/ Jan 20, 2026
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UTTARAKHAND SOLDIER: उत्तराखंड के लिए मंगलवार का दिन अत्यंत दुखद समाचार लेकर आया है। देवभूमि ने देश की रक्षा करते हुए अपने दो वीर सपूतों को खो दिया है। एक ओर जहां अरुणाचल प्रदेश में तैनात रुद्रप्रयाग के जवान का ड्यूटी के दौरान निधन हो गया, वहीं दूसरी ओर जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में आतंकियों से लोहा लेते हुए बागेश्वर जिले के कपकोट निवासी पैरा कमांडो बलिदान हो गए। इन दोनों घटनाओं के बाद से पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई है। दोनों जवानों का पार्थिव शरीर आज उनके पैतृक गांवों में पहुंचेगा, जहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी।
रुद्रप्रयाग जिले के दशज्यूला पट्टी स्थित आगर गांव के रहने वाले हवलदार रविंद्र सिंह का अरुणाचल प्रदेश में कर्तव्य पालन के दौरान निधन हो गया। 36 वर्षीय रविंद्र सिंह भारतीय सेना की 15 गढ़वाल राइफल्स में तैनात थे और वर्तमान में उनकी पोस्टिंग अरुणाचल प्रदेश के अलोंग में थी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, 18 जनवरी 2026 को ड्यूटी के दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ा, जिसके चलते उनका आकस्मिक निधन हो गया। वह अपने पीछे एक पुत्र और एक पुत्री समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।(UTTARAKHAND SOLDIER MARTYR)
रविंद्र सिंह के पिता का नाम स्वर्गीय सतेंद्र सिंह राणा था। रविंद्र वर्ष 2008 में 15 गढ़वाल राइफल्स में भर्ती हुए थे। उनके निधन की खबर मिलते ही आगर गांव और आसपास के क्षेत्र में मातम पसर गया। ग्राम प्रधान चंद्रकला देवी और सामाजिक कार्यकर्ता पंकज सिंह ने बताया कि रविंद्र सिंह बेहद मिलनसार और मृदु व्यवहार के व्यक्ति थे। वह जब भी छुट्टियों में घर आते थे, गांव के लोगों से बड़े प्रेम से मिलते थे। जिला पंचायत सदस्य सारी जयवर्धन कांडपाल ने भी इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। (UTTARAKHAND SOLDIER MARTYR)

जवान रविंद्र सिंह का पार्थिव शरीर सोमवार रात को ही रुद्रप्रयाग स्थित आर्मी कैंप में लाया जा चुका है। आज यानी 20 जनवरी की सुबह लगभग सात बजे उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए उनके पैतृक गांव आगर ले जाया जाएगा। वहां परिजनों और ग्रामीणों द्वारा अंतिम दर्शन करने के बाद शवयात्रा रुद्रप्रयाग संगम के लिए प्रस्थान करेगी। अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों के पवित्र संगम पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।(UTTARAKHAND SOLDIER MARTYR)
दूसरी दुखद खबर बागेश्वर जिले के कपकोट से है। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में आतंकवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में कपकोट के बीथी गांव निवासी हवलदार गजेंद्र सिंह गढिया बलिदान हो गए। 43 वर्षीय गजेंद्र सिंह 2 पैरा कमांडो में तैनात थे। रविवार को किश्तवाड़ के छात्रू क्षेत्र के सुदूर-सिंहपोरा में आतंकियों की तलाश के लिए सुरक्षा बलों द्वारा ‘ऑपरेशन त्राशी’ नामक एक संयुक्त अभियान चलाया जा रहा था। इसी सर्च ऑपरेशन के दौरान छिपे हुए आतंकियों ने सुरक्षा बलों पर ग्रेनेड से हमला कर दिया। इस कायराना हमले में हवलदार गजेंद्र सिंह वीरगति को प्राप्त हुए।

हवलदार गजेंद्र सिंह 2004 में स्नातक प्रथम वर्ष की पढ़ाई के दौरान सेना में भर्ती हुए थे। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के विद्यालय से और इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई राजकीय इंटर कॉलेज कपकोट से पूरी की थी। वह अपने पीछे पिता धन सिंह गढिया, माता चंद्रा देवी गढिया, पत्नी लीला गढिया और दो बेटों राहुल और धीरज को छोड़ गए हैं। उनका बड़ा बेटा छठी कक्षा में और छोटा बेटा चौथी कक्षा में पढ़ता है। उनके छोटे भाई का नाम किशोर गढिया है।(UTTARAKHAND SOLDIER MARTYR)
गजेंद्र सिंह का परिवार देहरादून में रहता है। पति के बलिदान होने की सूचना मिलते ही उनकी पत्नी लीला गढिया की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें देहरादून से हेलीकॉप्टर के माध्यम से गरुड़ के मेलाडुंगरी हेलीपैड तक लाया गया। उनकी हालत को देखते हुए उन्हें व्हीलचेयर की मदद से गाड़ी तक पहुंचाया गया और वहां से कपकोट लाया गया। परिजनों से मिली जानकारी के मुताबिक, बलिदान जवान का पार्थिव शरीर मंगलवार को हेलीकॉप्टर के जरिए केदारेश्वर मैदान लाया जाएगा। इसके बाद सरयू और खीरगंगा नदी के संगम पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

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