यूपी-राजस्थान में पुराने सिपाही बन गए दारोगा और इंचार्ज, उत्तराखंड के कांस्टेबल मायूस

  • उत्तराखंड में ये कैसा कानून…साहब का ट्रिपल प्रमोशन, कांस्टेबलों की नहीं हो रही पदोन्नति

देहरादून, ब्यूरो। कुछ माह बाद उत्तराखंड राज्य 22 साल का हो जाएगा। उत्तराखंड के पुलिस कांस्टेबल पदोन्नति न होने से खफा हैं। जो सिपाही यहां राज्य गठन से पहले ही तैनात हुए थे वह सिपाही के ही पद हैं और कई रिटायर भी इसी पद से हो रहे हैं, जबकि पड़ो राज्य यूपी, राजस्थान समेत अन्य प्रदेशों में उन्हीं के साथ के सिपाही दारोगा तक बन चुके हैं। ऐसा नहीं है कि उत्तराखंड में पुलिस विभाग में पदोन्नतियों पर रोक लगाई गई हो। अफसरों की खूब तरक्की हो रही है। कई साहब सीओ से एक इलाके के सीओ साहब और एसएसपी से डीआईजी तक बनाए जा चुके हैं, लेकिन सिपाही सिपाही ही रह गए हैं। इससे सिपाहियों का मनोबल काफी टूटा है। कहने का मतलब यह है कि प्रदेश में पुलिस के अफसरों के तो खूब प्रमोशन और तरक्की हो रही है, लेकिन सिपाही कभी दो स्टार तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।


यूपी में कई सिपाही पदोन्नत होकर हेड कांस्टेबल बन गए। यूपी के 1990 बैच के पुलिस कांस्टेबल आज पदोन्नत होकर दरोगा बन चुके हैं। दूसरी ओर इस मामले को लेकर विधायक प्रीतम सिंह पंवार का एक पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। ये पत्र गृह मंत्री को संबोधित करते हुए लिखा गया और इस पत्र में उत्तराखंड पुलिस सिपाही की पदोन्नति से जुड़े तमाम सवाल हैं। पूछा है कि आखिर क्यों कांस्टेबल की पदोन्नति नहीं हो रही है। इस पत्र के अंत में एक हस्ताक्षर और विधायक प्रीतम सिंह पवार की मुहर भी लगी है, जो 20 मई 2022 को लिखा गया है।

उत्तराखंड में लंबे अवधि से सेवाएं दे रहे सिपाही जब अपने साथ ही यूपी पुलिस में तैनात हुए सिपाहियों से बात करते हैं तो उन्हें शर्मिंदगी आती है। उनके साथ के ही सिपाही वहां पर दारोगा और कई इलाकों के प्रभारी भी बन चुके हैं, लेकिन वह अभी तक दो स्टार के सपने ही देख रहे हैं। शायद आगे भी उन्हें कोई उम्मीद कम ही दिख रही है। उनके कई साथी तो सिपाही के पद से ही रिटायर भी हो गए जबकि अन्य राज्यों में अफसरों के साथ ही सिपाहियों को भी समय और नियमानुसार पदोन्नति दी जा रही है।