Chardham Yatra 2026: चारधाम यात्रा 2026 ने इस बार श्रद्धालुओं की संख्या के मामले में एक नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। यात्रा के पहले 44 दिनों में कुल 29.85 लाख तीर्थयात्री चारों धामों के दर्शन कर चुके हैं, जो पिछले साल की इसी अवधि में आए 26.34 लाख श्रद्धालुओं से तीन लाख से भी अधिक है। यह आंकड़ा बताता है कि इस बार यात्रा (Chardham Yatra 2026) ने हर पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है और श्रद्धालुओं का उत्साह अभी भी बरकरार है।
Chardham Yatra 2026: यात्रा की शुरुआत कब और कैसे हुई
इस साल अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। इसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम के कपाट खुले। कपाट खुलने के पहले दिन से ही तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और तब से यह सिलसिला थमा नहीं है। केदारनाथ धाम इस बार सबसे अधिक श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है।
पंजीकरण में भी रिकॉर्ड
यात्रा (Chardham Yatra 2026) के लिए पंजीकरण की बात करें तो अब तक 40 लाख से अधिक श्रद्धालु रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। केदारनाथ में सर्वाधिक पंजीकरण हुए हैं। देश के कोने-कोने से और यहां तक कि विदेशों से भी भक्त इन पवित्र धामों में दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। स्थानीय होटल पूरी तरह बुक हैं, टैक्सी चालक, व्यापारी और होमस्टे संचालक इस भरपूर सीजन का लाभ उठा रहे हैं।
Chardham Yatra 2026: मुख्यमंत्री धामी ने की समीक्षा बैठक
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सचिवालय में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की जिसमें यात्रा की मौजूदा व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। उन्होंने माना कि यात्रा का पहला चरण काफी हद तक सफल रहा, लेकिन श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ के कारण कुछ जगहों पर व्यवस्थाओं पर दबाव पड़ा और यात्रियों को परेशानियों का सामना भी करना पड़ा।
मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि हर तीर्थयात्री की सुरक्षा और सुविधा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और यह आगे भी बनी रहेगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि यात्रा के शेष दिनों में किसी भी श्रद्धालु को अनावश्यक परेशानी न हो, खासकर तब जब मानसून का मौसम दरवाजे पर दस्तक दे रहा है।

Chardham Yatra 2026: रात्रि यातायात बंद, नई एसओपी लागू होगी
समीक्षा बैठक में सबसे अहम फैसला सड़क सुरक्षा को लेकर लिया गया। मुख्यमंत्री ने सभी यात्रा मार्गों पर रात 10 बजे से सुबह 4 बजे तक वाहनों की आवाजाही पर पाबंदी को सख्ती से लागू करने के आदेश दिए। साथ ही, चारों धामों की क्षमता के आधार पर भीड़ प्रबंधन के लिए एक व्यापक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तुरंत तैयार करने के निर्देश दिए।
आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति करने वाले भारी वाहनों और ट्रकों को केवल रात में चलने की अनुमति होगी, जबकि दिन के समय उनकी आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी ताकि सड़क पर तीर्थयात्रियों के लिए जगह बनी रहे और जाम न लगे।
होल्डिंग जोन और भीड़ नियंत्रण
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने होल्डिंग जोन और चेकपॉइंट की व्यवस्था को और मजबूत करने का फैसला किया है। जब किसी धाम की क्षमता पूरी हो जाए तो आगे के रास्ते पर बने होल्डिंग क्षेत्रों और चेकपॉइंट पर श्रद्धालुओं और वाहनों की आवाजाही को चरणबद्ध तरीके से नियंत्रित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि इन होल्डिंग क्षेत्रों में पर्याप्त पार्किंग, भोजन, पेयजल, शौचालय और बुनियादी सुविधाएं जरूर उपलब्ध हैं।
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यात्रियों को मिलती रहे जानकारी
बैठक में एक और जरूरी मुद्दा उठाया गया और वह था श्रद्धालुओं तक सही और समय पर जानकारी पहुंचाना। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि जब भी कोई देरी हो, श्रद्धालुओं को इसकी वजह, अनुमानित प्रतीक्षा समय और आगे की व्यवस्था के बारे में नियमित रूप से बताया जाए। उन्होंने आदेश दिया कि रास्ते बंद होने, मौसम की जानकारी, ट्रैफिक जाम और दर्शन में देरी जैसी सूचनाएं लगातार पब्लिक अड्रेस सिस्टम, एलईडी स्क्रीन और सोशल मीडिया के जरिए प्रसारित की जाएं। पुलिस और प्रशासन के कर्मचारियों को तीर्थयात्रियों के साथ विनम्र और सहयोगी रवैया अपनाने की हिदायत भी दी गई।
मानसून से निपटने की तैयारी
मानसून की दस्तक के साथ ही सरकार ने आपदा प्रबंधन को लेकर भी कमर कस ली है। मुख्यमंत्री ने आने वाले हफ्तों में यात्रा प्रबंधन के लिए अत्यंत सतर्क और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया और भूस्खलन संभावित संवेदनशील स्थानों पर जेसीबी, पोकलेन मशीनें, सैटेलाइट फोन, एम्बुलेंस और बचाव उपकरण पहले से तैनात करने के आदेश दिए। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस और जिला प्रशासन की समन्वित तैनाती के साथ यात्रा मार्गों (Chardham Yatra 2026) की चौबीसों घंटे निगरानी भी सुनिश्चित की जाएगी।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिला बड़ा बूस्ट
धार्मिक महत्व के साथ-साथ इस बार की यात्रा (Chardham Yatra 2026) ने उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को भी जबरदस्त रफ्तार दी है। प्रदेश भर के होटल पूरी तरह भरे हुए हैं, टैक्सी चालक, व्यापारी और होमस्टे संचालक सालों बाद इतना अच्छा कारोबार देख रहे हैं। मुख्यमंत्री धामी ने भी कहा कि चारधाम यात्रा सिर्फ आस्था की यात्रा नहीं है, बल्कि यह पहाड़ में रहने वाले हजारों परिवारों की रोजी-रोटी का आधार भी है।
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