आज यानि 2 अप्रैल 2026 को पूरे देश में HANUMAN JAYANTI हर्षोल्लास के साथ मनाई जा रही है। उत्तराखंड में भी हनुमान मंदिरों में सुबह 5 बजे से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिल रही है। देहरादून के पंचमुखी हनुमान मंदिर, कोटद्वार के सिद्धबली मंदिर, नैनीताल के कैंची धाम, रामनगर के हनुमान धाम और चमोली के औली हनुमान मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ देखी गई।
देहरादून के पंचमुखी हनुमान मंदिर में HANUMAN JAYANTI पर 101 किलो के लड्डू का चढ़ावा
देहरादून के पंचमुखी हनुमान मंदिर में इस बार 101 किलो के लड्डू का चढ़ावा चढ़ाया गया। इसके अलावा देहरादून के 11 मुखी हनुमान मंदिर, हनुमान चौक स्थित प्राचीन मंदिर और जाखन हनुमान मंदिर में भी सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। भक्त सिंदूर, चमेली का तेल, चोला, लाल लंगोट, लाल फूल, बूंदी और बेसन के लड्डू, गुड़-चना तथा पान का बीड़ा लेकर मंदिरों में पहुँचे।
बता दें कि मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना के साथ-साथ हनुमान चालीसा और सुंदरकांड के पाठ किए जा रहे हैं। कई स्थानों पर भंडारों का आयोजन भी किया गया है। अखंड रामायण पाठ, भजन-कीर्तन और रात्रि जागरण जैसे धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। लोगों का मानना है कि हनुमान जयंती के दिन संकटमोचन की पूजा-अर्चना करने से भक्तों के सभी भय, रोग और कष्ट दूर होते हैं।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक रूट डायवर्जन के साथ-साथ अतिरिक्त पार्किंग की व्यवस्था भी की गई है।
2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
बता दें कि इस वर्ष HANUMAN JAYANTI 2 अप्रैल 2026 गुरुवार को मनाई जा रही है। तिथि की शुरुआत 1 अप्रैल को सुबह 7:06 बजे हुई और इसका समापन 2 अप्रैल को सुबह 7:41 बजे होगा। उदया तिथि के नियम के अनुसार त्योहार 2 अप्रैल को मनाया जा रहा है। सुबह का मुख्य मुहूर्त 6:10 बजे से 7:44 बजे तक, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:50 बजे तक और शाम का मुहूर्त 6:39 बजे से 8:05 बजे तक है। सुबह 4:38 बजे से 5:24 बजे तक स्नान और पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त आदर्श माना गया है।
HANUMAN JAYANTI का धार्मिक महत्व
HANUMAN JAYANTI भगवान हनुमान के जन्म की याद में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी की माता अंजना और पिता वानर राजा केसरी थे। वे पवन देवता वायु के पुत्र माने जाते हैं। वाल्मीकि रामायण और अन्य पुराणों के अनुसार जब अयोध्या के राजा दशरथ पुत्रकामेष्टि यज्ञ कर रहे थे, तब यज्ञ से प्राप्त पायसम को एक बाज ने चुरा लिया और जंगल में गिरा दिया। उस समय माता अंजना शिव की पूजा कर रही थीं। वायु देव ने उस पायसम को अंजना के हाथों में पहुँचाया, जिससे हनुमान जी का जन्म हुआ।

बचपन में बाल हनुमान ने सूर्य को फल समझकर निगल लिया था, जिसके बाद इंद्र के वज्र प्रहार से उनकी ठोड़ी यानी हनु घायल हुई, तभी से उनका नाम हनुमान पड़ा। देवताओं ने उन्हें अनेक वरदान दिए, जिनमें अजर-अमर होना और असाधारण बल शामिल हैं।
पूजा विधि
HANUMAN JAYANTI पर भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और लाल या भगवा कपड़े पहनते हैं। घर में लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर हनुमान जी की मूर्ति या चित्र स्थापित किया जाता है। चमेली के तेल या घी से दीपक जलाया जाता है और सिंदूर, लाल फूल, चना, गुड़, बूंदी के लड्डू तथा तुलसी दल अर्पित किए जाते हैं। हनुमान चालीसा, सुंदरकांड, बजरंग बाण और हनुमान अष्टक का पाठ किया जाता है। मंत्र जप में ‘ओम हं हनुमते नमः’ और ‘ओम अंजनी सुताय नमः’ का विशेष महत्व है।
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