केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के नोटिस के बाद उत्तराखंड शासन, 15 दिन में मांगा जवाब

देहरादून, ब्यूरो। उत्तराखंड के जंगल विभाग में तमाम भ्रष्टाचार के मामले सामने आते रहे हैं। हाल ही में कार्बेट टाइगर रिजर्व के पोखरो रेंज में टाइगर सफारी के निर्माण में हुए गोलमाल में कई आईएफएस और कार्मिक नप सकते हैं। दरअसल, केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के अधीन काम करने वाले केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की टीम की रिपोर्ट के साथ ही उत्तराखंड के मुख्य सचिव डाॅ. एसएस संधू और शासन को नोटिस मिलने के बाद हड़कंप मचा हुआ है। केंद्र से नोटिस मिलने के बाद सीएस के निर्देश पर 15 दिन में वन विभाग के अफसरों से जवाब तलब किया गया है। ऐसे में कई वन विभाग के अधिकारी इस मामले में नप सकते हैं।

दरअसल, केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने इसे वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 55 (एए) के तहत संज्ञान में लेकर सीएस को नोटिस जारी किया है। प्राधिकरण ने कार्बेट टाइगर रिजर्व के पोखरो रेंज के सोनानदी रेंज, कालागढ़ डिवीजन, गुज्जर स्रोत, पाखरो ब्लॉक, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में टाइगर सफारी निर्माण में हुई अनियमितता को लेकर नोटिस जारी किया है। इसमें साफ-साफ लिखा गया है कि टाइगर सफारी निर्माण में निर्धारित शर्तों का अनुपालन नहीं किया गया।

दूसरी ओर इस गंभीर गबन और हेर-फेकर के मामले में मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के नोटिस के बाद इस मामले में जिन अफसरों के ऊपर प्रबंधन और दूसरी जिम्मेदारियां थीं, उन्हें नोटिस जारी कर दिया गया है। प्रमुुख तौर पर तत्कालिन कॉर्बेट निदेशक और डीएफओ को नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया है।

बता दें कि उत्तराखंड शासन को जारी नोटिस में प्राधिकरण ने कहा, ‘‘सफारी के अंतिम मास्टर ले-आउट प्लान को न तो केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से अनुमोदित करवाया और न ही वहां बनने वाले बाघ बाड़ों के विशेष डिजाइन की अनुमति ली गई। इस पर मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक डॉ. पराग मधुकर धकाते की ओर से तत्कालीन कॉर्बेट पार्क निदेशक राहुल, टाइगर सफारी निर्माण से जुड़े रहे तत्कालिन डीएफओ किशन चंद और अखिलेश तिवारी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया।

इन अनियमितताओं के साथ केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) की टीम को कई ऐसे काम भी मिले जिनकी कोई अनुमति और अनुमोदन भी नहीं किया गया था। विगत 9-10 मार्च 2022 को स्थलीय निरीक्षण में वन्य जीवों के लिए बाड़ों का निर्माण प्राधिकर के अनुमोदन के बगैर ही कर दिया गया। अधिकारियों के पास ले-आउट योजना की कोई प्रमाणित प्रति तक नहीं थी। टीम में पीसी त्यागी, पूर्व पीसीसीएफ और सीडब्ल्यूएलडब्ल्यू (हॉफ), तमिलनाडु और सदस्य ईजीजेडडी, सीजेडए लक्ष्मीनरसिम्हा आर शामिल थे।