/ Feb 04, 2026
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MCC NEW CRICKET RULES 2026: क्रिकेट के नियम बनाने वाली संस्था मेरीलबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) ने खेल के 73 नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इन संशोधनों में सबसे अधिक चर्चा बहु-दिवसीय यानी टेस्ट मैचों से जुड़े नियम की हो रही है। नए नियमों के अनुसार, अब टेस्ट मैच में दिन के अंतिम ओवर के दौरान यदि कोई विकेट गिरता है, तो खेल को वहीं समाप्त नहीं किया जा सकेगा। बल्लेबाजी टीम को नया बल्लेबाज मैदान पर भेजना होगा और वह ओवर हर हाल में पूरा करना अनिवार्य होगा। यह ऐतिहासिक बदलाव 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होंगे।

एमसीसी ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2022 के बाद नियमों में किया गया यह सबसे बड़ा अपडेट है, जिसका उद्देश्य खेल को अधिक समावेशी और आधुनिक बनाना है। क्लब का मानना है कि अंतिम ओवर में विकेट गिरने पर खेल समाप्त कर देने से रोमांच कम हो जाता है। साथ ही, इससे समय की भी कोई बचत नहीं होती क्योंकि बची हुई गेंदें अगले दिन फिर से फेंकनी पड़ती हैं। नए नियम से गेंदबाज को उन परिस्थितियों का पूरा लाभ मिलेगा जो खेल के उस चरण में उसके अनुकूल होती हैं और बल्लेबाज को कठिन चुनौती का सामना करना ही पड़ेगा।

एमसीसी ने ओवरथ्रो और मिसफील्ड के बीच के बारीक अंतर को भी पारिभाषित कर दिया है। अब ओवरथ्रो केवल तभी माना जाएगा जब कोई फील्डर रन रोकने या रनआउट करने के उद्देश्य से स्टंप्स की ओर गेंद फेंकता है और वह चूककर आगे निकल जाती है। यदि बाउंड्री के पास गेंद रोकते समय वह हाथ से फिसल जाती है, तो उसे अब मिसफील्ड की श्रेणी में रखा जाएगा। ‘डेड बॉल’ के नियम में भी बदलाव हुआ है; अब यदि गेंद किसी फील्डर के पास है या मैदान पर रुक गई है और अंपायर को लगता है कि रन लेने की संभावना खत्म हो गई है, तो वे उसे डेड बॉल घोषित कर सकते हैं।

हिट विकेट के नियम को लेकर चल रहे भ्रम को दूर करते हुए एमसीसी ने बताया कि यदि शॉट खेलने के बाद संतुलन बिगड़ते समय बल्लेबाज स्टंप्स पर गिरता है, तो वह आउट माना जाएगा, चाहे गेंद कितनी भी दूर चली गई हो। हालांकि, यदि बल्लेबाज किसी फील्डर से टकराकर स्टंप्स पर गिरता है, तो उसे आउट नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा, यदि बल्लेबाज के हाथ से छूटा हुआ बल्ला सीधे स्टंप्स पर लगता है तो वह आउट होगा, लेकिन यदि वह पहले किसी फील्डर या विकेटकीपर को छूकर स्टंप्स से टकराता है, तो बल्लेबाज सुरक्षित रहेगा।

महिला और जूनियर क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए एमसीसी ने गेंदों को तीन श्रेणियों साइज-1, साइज-2 और साइज-3 में विभाजित किया है। साइज-1 पारंपरिक पुरुषों की गेंद होगी, जबकि साइज-2 महिला क्रिकेट और साइज-3 छोटे बच्चों के लिए निर्धारित की गई है। गुणवत्ता और सुरक्षा के मानक तीनों श्रेणियों के लिए एक समान रखे गए हैं। एक अन्य महत्वपूर्ण बदलाव में, एमसीसी ने ओपन एज क्लब क्रिकेट में लैमिनेटेड (लकड़ी के टुकड़ों को जोड़कर बने) बल्लों के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है। ये बल्ले पारंपरिक बल्लों की तुलना में सस्ते होते हैं, जिससे खेल की लागत कम होगी।

क्षेत्ररक्षण के नियमों में ‘बनी हॉप कैच’ को हटा दिया गया है। अब बाउंड्री पर कैच लेते समय फील्डर हवा में गेंद को केवल एक बार छू सकता है और उसके बाद उसे पूरी तरह बाउंड्री के भीतर जमीन पर होना आवश्यक होगा। साथ ही, विकेटकीपर के लिए नियम शिथिल किया गया है कि यदि वह गेंद फेंके जाने से पहले स्टंप्स के बराबर या आगे खड़ा होता है, तो इसे अब नोबॉल नहीं माना जाएगा। 1787 में स्थापित एमसीसी आज भी क्रिकेट नियमों का कॉपीराइट रखता है और समय-समय पर खेल की बेहतरी के लिए इनमें सुधार करता रहता है।

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