UTTARAKHAND FINANCIAL EFFICIENCY: उत्तराखण्ड सरकार के लिए वित्तीय मोर्चे पर एक बड़ी खुशखबरी आई है। भारत सरकार ने ‘पूंजीगत निवेश हेतु राज्यों को विशेष सहायता योजना’ (SASCI) के भाग-IX के अंतर्गत उत्तराखण्ड को ₹350 करोड़ की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की है। यह धनराशि राज्य को “वित्तीय प्रबंधन में दक्षता” प्रदर्शित करने के लिए विशेष पुरस्कार के रूप में दी गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया है।

UTTARAKHAND FINANCIAL EFFICIENCY: वित्तीय अनुशासन और सुधारों का मिला फल
मुख्यमंत्री धामी ने इस गौरवपूर्ण क्षण पर कहा कि यह प्रोत्साहन राशि राज्य द्वारा अपनाए गए राजकोषीय अनुशासन और पारदर्शिता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। उत्तराखण्ड ने पिछले कुछ वर्षों में अपने राजस्व मॉडल में व्यापक सुधार किए हैं, जिसके प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
- कर संग्रह में वृद्धि: जीएसटी और अन्य करों की वसूली के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करना।
- डिजिटल भुगतान प्रणाली: सरकारी लेन-देन में शत-प्रतिशत पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल माध्यमों को सशक्त बनाना।
- बजटीय प्रबंधन: खर्चों पर कड़ा नियंत्रण और बजट का सही समय पर आवंटन व उपयोग।

सुधार आधारित शासन मॉडल की राष्ट्रीय पहचान
मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि उत्तराखण्ड को केवल वित्तीय प्रबंधन ही नहीं, बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी केंद्र से सराहना और प्रोत्साहन मिलता रहा है। पूर्व में राज्य को इन उपलब्धियों के लिए भी पुरस्कृत किया जा चुका है:
- खनन क्षेत्र: ई-टेंडरिंग और पारदर्शी ऑनलाइन मॉनिटरिंग प्रणाली लागू करने के लिए।
- परिवहन विभाग: विभागीय प्रक्रियाओं में सुधार और राजस्व वृद्धि के नवाचारों के लिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड ‘सुशासन’ के नए मानक स्थापित कर रहा है। यह ₹350 करोड़ की राशि राज्य की चल रही विकास परियोजनाओं को नई गति प्रदान करेगी। उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार ‘विकास भी, विरासत भी’ के संकल्प के साथ उत्तराखण्ड को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में खड़ा करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

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