पहले प्रिंसिपल ने कार्रवाई करते हुए स्कूल से निकालने के दिए निर्देश बाद में बताया मामूली गलती

  • इस नामी स्कूल में बोर्ड एग्जाम में नकल कर रहे थे केंद्रीय मंत्री का बेटा और पूर्व सीएम का नाती, फिर क्या हुआ जानें

देहरादून, ब्यूरो। जिसकी चलती, उसकी क्या गलती? करीब-करीब हर ऐसे मामले में यह कहावत सटीक बैठत है जिसमें गलत होने के बाद भी कार्रवाई न हो या फिर सारे नियम-कानून दरकिनार कर दिए जाएं। कई बार तो कार्रवाई होने के बाद भी दबाव में मीडिया से मामले का रंग-रूप ही बदल दिया जाता है। ऐसा ही एक मामला दुनिया में फेमस द दून स्कूल का सामने आया है। स्कूल में पढ़ रहे एक केंद्रीय मंत्री के बेटे और एक पूर्व सीएम के नाती दसवीं के बोर्ड एग्जाम के दौरान नकल करते हुए पकड़ा गया। दिनभर से लेकर देर शाम तक भी इस मामले की चर्चाएं राजनीतिक गलियारों से लेकर हर किसी की जुबान पर थे।

पहले तो स्कूल प्रबंधन ने दोनों छात्रों पर कार्रवाई की, लेकिन बाद में दबाव में आकर द दून स्कूल प्रशासन ने इसे हाॅस्टल से संबंधित नियमों के उल्लंघन की मामूली कार्रवाई बताया। इस मामले का खुलासा तब जाकर हुआ या फिर यूं कि यह मामला तब ज्यादा गरमा गया जब आप नेता संजय सिंह ने इससे संबंधित ट्वीट किया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्री के बेटे और पूर्व सीएम के नाती के नकल करते वक्त पकड़े जाने के बाद प्रिंसिपल ने कार्रवाई की, लेकिन दबाव बनने के बाद कार्रवाई रोक दी गई। फिल्म निर्माता विनोद कापड़ी ने इसी मामले को रिट्वीट किया है।

पूरे दिन केंद्रीय मंत्री के बेटे और एक पूर्व मुख्यमंत्री के नाती के दून स्कूल में बोर्ड परीक्षा के दौरान अनुचित साधनों का प्रयोग करने की चर्चाएं सोशल मीडिया में चलती रही। चर्चा यह भी थी कि दोनों छात्रों को स्कूल प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए हॉस्टल से निष्कासित कर दिया है, लेकिन बाद में दबाव में कार्रवाई वापस ले ली गई।

इसके बाद देर शाम स्कूल प्रशासन ने सभी चर्चाओं पर विराम लगा दिया। देर शाम स्कूल पीआरओ कीर्तिका जुगरान ने एक बयान जारी किया जिसमें कहा गया कि कुछ ऑनलाइन प्लेटफार्म में प्रकाशित खबर तथ्यात्मक रूप से गलत है। दो छात्रों पर हॉस्टल के नियम तोड़ने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। यह स्कूल के नियम-नीति से जुड़ी एक सामान्य प्रक्रिया है। वहीं, स्कूल प्रशासन ने छात्रों को हॉस्टल से निष्कासित करने की सूचना का भी खंडन किया है।