INDIAN NAVY को बीते 30 अप्रैल 2026 को मुंबई स्थित मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDSL) में नीलगिरी श्रेणी के प्रोजेक्ट 17ए का छठा जहाज ‘महेंद्रगिरी’ (यार्ड 12654) मिल गया है। ये इस श्रेणी का चौथा जहाज है जो MDSL में तैयार हुआ।
17 महीने के भीतर छठे जहाज की डिलीवरी पूरी
INDIAN NAVY को महेंद्रगिरी का मिलना इसलिए भी खास है क्योंकि प्रोजेक्ट 17ए के पहले जहाज ‘नीलगिरी’ को 20 दिसंबर 2024 को MDSL ने नौसेना को सौंपा था। इसके बाद सिर्फ 17 महीने से भी कम समय में छठा जहाज महेंद्रगिरी भी तैयार करके नौसेना को दे दिया गया।
इस जहाज का निर्माण और डिलीवरी तय समयसीमा के अंदर ही की गई, जिसमें एकीकृत निर्माण के सिद्धांत का पूरी तरह पालन किया गया।
क्या है INDIAN NAVY का प्रोजेक्ट 17ए
प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए गए फ्रिगेट ऐसे आधुनिक और बहुउद्देश्यीय युद्धपोत हैं, जिन्हें समुद्र में मौजूदा और आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए खास तौर पर तैयार किया गया है। ये अत्याधुनिक जहाज नौसेना के डिजाइन, स्टील्थ तकनीक, मारक क्षमता, ऑटोमेशन और मुश्किल हालात में टिके रहने की क्षमता के मामले में नई ऊंचाई दिखाते हैं।

जानिए क्या है इसकी खासियत?
पी17ए श्रेणी के जहाजों में पुराने पी17 यानी शिवालिक क्लास की तुलना में ज्यादा उन्नत हथियार और सेंसर लगाए गए हैं। इनमें CODOG (कंबाइंड डीजल या गैस) सिस्टम आधारित प्रणोदन संयंत्र है, जिसमें एक डीजल इंजन और एक गैस टरबाइन शामिल होती है।
ये दोनों मिलकर हर शाफ्ट पर कंट्रोल करने योग्य पिच प्रोपेलर और आधुनिक इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम को संचालित करते हैं। इन जहाजों में सतह, हवा और पनडुब्बियों से मुकाबला करने वाली अत्याधुनिक युद्ध प्रणालियां भी मौजूद हैं।
स्वदेशी डिजाइन
इन युद्धपोतों का डिजाइन वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो (WDB) ने तैयार किया है, जबकि युद्धपोत निरीक्षण टीम (मुंबई) ने इसकी निगरानी की है। यह परियोजना देश में स्वदेशी डिजाइन, स्टील्थ तकनीक, मजबूती और युद्ध क्षमता के क्षेत्र में एक बड़ी छलांग मानी जा रही है।
इस प्रोजेक्ट में करीब 75 प्रतिशत काम देश के भीतर ही किया गया है और MDSL के साथ 200 से ज्यादा छोटे और मध्यम उद्योग जुड़े हुए हैं। इसके जरिए सीधे तौर पर लगभग 4,000 और अप्रत्यक्ष रूप से 10,000 से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है।
INDIAN NAVY की ताकत में इजाफा
इससे पहले 3 अप्रैल 2026 को विशाखापट्टनम में INS TARAGIRI भी INDIAN NAVY में कमीशन हुआ था। बता हें कि 6,670 टन वजनी INS TARAGIRI प्रोजेक्ट 17A क्लास का चौथा शक्तिशाली प्लेटफॉर्म है। मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा निर्मित यह जहाज भारतीय इंजीनियरिंग कौशल का प्रतीक है।
इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसमें इस्तेमाल की गई 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री है। इस परियोजना ने देश के 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को सहयोग दिया है, जिससे हजारों भारतीयों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं।
INS TARAGIRI का रडार क्रॉस-सेक्शन काफी कम है, जिससे यह दुश्मन के रडार की नजरों से बचकर घातक प्रहार करने में सक्षम है। ये विश्व स्तरीय हथियारों से लैस है, जिसमें सुपरसोनिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और एक विशेष एंटी-सबमरीन वारफेयर सूट शामिल है।

साथ ही ये ‘कंबाइंड डीजल या गैस’ (CODOG) प्रणोदन प्रणाली द्वारा संचालित है, जो इसे उच्च गति और लंबी दूरी तक कार्य करने की क्षमता प्रदान करती है। INDIAN NAVY के अत्याधुनिक ‘कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम’ के जरिए इसके सभी हथियारों और सेंसर को एकीकृत किया गया है, जिससे चालक दल पलक झपकते ही खतरों का जवाब दे सकता है।
INDIAN NAVY के लिए INS TARAGIRI केवल एक ‘समुद्री शिकारी’ नहीं है, बल्कि इसे आधुनिक कूटनीति और मानवीय संकटों के लिए भी तैयार किया गया है। INS TARAGIRI उच्च तीव्रता वाले युद्ध से लेकर ‘मानवीय सहायता और आपदा राहत’ (HADR) अभियानों तक, हर मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम देने में सक्षम है।
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