अमेरिका के आगे किसी कीमत पर नहीं झुकेंगे मोदी, एग्रीकल्चरल सब्सिडी पर रोक से भारत ने किया इनकार

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दिल्ली, ब्यूरो : अमेरिका और यूरोपीय देशों ने भारतीय किसानों को दी जाने वाली एग्रीकल्चरल सब्सिडी का विरोध किया है। अमेरिका और यूरोपीय देशों का मानना है कि सब्सिडी की वजह से भारतीय किसान चावल और गेहूं का भरपूर उत्पादन करते हैं। ऐसे में भारत का अनाज इंटरनेशनल  बाजार में कम कीमत में मिल जाता है। बता दें कि WTO की बैठक अमेरिका और यूरोपीय देशों ने एग्रीकल्चरल सब्सिडी का विरोध किया है। दरअसल अमेरिका और यूरोपीय देशों के अनाज की कीमत ज्यादा है, जिस वजह से विकासशील देशों में इसकी बिक्री कम होती है। तो कह सकते हैं कि अनाज बाजार में अपना दबदबा बनाए रखने के लिए ये देश भारत की एग्रीकल्चरल सब्सिडी पर रोक लगाना चाहते हैं।

इस साल 12 जून से 15 जून तक स्विट्जरलैंड के जेनेवा में WTO (WORLD TRADE ORGANIZATION) की बैठक हुई। जहां बैठक में अमेरिका और यूरोपीय देशों ने भारत की एग्रीकल्चरल सब्सिडी का विरोध किया। इस बैठक में भारत की तरफ से केंद्रीय वाणिज्य और उघोग मंत्री पियूष गोयल शामिल हुए। जिन्होने अमेरिका और यूरोपीय देशों के आगे झुकने से इनकार करते हुए एग्रीकल्चरल सब्सिडी पर रोक लगाने से मना साफ तौर पर मना कर दिया। बता दें कि 164 सदस्य देशों वाले WTO के G-33 ग्रुप के 47 देशों के मंत्रियों ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। जहां इस साल WTO की बैठक में तीन अहम मुद्दों पर प्रस्ताव लाने की तैयारी थी। इन मुद्दों में  कृषि सब्सिडी को खत्म करने, मछली पकड़ने पर अंतरराष्ट्रीय कानून बनाने और कोविड वैक्सीन पेटेंट पर नए नियम लाना शामिल था। एक तरफ जहां अमेरिका, यूरोप और दूसरे ताकतवर देश इन तीनों ही मुद्दों पर लाए जाने वाले प्रस्ताव के समर्थन में थे, लेकिन भारत ने इन तीनों ही प्रस्ताव का विरोध किया। ये भी पढ़े-अग्निवीर योजना युवाओं के सपनों पर तुषारापात, क्यों किया जा रहा ऐसा मजाक? फूंका केंद्र सरकार का पुतला

भारत ने अमेरिका और यूरोपीय जैसे ताकतवर देशों के दबाव के बाद भी एग्रीकल्चरल सब्सिडी को खत्म करने से इनकार कर दिया है। अब इस मामले में भारत को WTO के 80 देशों का साथ मिला है। खास बात है कि हमेशा भारत का विरोधी रहा चीन भी WTO में सब्सिडी के खिलाफ पेश प्रस्ताव के मामले में भारत के साथ रहा। वहीं जेनेवा में शुरू होने वाले WTO की बैठक से पहले 28 अमेरिकी सांसदों ने राष्ट्रपति जो बाइडन को पत्र लिखकर भारत के खिलाफ WTO में मुकदमा करने की मांग की थी। इन सांसदों ने भारत सरकार पर किसानों को तय नियम से ज्यादा सब्सिडी देने का आरोप लगाया था। ये भी पढ़े-वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाला AIDS का इलाज, वैक्सीन की एक खुराक से ठीक होगी बीमारी