/ Feb 07, 2026
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INDIA US TRADE DEAL: भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका ने पारस्परिक और साझा लाभ वाले व्यापार को बढ़ावा देने के लिए एक अंतरिम समझौते की रूपरेखा तैयार करने की घोषणा की है। यह रूपरेखा दोनों देशों के बीच व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) की दिशा में उनकी प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है जिसकी शुरुआत 13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई थी। इस समझौते का उद्देश्य बाजार तक पहुंच बढ़ाना और दोनों देशों के बीच आपूर्ति श्रृंखला को और अधिक लचीला बनाना है।

इस अंतरिम समझौते के मुख्य प्रावधानों के तहत भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं पर आयात शुल्क यानी टैरिफ को समाप्त करेगा या उनमें महत्वपूर्ण कटौती करेगा। इसके अलावा भारत अमेरिका से आने वाले खाद्य और कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर भी शुल्क कम करेगा। इन उत्पादों में पशु आहार के लिए उपयोग होने वाले सूखे डिस्टिलर्स अनाज और लाल ज्वार के साथ-साथ सूखे मेवे, ताजे और प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट जैसे अन्य कई उत्पाद शामिल हैं। इस कदम से अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजारों के द्वार खुलेंगे और द्विपक्षीय व्यापार को गति मिलेगी।

दूसरी ओर अमेरिका भारत से आने वाली वस्तुओं पर एक पारस्परिक टैरिफ दर लागू करेगा। कार्यकारी आदेश 14257 के तहत भारत की मूल वस्तुओं जैसे कपड़ा और परिधान, चमड़ा और जूते, प्लास्टिक और रबर, कार्बनिक रसायन, घरेलू सजावट के सामान, हस्तशिल्प और कुछ मशीनों पर 18 प्रतिशत की टैरिफ दर लागू की जाएगी। हालांकि अंतरिम समझौते के सफल समापन के बाद अमेरिका कई विशिष्ट वस्तुओं पर से इस टैरिफ को हटाने पर विचार करेगा। इनमें जेनेरिक फार्मास्यूटिकल्स, रत्न और हीरे, और विमान के कलपुर्जे शामिल हैं जिन्हें कार्यकारी आदेश 14346 के तहत विशेष सूची में रखा गया है।

समझौते के तहत अमेरिका भारत के कुछ विमानों और उनके कलपुर्जों पर लगाए गए उन शुल्कों को भी हटा देगा जो पहले राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर एल्युमीनियम, स्टील और तांबे के आयात पर लगाए गए थे। इसके साथ ही भारत को अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप ऑटोमोटिव पार्ट्स के लिए एक तरजीही टैरिफ दर कोटा प्राप्त होगा। जेनेरिक फार्मास्यूटिकल्स और उनकी सामग्री के संबंध में भी भारत को बातचीत के आधार पर अनुकूल परिणाम प्राप्त होंगे जो अमेरिका की चल रही धारा 232 जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेंगे।

व्यापार के लाभों को सुनिश्चित करने के लिए भारत और अमेरिका ‘रूल्स ऑफ ओरिजिन’ स्थापित करेंगे जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि इस समझौते का लाभ मुख्य रूप से इन्हीं दोनों देशों को मिले। इसके साथ ही द्विपक्षीय व्यापार को प्रभावित करने वाली गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने पर भी सहमति बनी है। भारत अमेरिकी चिकित्सा उपकरणों के व्यापार में आने वाली पुरानी बाधाओं को दूर करने और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी वस्तुओं के बाजार में देरी करने वाली आयात लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को समाप्त करने पर सहमत हुआ है।

आने वाले पांच वर्षों में भारत ने अमेरिका से लगभग 500 बिलियन डॉलर मूल्य के ऊर्जा उत्पाद, विमान और उनके पुर्जे, कीमती धातुएं, प्रौद्योगिकी उत्पाद और कोकिंग कोल खरीदने का इरादा व्यक्त किया है। दोनों देश ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (जीपीयू) और डेटा सेंटर में उपयोग होने वाली वस्तुओं सहित प्रौद्योगिकी उत्पादों के व्यापार को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाएंगे। इसके साथ ही तकनीकी सहयोग का विस्तार करने और डिजिटल व्यापार के क्षेत्र में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए भी प्रतिबद्धता जताई गई है। इसका उद्देश्य बीटीए के हिस्से के रूप में महत्वाकांक्षी और पारस्परिक रूप से लाभकारी डिजिटल व्यापार नियम बनाना है।

दोनों देशों ने आर्थिक सुरक्षा संरेखण को मजबूत करने और आपूर्ति श्रृंखला की लचीलापन बढ़ाने पर भी सहमति दी है। इसमें तीसरे पक्ष की गैर-बाजार नीतियों से निपटने के साथ-साथ निवेश समीक्षा और निर्यात नियंत्रण पर सहयोग करना शामिल है। यदि किसी भी देश द्वारा सहमत टैरिफ में कोई बदलाव किया जाता है तो दूसरा देश अपनी प्रतिबद्धताओं में संशोधन करने के लिए स्वतंत्र होगा। भारत और अमेरिका अब इस रूपरेखा को जल्द लागू करने और बीटीए के रोडमैप के अनुसार अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में मिलकर काम करेंगे।

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