VB-G RAM G: देश में ग्रामीण रोजगार और आजीविका के ढांचे में एक ऐतिहासिक बदलाव करते हुए केंद्र सरकार द्वारा बुधवार से ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) कानून, 2025‘ (VB-G RAM G) आधिकारिक तौर पर लागू कर दिया गया है।
इस नए कानून के प्रभावी होने के साथ ही पूर्ववर्ती महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) अब इतिहास का हिस्सा बन गया है। इस नए ‘वीबी-जी राम जी’ कानून के माध्यम से सरकार का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2047 तक एक सुदृढ़ और एकीकृत ग्रामीण विकास ढांचे की स्थापना करना है, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई और निश्चित दिशा प्रदान की जा सके।
रोजगार के दिनों में वृद्धि और पारिश्रमिक में संशोधन
VB-G RAM G के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के ऐसे परिवारों के सदस्यों को, जो अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक हैं, अब एक वित्तीय वर्ष में 100 दिनों के स्थान पर न्यूनतम 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी प्रदान की जाएगी। रोजगार की अवधि में इस वृद्धि के साथ-साथ पारिश्रमिक दरों में भी देशव्यापी स्तर पर महत्वपूर्ण संशोधन किया गया है।
देशभर में अब औसत दैनिक मजदूरी को 298.8 रुपये से बढ़ाकर 327.4 रुपये प्रतिदिन कर दिया गया है, जो कि औसतन 28.6 रुपये प्रतिदिन की बढ़ोतरी को दर्शाता है। इस नई व्यवस्था के अंतर्गत मजदूरी का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने और विकास कार्यों को बिना किसी बाधा के संचालित रखने के लिए राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को 95,692.31 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित कर दी गई है।
आंध्र प्रदेश के तिरुपति से होगा VB-G RAM G का राष्ट्रीय शुभारंभ
VB-G RAM G का राष्ट्रीय स्तर पर औपचारिक शुभारंभ 2 जुलाई को आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले में स्थित मुक्कावरिपल्ली गांव में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के माध्यम से किया जाएगा। इस प्रारंभिक कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण श्रमिकों को नए ‘ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड’ वितरित किए जाएंगे और उन्हें इस नवीन योजना के विभिन्न तकनीकी व व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया जाएगा।
चार प्रमुख विकास क्षेत्रों पर केंद्रित रहेगा कार्य तंत्र
VB-G RAM G के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादक, टिकाऊ और बदलाव में सक्षम संपत्तियों के निर्माण के लिए मुख्य रूप से चार प्राथमिक विकास क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है, जिन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा:
- प्रथम प्राथमिकता जल सुरक्षा को दी गई है, जिसके अंतर्गत गांवों में जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण, सिंचाई सहायता, भूजल पुनर्भरण, पारंपरिक जल निकायों को पुनर्जीवित करने के कार्य और व्यापक स्तर पर वनीकरण (पौधारोपण) जैसी गतिविधियों को आगे बढ़ाया जाएगा।
- द्वितीय प्राथमिकता ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास की है। इसके तहत ग्रामीण संपर्क सड़कों, सार्वजनिक भवनों, सरकारी विद्यालयों के बुनियादी ढांचे के विकास, स्वच्छता प्रणालियों, सौर नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़े कार्यों और आवास योजनाओं के निर्माण पर विशेष जोर रहेगा।
- तृतीय प्राथमिकता ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने की है। इसके तहत रोजगार के इस ढांचे को सीधे तौर पर कृषि, मत्स्य पालन, कृषि उत्पादों के भंडारण, स्थानीय बाजारों के विकास और कौशल विकास कार्यक्रमों के साथ एकीकृत किया जा रहा है।
- चतुर्थ प्राथमिकता मौसमी आपदाओं के प्रबंधन से संबंधित है। ग्रामीण क्षेत्रों को प्राकृतिक आपदाओं के प्रति सक्षम बनाने के लिए कानून में आश्रय स्थलों के निर्माण, नदियों पर तटबंध निर्माण, बाढ़ प्रबंधन संरचनाओं, पुनर्वास कार्यों और जंगलों की आग (वनाग्नि) को बुझाने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को अनिवार्य रूप से शामिल किया गया है।
मनरेगा और VB-G RAM G में मुख्य अंतर
केंद्र सरकार के अनुसार, VB-G RAM G को मनरेगा की ढांचागत और व्यावहारिक कमियों को दूर करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। दोनों व्यवस्थाओं के बीच कुछ मौलिक अंतर निर्धारित किए गए हैं, जिन्हें समझना आवश्यक है।
| विशेषता | मनरेगा (MGNREGA) | विकसित भारत-गारंटी मिशन (VB-G RAM G) |
