DEHRADUN BEO ARRESTED: देहरादून जिले में सतर्कता विभाग यानी विजिलेंस ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए डोईवाला विकासखंड के उप शिक्षा अधिकारी एवं प्रभारी खंड शिक्षा अधिकारी धनवीर सिंह बिष्ट को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। इस मामले में एक महिला को भी सह-अभियुक्त के रूप में गिरफ्तार किया गया है। विजिलेंस की ट्रैप टीम ने बुधवार को योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाकर यह कार्रवाई की।
जानकारी के अनुसार, आरोपी उप शिक्षा अधिकारी धनवीर सिंह बिष्ट ने ऋषिकेश स्थित गंगा वैली जूनियर हाईस्कूल में शिक्षा का अधिकार यानी RTE अधिनियम के तहत अध्ययनरत छात्रों की प्रतिपूर्ति राशि के बिलों के भुगतान के बदले एक लाख रुपए की रिश्वत मांगी थी। शिकायतकर्ता निजी विद्यालय का संचालक था, जिसे आरटीई के तहत पढ़ने वाले छात्रों की प्रतिपूर्ति राशि पाने के लिए यह रिश्वत देने के लिए कहा गया था।(DEHRADUN BEO ARRESTED)
रिश्वत की माँग सामने आने के बाद शिकायतकर्ता ने थाना सतर्कता सेक्टर देहरादून में इसकी शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही विजिलेंस की टीम हरकत में आई और आरोपी को पकड़ने के लिए जाल तैयार किया।(DEHRADUN BEO ARRESTED)
DEHRADUN BEO ARRESTED: कैसे हुई गिरफ्तारी?
विजिलेंस टीम द्वारा बिछाए गए ट्रैप के अनुसार आरोपी धनवीर सिंह बिष्ट अपनी निजी गाड़ी से नेपाली फार्म पहुँचा और रिश्वत की रकम लेने लगा। उसी दौरान विजिलेंस की टीम ने मौके पर पहुँचकर उसे नोट लेते हुए रंगे हाथ दबोच लिया। इस कार्रवाई में उप शिक्षा अधिकारी धनवीर सिंह बिष्ट पुत्र गिन्दू सिंह के साथ-साथ सह-अभियुक्ता पुष्पांजलि पत्नी पंकज शर्मा, निवासी लेन नंबर 5 डालनवाला देहरादून को भी गिरफ्तार किया गया। पुष्पांजलि वर्तमान में स्वामी उत्तरांचल मॉडर्न स्कूल, गुमानीवाला, ऋषिकेश में कार्यरत बताई जा रही हैं।

गिरफ्तारी के बाद आरोपी उप शिक्षा अधिकारी को रायवाला कोतवाली ले जाया गया, जहाँ उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार इस मामले में जाँच के साथ-साथ जल्द ही अग्रिम कार्रवाई भी की जाएगी।(DEHRADUN BEO ARRESTED) सतर्कता सेक्टर देहरादून में मुकदमा संख्या 07/2026 के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के अंतर्गत यह कार्रवाई की गई है।(DEHRADUN BEO ARRESTED)
शिक्षा का अधिकार अधिनियम क्या है?
शिक्षा का अधिकार (Right to Education – RTE) अधिनियम, 2009 भारत के संविधान के अनुच्छेद 21ए के तहत एक मौलिक अधिकार है। यह कानून 1 अप्रैल 2010 से पूरे देश में लागू हुआ था। इसका मुख्य उद्देश्य 6 से 14 वर्ष की आयु के हर बच्चे को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करना है।
अधिनियम की मुख्य बातें
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किसी भी बच्चे को स्कूल की फीस या अन्य खर्चों (जैसे वर्दी, किताबें) के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। यह जिम्मेदारी सरकार की है कि वह बच्चे को स्कूल पहुंचाए और उसकी पढ़ाई पूरी कराए।
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सभी निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को अपनी 25% सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और वंचित समूहों के बच्चों के लिए आरक्षित रखनी होती हैं।
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स्कूल में दाखिले के समय न तो बच्चे का कोई टेस्ट (Screening) लिया जा सकता है और न ही माता-पिता से किसी भी प्रकार का ‘कैपिटेशन शुल्क’ या डोनेशन मांगा जा सकता है।
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यह कानून स्कूलों के लिए कुछ नियम तय करता है, जैसे कि हर स्कूल में खेल का मैदान, पीने का साफ पानी, लड़के-लड़कियों के लिए अलग शौचालय और पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित शिक्षक होने चाहिए।
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स्कूल में बच्चों को किसी भी प्रकार की शारीरिक सजा (मारपीट) या मानसिक प्रताड़ना देना कानूनी रूप से अपराध है।
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RTE अधिनियम के अनुसार, प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5) पर हर 30 छात्रों पर 1 शिक्षक होना अनिवार्य है। उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6 से 8) के लिए यह अनुपात 35 छात्रों पर 1 शिक्षक का है।
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यदि कोई बच्चा किसी कारणवश स्कूल नहीं जा पाया, तो उसे उसकी उम्र के अनुसार उपयुक्त कक्षा में प्रवेश दिया जाएगा। उदाहरण के लिए, यदि कोई 9 साल का बच्चा पहली बार स्कूल जाता है, तो उसे सीधे उसकी उम्र के हिसाब से कक्षा 4 में दाखिला मिलना चाहिए।(DEHRADUN BEO ARRESTED)
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