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EPF vs VPF 2026: रिटायरमेंट के लिए कौन सा है बेहतर विकल्प? जानें फर्क

EPF vs VPF का सवाल हर सैलरीड इंसान के मन में कभी न कभी जरूर आता है — खासकर तब, जब बात रिटायरमेंट के लिए एक्स्ट्रा बचत की हो। दोनों स्कीम्स EPFO के तहत आती हैं, दोनों पर एक जैसी ब्याज दर मिलती है, फिर भी दोनों में कुछ बड़े फर्क हैं जो आपकी सैलरी और टैक्स प्लानिंग पर सीधा असर डालते हैं। इस आर्टिकल में हम EPF vs VPF को आसान भाषा में समझेंगे, ताकि आप खुद तय कर सकें कि आपके लिए कौन सा विकल्प बेहतर है।

EPF vs VPF: पहले बेसिक समझें

EPF यानी Employees’ Provident Fund एक अनिवार्य स्कीम है। इसमें कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी + DA का 12% योगदान करता है, और कंपनी भी उतना ही योगदान करती है। यह नियम उन कंपनियों पर लागू होता है जहां 20 या उससे ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं।

VPF यानी Voluntary Provident Fund, EPF का ही एक्सटेंशन है। इसमें कर्मचारी चाहे तो अपनी बेसिक सैलरी + DA का 100% तक अतिरिक्त योगदान कर सकता है — लेकिन इसमें कंपनी का कोई मैचिंग कॉन्ट्रिब्यूशन नहीं होता।

EPF vs VPF: ब्याज दर में फर्क

EPF vs VPF में सबसे राहत की बात यह है कि दोनों पर ब्याज दर बराबर मिलती है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए यह दर 8.25% तय की गई है, जो ज्यादातर बैंक FD से बेहतर है। यानी अगर आप VPF में एक्स्ट्रा पैसा डालते हैं, तो आपको EPF जितना ही रिटर्न मिलेगा — सिर्फ रकम ज्यादा जमा होगी।

EPF vs VPF: टैक्स छूट कैसे मिलती है

दोनों में इनकम टैक्स की धारा 80C के तहत सालाना ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट मिलती है। VPF को ‘EEE’ यानी Exempt-Exempt-Exempt कैटेगरी में रखा गया है — मतलब कॉन्ट्रिब्यूशन, ब्याज और मैच्योरिटी तीनों टैक्स-फ्री होते हैं, बशर्ते खाता 5 साल पूरे कर चुका हो। ध्यान देने वाली बात यह है कि EPF vs VPF दोनों में मिलाकर अगर आपका कुल कर्मचारी योगदान ₹2.5 लाख प्रति वर्ष से ज्यादा हो जाता है, तो अतिरिक्त रकम पर मिलने वाला ब्याज टैक्सेबल हो जाता है। यह लिमिट सिर्फ उन खातों के लिए ₹5 लाख है, जहां एम्प्लॉयर का कोई योगदान नहीं है (जैसे GPF)।

EPF vs VPF: कौन सा चुनें?

अगर आपकी बेसिक सैलरी सालाना ₹20-21 लाख से कम है, तो EPF vs VPF की बहस में VPF एक स्मार्ट चॉइस बन जाता है, क्योंकि आपको बिना एक्स्ट्रा रिस्क के गारंटीड 8.25% रिटर्न मिलता रहेगा। लेकिन अगर आपकी सैलरी इस सीमा से ज्यादा है, तो VPF में ज्यादा पैसा डालने से पहले ₹2.5 लाख की टैक्स-फ्री लिमिट का हिसाब जरूर लगाएं, वरना एक्स्ट्रा ब्याज पर टैक्स कटेगा।

एक बार VPF शुरू करने पर इसे 5 साल पूरे होने से पहले बंद नहीं किया जा सकता, इसलिए यह फैसला सोच-समझकर लें। अगर आप रिटायरमेंट प्लानिंग के साथ-साथ दूसरे निवेश विकल्प भी एक्सप्लोर करना चाहते हैं, तो हमारा Passive Income Ideas पर आर्टिकल जरूर पढ़ें, जिसमें SIP और REITs जैसे विकल्प भी बताए गए हैं। शुरुआती निवेशकों के लिए Stock Market for Beginners Guide भी एक अच्छा स्टार्टिंग पॉइंट हो सकता है।

EPF Scheme 2026 में क्या बदला?

29 जून 2026 से लागू हुई नई EPF Scheme, 2026 ने पुरानी 1952 वाली स्कीम की जगह ली है। लेकिन राहत की बात यह है कि EPF vs VPF से जुड़े कॉन्ट्रिब्यूशन, ब्याज या विड्रॉल के नियमों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

Business Today की रिपोर्ट के मुताबिक, यह अपडेट सिर्फ डिजिटल एडमिनिस्ट्रेशन और गवर्नेंस को मजबूत करने के लिए है, VPF की सुविधा पहले जैसी ही जारी रहेगी।

FAQs

1. EPF vs VPF में ब्याज दर अलग-अलग है क्या?
नहीं, दोनों पर एक जैसी ब्याज दर मिलती है — वित्त वर्ष 2025-26 के लिए यह 8.25% है।

2. VPF में कितना पैसा डाला जा सकता है?
अपनी बेसिक सैलरी + DA का 100% तक VPF में डाला जा सकता है, इसकी कोई ऊपरी सीमा नहीं है।

3. क्या VPF से पैसा बीच में निकाला जा सकता है?
VPF खाता एक बार शुरू करने पर 5 साल पूरे होने से पहले बंद नहीं किया जा सकता, हालांकि कुछ खास परिस्थितियों में आंशिक निकासी की अनुमति है।

4. EPF vs VPF में टैक्स छूट की लिमिट क्या है?
दोनों मिलाकर धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की छूट मिलती है, जबकि ब्याज पर टैक्स छूट ₹2.5 लाख के कुल योगदान तक ही सीमित है।

5. क्या कंपनी VPF में भी योगदान देती है?
नहीं, VPF पूरी तरह से कर्मचारी का स्वैच्छिक योगदान है, इसमें एम्प्लॉयर का कोई मैचिंग कॉन्ट्रिब्यूशन नहीं होता।

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उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है। निवेश से जुड़े फैसले लेने से पहले किसी सर्टिफाइड फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें।

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Abhishek Semwal is Postgraduate in Mass Communication with over three years of experience across digital and print media. Covering a wide range of subjects, with a strong focus on local and regional issues, delivering clear, insightful and engaging content.
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