/ Jan 02, 2026
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INDORE WATER DISEASES NEWS: मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से फैले संक्रमण के बाद क्षेत्र में स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है और हर दिन नए मरीज सामने आ रहे हैं। शुक्रवार को एक और बुजुर्ग महिला की मौत हो गई, जिसके बाद दूषित पानी के कारण जान गंवाने वालों का कुल आंकड़ा बढ़कर 15 हो गया है। वहीं, इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और हाईकोर्ट ने भी दखल दिया है और राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।

शुक्रवार को अरविंदो अस्पताल में इलाज करा रही 68 वर्षीय बुजुर्ग महिला गीताबाई की मौत हो गई। उनकी मौत के साथ ही इस हादसे में मरने वालों की संख्या 15 तक पहुंच गई है। गुरुवार को सामने आए नए आंकड़ों ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी है। केवल एक दिन में 338 नए मरीज मिले हैं। अब तक इस क्षेत्र से करीब 2800 मरीज सामने आ चुके हैं, जो उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी समस्याओं से ग्रसित हैं। अस्पतालों में मरीजों की भारी भीड़ है और स्वास्थ्य केंद्र पर सुबह से देर रात तक इलाज के लिए लोगों का तांता लगा हुआ है।

वर्तमान में विभिन्न अस्पतालों में कुल 201 मरीज भर्ती हैं, जिनका इलाज चल रहा है। चिंताजनक बात यह है कि इनमें से 32 मरीज आईसीयू में भर्ती हैं, जिनकी हालत गंभीर बनी हुई है। भर्ती मरीजों में 16 बच्चे भी शामिल हैं। प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक कुल 272 मरीजों को गंभीर स्थिति में भर्ती किया गया था, जिनमें से 71 मरीजों को ठीक होने के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया है। गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग ने क्षेत्र में व्यापक स्तर पर सर्वे अभियान चलाया। 21 टीमों ने घर-घर जाकर 1714 घरों का सर्वे किया और लगभग 8571 लोगों की स्वास्थ्य जांच की।

महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट में यह स्पष्ट हो गया है कि मौतों और बीमारी का कारण दूषित पानी ही है। सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी ने पुष्टि की है कि सैंपल की जांच रिपोर्ट में दूषित पानी पीने से ही लोगों के बीमार पड़ने और जान जाने की बात सामने आई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ड्रेनेज के पानी में टॉयलेट का मल-मूत्र, साबुन, डिटर्जेंट और अन्य रसायन मिले होते हैं। जब यह पीने के पानी की लाइन में मिल जाता है, तो साल्मोनेला, शिगेला, हैजा (Cholera) और ई. कोलाई (E. coli) जैसे घातक बैक्टीरिया पनपते हैं। यही बैक्टीरिया जानलेवा स्थिति का कारण बन रहे हैं।

मामले के तूल पकड़ने के बाद नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी स्वीकार किया है कि भागीरथपुरा में पेयजल लाइन में सीवेज का पानी मिलने से हालात बिगड़े हैं। उन्होंने आशंका जताई है कि क्षेत्र में स्थित पुलिस चौकी के पास बने शौचालय के नीचे से गुजर रही पाइपलाइन में लीकेज है, जहां से गंदा पानी पीने के पानी में मिल गया। निगम के कंट्रोल रूम और इंदौर-311 हेल्पलाइन पर जल संबंधी शिकायतों की बाढ़ आ गई है। पिछले 24 घंटे में 206 शिकायतें मिली हैं, जिनमें सबसे ज्यादा शिकायतें जोन नंबर पांच से हैं।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है। आयोग ने सरकार को दो सप्ताह के भीतर घटना की विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, जबलपुर हाईकोर्ट की दो सदस्यीय बेंच भी इस मामले पर ऑनलाइन सुनवाई कर रही है। कोर्ट ने सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं क्योंकि समय रहते लीकेज और पानी की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया, जिसका खामियाजा अब निर्दोष जनता को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है।

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