Ganesh Chaturthi 2022 Ekdant Katha : भगवान गणेश को इसलिए कहा जाता है गजानन या एकदंत

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Ganesh Chaturthi 2022 Ekdant Katha : गणेश जी को एकदंत के नाम से भी जाना जाता है

नई दिल्ली : इस बार गणेश चतुर्थी का त्यौहार 31 अगस्त को मनाया जा रहा है, हमेशा की तरह इस बार भी यह त्यौहार पूरी धूमधाम से मनाया जा रहा है। जैसा की आप सब जानते है कि भगवान गणेश जी को गजानन, बप्पा, विघ्नहर्ता या एकदंत के नाम से भी जाना जाता है। (Ganesh Chaturthi 2022 Ekdant Katha) लेकिन यह जानना भी काफी दिलचस्प है कि आखिर क्यों भगवान गणेश जी को एकदंत के नाम से जाना जाता है।

Ganesh Chaturthi 2022 Ekdant Katha

उबटन से एक बालक की आकृति को बनाया

जो पौराणिक कथाएँ हैं, उनके अनुसार एक बार की बात है,जब माता पार्वती ने नंदी को एक आज्ञा का पालन करने के लिए कहा था, परन्तु माता पार्वती की उस आज्ञा का पालन करने में नंदी से ऋुटि हो गई। जिसके बाद माता पार्वती को विचार आया कि कुछ ऐसी चीज का निर्माण करना चाहिए  जो केवल उनकी आज्ञा का पालन कर सके। इसके बाद उन्होंने अपने उबटन से एक बालक की आकृति को बनाया , उन्होंने उस आकृति में प्राण डाल दिए।

Ganesh Chaturthi 2022 Ekdant Katha

Ganesh Chaturthi 2022 Ekdant Katha : माता पार्वती ने बालक को पहरा देने के लिए कहा

कहा जाता है कि माता पार्वती ने उस बालक को उस वक्त पहरा देने के लिए कहा, जिस वक्त वो स्नान कर रही थी।  माता पार्वती के द्वारा उस बालक को आदेश दिया गया कि, उनकी इजाजत के बिना कोई अंदर नहीं आ पाए। उस समय वहां भगवान शिव के गण आ गए , लेकिन मिली आज्ञा के अनुसार उन्हें अंदर नहीं जाने दिया।

Ganesh Chaturthi 2022 Ekdant Katha

भगवान शिव के द्वारा एक हाथी का सिर लगा दिया गया

जिसके बाद भगवान शिव आए , तो बालक ने उन्हें भी अंदर नहीं जाने दिया। इस बात से भगवान शिव को काफी क्रोध आ गया , जिसके बाद उन्होंने बालक का सिर धड़ से शरीर से अलग कर दिया।(Ganesh Chaturthi 2022 Ekdant Katha)  स्नान करने के बाद माता पार्वती जब बाहर आईं तो यह सब देखकर उन्हें काफी क्रोध आया। उन्होंने आदेश दिया कि वह बालक को जिन्दा देखना चाहती हैं। जिसके बाद भगवान शिव के द्वारा एक हाथी का सिर बालक के लगा दिया गया।

Ganesh Chaturthi 2022 Ekdant Katha

Ganesh Chaturthi 2022 Ekdant Katha : परशुराम जी ने गणेश जी का एक दांत तोड़ दिया

कहा जाता है कि, एक दिन भगवान शंकर और माता पार्वती अपने कक्ष में विश्राम कर रहे थे। उन्होंने गणेश जी को आज्ञा दी कि कोई भी अंदर न आ पाए । उसी समय भगवान शिव जी से मिलने के लिए परशुराम आये।  लेकिन गणेश जी ने ऐसा नहीं होने दिया। (Ganesh Chaturthi 2022 Ekdant Katha )जिसके चलते परशुराम जी काफी क्रोधित हो गए और जिसके बाद उन्होंने फरसे से गणेश जी का एक दांत तोड़ दिया। तभी से भगवान गणेश जी को एकदन्त कहा जाता है।

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