपी की पहचान से जुड़े सवाल अभी भी बने हुए हैं।
उन्होंने इस नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रखना बेहद जरूरी है। राहुल गांधी ने अंकिता के माता-पिता के प्रति समर्थन जताते हुए केंद्र सरकार से उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।
हालांकि, गौतम के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी अदालत में सिद्ध नहीं हुए हैं। उन्होंने इन आरोपों को खारिज किया है और आरोप लगाने वालों के खिलाफ मानहानि की कार्यवाही भी शुरू की है।
इंडिया गेट पर माता-पिता का प्रदर्शन
अंकिता के माता-पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी और सोनी देवी ने दिल्ली के इंडिया गेट के पास विरोध प्रदर्शन कर अपनी बेटी के लिए न्याय की मांग की। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर परिवार से मुलाकात की और उनके प्रति समर्थन व्यक्त किया।
परिवार की मांग है कि सीबीआई कथित वीआईपी कनेक्शन की जांच पूरी करे और मामले से जुड़े सभी सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आए। अंकिता के पिता ने राष्ट्रपति से दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर रोक लगाने की अपील की है।
15 अक्टूबर की सुबह दिल्ली पुलिस ने इंडिया गेट के पास प्रदर्शन कर रहे अंकिता के माता-पिता और कुछ कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया। बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। इस कार्रवाई के बाद विरोध और तेज हो गया। अंकिता के पिता ने 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं होने पर देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
क्या है अंकिता भंडारी हत्याकांड?
19 वर्षीय अंकिता भंडारी ऋषिकेश के पास वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। सितंबर 2022 में उनकी हत्या कर दी गई थी। उनका शव 24 सितंबर को चिल्ला नहर से बरामद हुआ था।
इस मामले में रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो सहयोगियों, सौरभ भास्कर तथा अंकित गुप्ता, को अदालत ने 30 मई 2025 को हत्या और अन्य अपराधों के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
मामले ने उस समय व्यापक जनाक्रोश पैदा किया था। बाद में एक कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे। अंकिता के परिवार और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस पहलू की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इसी मांग के चलते मामला एक बार फिर सुर्खियों में है।
दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर विवाद क्यों?
दुष्यंत कुमार गौतम भाजपा के वरिष्ठ नेता और पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री रह चुके हैं। उत्तराखंड में भी वे पार्टी की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उन्हें सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद अंकिता के परिवार ने इस फैसले पर आपत्ति जताई।
परिवार का तर्क है कि जब मामले के कुछ अहम सवालों की जांच जारी है, तब नियुक्ति से संबंधित चिंताओं को दूर करना आवश्यक है। कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा है और जांच पूरी होने तक नियुक्ति रोकने की मांग की है।
दूसरी ओर, किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप लगना और अदालत में उसका दोष सिद्ध होना अलग-अलग बातें हैं। इसलिए मामले में निष्पक्ष जांच, कानूनी प्रक्रिया और सभी पक्षों के अधिकारों का सम्मान महत्वपूर्ण है।
आगे और समाचार पढ़े:
- PM Modi to Visit Canada on December 11–12: Here’s What’s on the Agenda as New Delhi and Ottawa Bolster Ties
- पेट्रोल पर निर्यात शुल्क बढ़ा, डीजल पर घटा: जानिए क्या होगा असर
आगे क्या होगा?
अंकिता भंडारी का मामला अब केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं रह गया है। राहुल गांधी की राष्ट्रपति से अपील, माता-पिता का विरोध और देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर फिर चर्चा में ला दिया है।
अब निगाहें केंद्र सरकार, राष्ट्रपति कार्यालय और सीबीआई की जांच पर हैं। परिवार चाहता है कि कथित वीआईपी कनेक्शन की सच्चाई सामने आए और उसकी आशंकाओं का समाधान हो।
इस पूरे विवाद का मूल प्रश्न यही है कि अंकिता के परिवार को न्याय की प्रक्रिया पर भरोसा कैसे दिलाया जाए। निष्पक्ष जांच, पारदर्शिता और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई ही इस संवेदनशील मामले में जनता का विश्वास मजबूत कर सकती है।

