DEHRADUN RELIGIOUS CONVERSION: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के पॉश इलाके वसंत विहार से एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां जबरन और लालच देकर धर्म बदलवाने की कोशिश की बात सामने आ रही है। फिलहाल पुलिस ने दोनों महिलाओं को हिरासत में ले लिया है और उनके खिलाफ उत्तराखंड के सख्त धर्मांतरण कानून के तहत केस दर्ज कर लिया गया है।
बताया जा रहा है कि वसंत विहार थाना क्षेत्र के इंदिरा नगर और कांवली गांव में दो महिलाएं घर-घर जाकर कथित तौर पर ईसाई धर्म का प्रचार कर रही थीं और हिंदू महिलाओं को धर्म परिवर्तन के लिए अलग-अलग तरह के आर्थिक फायदे का लालच दे रही थीं।
DEHRADUN RELIGIOUS CONVERSION का पूरा मामला
जानकारी के मुताबिक यह पूरा मामला गुरुवार का है। गीता पुरी (निवासी बनियावाला) और सुनीता राज (निवासी कांवली) नाम की दो महिलाएं इंदिरा नगर और कांवली माड़ी इलाके में लगातार घूम रही थीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ये महिलाएं पिछले 5-6 दिनों से इलाके में सक्रिय थीं और घर-घर जाकर हिंदू महिलाओं को ईसाई धर्म अपनाने के लिए समझा रही थीं।
आरोप है कि वे नौकरी दिलाने, बच्चों की मुफ्त पढ़ाई और दूसरी आर्थिक मदद का लालच भी दे रही थीं। उनके पास से एक ऐसा कार्ड भी मिला, जिस पर क्यूआर कोड बना था। इसे स्कैन करने पर ईसाई धर्म से जुड़ा ऑनलाइन पोर्टल और सामग्री खुल रही थी।

पुलिस की कार्यवाई
इलाके में जब लोगों को इन गतिविधियों पर शक हुआ तो वीर सावरकर संगठन के अध्यक्ष कुलदीप स्वादिया अपने साथियों के साथ मौके पर पहुंच गए। जैसे ही महिलाओं ने कार्यकर्ताओं को देखा, वे स्कूटी से वहां से निकलने की कोशिश करने लगीं।
इसके बाद कार्यकर्ताओं ने उनका पीछा किया और इस पूरी घटना का वीडियो भी रिकॉर्ड कर लिया। तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम 112 पर सूचना दी गई, जिसके बाद पुलिस हरकत में आई और विकास मॉल के पास से दोनों महिलाओं को पकड़कर थाने ले आई।
उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता अधिनियम के तहत मुकदमा
पुलिस के मुताबिक वीर सावरकर संगठन के अध्यक्ष कुलदीप स्वादिया की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया है। वसंत विहार थाना प्रभारी शैंकी कुमार ने बताया कि दोनों महिलाओं के खिलाफ उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2018 की धारा 3/5 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 और 62 के तहत केस दर्ज किया गया है।
DEHRADUN RELIGIOUS CONVERSION की जांच उप-निरीक्षक विनय प्रसाद भट्ट को सौंपी गई है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि कहीं इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क तो काम नहीं कर रहा।
जानिए उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता अधिनियम के बारे में
DEHRADUN RELIGIOUS CONVERSION मामले में उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता अधिनियम के तहत मुकदमा हुआ है। बता दें कि उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2018 (The Uttarakhand Freedom of Religion Act, 2018) का मकसद लोगों को धर्म की आज़ादी देना है।
साथ ही ये सुनिश्चित करता है कि कोई भी व्यक्ति धोखे, दबाव, जबरदस्ती, लालच या किसी गलत तरीके से किसी का धर्म परिवर्तन न करा सके। इस कानून के तहत शादी के जरिए धर्म बदलवाने के मामलों को भी शामिल किया गया है। यह कानून पूरे उत्तराखंड राज्य में लागू होता है।

इस अधिनियम में धर्म परिवर्तन का मतलब साफ तौर पर बताया गया है कि जब कोई व्यक्ति अपना मौजूदा धर्म छोड़कर किसी दूसरे धर्म को अपनाता है, तो उसे धर्मांतरण माना जाएगा। कानून यह भी कहता है कि कोई भी व्यक्ति सीधे या परोक्ष रूप से किसी को गलत जानकारी देकर, दबाव डालकर, बहकाकर या किसी तरह का लालच देकर धर्म परिवर्तन नहीं करा सकता।
सजा के प्रावधानों की बात करें तो मूल 2018 कानून के तहत नियमों का उल्लंघन करने पर 1 साल से 5 साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान रखा गया था। वहीं अगर पीड़ित नाबालिग, महिला या अनुसूचित जाति/जनजाति से जुड़ा हो, तो सजा बढ़ाकर 2 से 7 साल तक हो सकती थी।
डिस्क्लेमर: ऊपर दी गई DEHRADUN RELIGIOUS CONVERSION से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया, गूगल और विभिन्न वेबसाइट्स/न्यूज़ मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है।
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