| गारंटीकृत रोजगार दिन | प्रत्येक ग्रामीण परिवार को प्रति वित्तीय वर्ष कम-से-कम 100 दिनों के अकुशल रोजगार की गारंटी थी। | रोजगार की वैधानिक अवधि को बढ़ाकर प्रति वित्तीय वर्ष न्यूनतम 125 दिन कर दिया गया है। |
| वित्तपोषण व्यवस्था | यह एक पूर्णतः मांग-आधारित योजना थी, जिसमें अकुशल श्रमिकों की मजदूरी का 100% खर्च केंद्र उठाता था। | इसमें सामान्य राज्यों के लिए केंद्र-राज्य व्यय अनुपात 60:40 निर्धारित किया गया है। |
| कृषि विराम का नियम | यह योजना बिना किसी क्षेत्रीय रोक के पूरे वर्ष निरंतर संचालित की जाती थी। | राज्य सरकारें बुवाई और कटाई के व्यस्त मौसम में अधिकतम 60 दिनों तक कार्यों पर अस्थायी रोक लगा सकती हैं। |
| परिसंपत्ति निर्माण | यह मुख्य रूप से सामान्य ग्रामीण श्रम और बिखरे हुए बुनियादी विकास कार्यों पर केंद्रित था। | यह स्पष्ट रूप से चार चिन्हित राष्ट्रीय क्षेत्रों—जल, कृषि, आपदा प्रबंधन और संपर्क पर आधारित है। |
| बजट का आवंटन | इसमें राज्यों की मांग के अनुसार समय-समय पर अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध कराई जाती थी। | यह एक आपूर्ति-आधारित व्यवस्था है, जिसमें राज्यों के लिए एक निश्चित और सीमित वार्षिक बजट निर्धारित होता है। |
वित्तीय मॉडल्स और व्यय का निर्धारण
व्यय के वित्तीय मॉडल के अनुसार, सामान्य राज्यों में VB-G RAM G योजना के संचालन का 60 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार द्वारा और 40 प्रतिशत खर्च संबंधित राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर सहित सभी पूर्वोत्तर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए विशेष प्रावधान किया गया है, जिसके तहत इन क्षेत्रों में कुल खर्च का 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार उठाएगी और केवल 10 प्रतिशत हिस्सा राज्यों को देना होगा।
केंद्र शासित प्रदेशों के मामले में पूरा शत्-प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी। यदि किसी परिस्थिति में तय योजनाओं से अतिरिक्त खर्च की आवश्यकता होती है, तो उसे राज्य सरकारों को स्वयं के स्तर से वहन करना होगा। इसके साथ ही, वित्तीय संसाधनों के न्यायसंगत वितरण के लिए ‘नॉर्मेटिव आवंटन’ (Normative Allocation) की व्यवस्था लागू की गई है।

ई-केवाईसी और ग्राम पंचायतों की भूमिका
मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिन ग्रामीण श्रमिकों के पुराने जॉब कार्ड का ई-केवाईसी (e-KYC) सत्यापन पूर्ण हो चुका है, वे नया रोजगार गारंटी कार्ड प्राप्त होने तक अपने पुराने कार्ड के माध्यम से ही काम प्राप्त कर सकेंगे। नई व्यवस्था में भी स्थानीय ग्राम पंचायतें ही अपने क्षेत्रों में कार्यों को तय करने और उनकी निगरानी करने का दायित्व निभाएंगी।
हालांकि, अब इन विकास कार्यों को ‘विकसित ग्राम पंचायत योजना’ के तहत एक एकीकृत ढांचे में तैयार किया जाएगा। इन योजनाओं को तैयार करने के लिए जीपीएस (GPS) जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग अनिवार्य किया गया है और इसे केंद्र सरकार के ‘पीएम गति-शक्ति’ नेशनल मास्टर प्लान के साथ जोड़ा जाएगा, ताकि कार्यों के दोहराव को रोका जा सके और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ समन्वय स्थापित हो।
आधुनिक गवर्नेंस इकोसिस्टम और सोशल ऑडिट
VB-G RAM G में पूर्ण पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार की संभावनाओं को समाप्त करने के लिए एक कड़ा गवर्नेंस इकोसिस्टम अनिवार्य किया गया है। इसके अंतर्गत सभी पंजीकृत मजदूरों का बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन (Biometric Verification), जीपीएस आधारित कार्य आयोजना और निगरानी, मोबाइल-आधारित ग्राउंड रिपोर्टिंग, रियल-टाइम डैशबोर्ड व्यवस्था, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सक्षम डेटा विश्लेषण और एक मजबूत सोशल ऑडिट तंत्र शामिल किया गया है।
कानून के प्रावधानों के अनुसार, किए गए कार्यों की साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट स्वचालित रूप से डिजिटल और भौतिक दोनों माध्यमों से सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी। वर्तमान में देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने इस नए कानून के अनुरूप अपने बजट का प्रावधान कर लिया है, जबकि 24 राज्यों ने अपनी आधिकारिक राज्य-स्तरीय नियमावली और योजनाएं भी जारी कर दी हैं।
डिस्क्लेमर: ऊपर दी गई VB-G RAM G से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया, गूगल और विभिन्न वेबसाइट्स/न्यूज़ मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है।
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