/ Mar 31, 2025
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CHAITRA NAVRATRI 2025 इस बार 30 मार्च, रविवार से शुरू होकर 6 अप्रैल तक चलेगी। इस बार नवरात्रि आठ दिनों की होगी, क्योंकि तृतीया तिथि क्षय होने के कारण दूसरा और तीसरा नवरात्र 31 मार्च को एक ही दिन मनाया जाएगा। प्रतिपदा तिथि 30 मार्च को घटस्थापना के साथ नवरात्रि की शुरुआत होगी और इस दिन कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:13 बजे से 10:22 बजे तक रहेगा। नवरात्रि का आरंभ और समापन दोनों रविवार को होने से माता का आगमन और प्रस्थान हाथी पर हो रहा है, जो शास्त्रों के अनुसार शुभ संकेत माना जाता है। इसे अच्छे वर्षा चक्र, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक कहा जाता है।
इस नवरात्रि के दौरान हर दिन देवी के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाएगी। 30 मार्च को मां शैलपुत्री की पूजा के साथ घटस्थापना की जाएगी। 31 मार्च को तृतीया तिथि क्षय होने के कारण द्वितीया और तृतीया एक साथ मनाई जाएगी, जिसमें मां ब्रह्मचारिणी और मां चंद्रघंटा की पूजा होगी। 1 अप्रैल को मां कूष्मांडा, 2 अप्रैल को मां स्कंदमाता, 3 अप्रैल को मां कात्यायनी, 4 अप्रैल को मां कालरात्रि, 5 अप्रैल को महागौरी और 6 अप्रैल को मां सिद्धिदात्री की पूजा होगी।
वैदिक पंचांग के अनुसार, शनिवार 29 मार्च को चैत्र अमावस्या है। हालांकि, ग्रहण के प्रभाव और उदया तिथि की गणना के कारण चैत्र नवरात्र की शुरुआत रविवार 30 मार्च से होगी। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 30 मार्च को दोपहर 12 बजकर 49 मिनट पर समाप्त होगी। ज्योतिषियों के अनुसार, 30 मार्च को कलश स्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। सुबह 06 बजकर 13 मिनट से 10 बजकर 22 मिनट के बीच घटस्थापना की जा सकती है। अभिजीत मुहूर्त में 12 बजकर 01 मिनट से 12 बजकर 50 मिनट तक कलश स्थापना का दूसरा शुभ समय रहेगा।
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