UTTARAKHAND ASSEMBLY SPECIAL SESSION: उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र में महिला सशक्तिकरण और नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर चर्चा हो रही है। इस दौरान सदन के अंदर और बाहर जबरदस्त राजनीतिक हलचल देखने को मिल रही है।
एक तरफ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्र और राज्य सरकार की महिला केंद्रित योजनाओं का विस्तृत ब्यौरा पेश करते हुए विपक्ष पर विकास कार्यों में रुकावट डालने का आरोप लगाया, तो दूसरी तरफ विपक्ष ने महिला आरक्षण को लागू करने की समयसीमा को लेकर सरकार की नीयत और मंशा पर सवाल खड़े किए।
पूरे सत्र के दौरान विधानसभा के भीतर बहस, तकरार और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा, वहीं बाहर सड़कों पर प्रदर्शन, नारेबाजी और गिरफ्तारियों का माहौल भी बना रहा।
UTTARAKHAND ASSEMBLY SPECIAL SESSION में सीएम ने गिनाई उपलब्धियां
UTTARAKHAND ASSEMBLY SPECIAL SESSION को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वर्ष 2014 से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नारी सशक्तिकरण को सरकार की सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से मजबूत बनाने के लिए लगातार योजनाएं चलाई जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पिछले 11 वर्षों में जेंडर बजट में पांच गुना से भी अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में महिलाओं और बालिकाओं के कल्याण के लिए पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 12 प्रतिशत ज्यादा, 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने इसे महिलाओं के उत्थान और सम्मान के प्रति सरकार की मजबूत और अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया।
सामाजिक संकेतकों में सुधार और वित्तीय समावेशन
मुख्यमंत्री ने UTTARAKHAND ASSEMBLY SPECIAL SESSION में कहा कि “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान का असर अब साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। पिछले 11 वर्षों में देश के लिंगानुपात में 12 अंकों का सुधार हुआ है, जो एक सकारात्मक संकेत है। शिक्षा के क्षेत्र में भी बदलाव देखने को मिले हैं और माध्यमिक स्तर पर बालिकाओं के नामांकन अनुपात में 3 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।

स्वास्थ्य सेवाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि संस्थागत प्रसव का आंकड़ा पहले 61 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 97 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। वित्तीय सुरक्षा के मोर्चे पर मुख्यमंत्री ने “सुकन्या समृद्धि योजना” की सफलता का उदाहरण देते हुए बताया कि 8.2 प्रतिशत ब्याज दर वाली इस योजना के तहत अब तक 4 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं, जिनमें 3.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा की जा चुकी है।
राज्य सरकार के प्रयास और महिला आरक्षण की स्थिति
UTTARAKHAND ASSEMBLY SPECIAL SESSION में उत्तराखंड सरकार की योजनाओं और प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष राज्य के जेंडर बजट में 20 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले साल की तुलना में 16 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने बताया कि राज्य में महिलाओं के लिए सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत और सहकारी समितियों में 33 प्रतिशत आरक्षण पहले से लागू किया जा चुका है।
मुख्यमंत्री ने UTTARAKHAND ASSEMBLY SPECIAL SESSION में कहा कि लखपति दीदी योजना के माध्यम से प्रदेश की 2 लाख 65 हजार से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बन चुकी हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं। इसके अलावा लोहाघाट में 256 करोड़ रुपये की लागत से राज्य का पहला महिला स्पोर्ट्स कॉलेज भी बनाया जा रहा है।
विपक्ष का कड़ा विरोध और आरक्षण पर सवाल
UTTARAKHAND ASSEMBLY SPECIAL SESSION में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सरकार के दावों पर तीखी प्रतिक्रिया दी और महिला आरक्षण की समयसीमा को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महिलाओं को आरक्षण देने के नाम पर आठ साल का लंबा इंतजार करवा रही है और यह कानून पूरी तरह से 2034 तक ही प्रभावी हो पाएगा।
यशपाल आर्य ने मांग की कि महिला आरक्षण को तुरंत लागू किया जाए और आगामी उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिया जाए। उन्होंने कहा कि पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण देने का असली काम कांग्रेस सरकार ने किया था। उन्होंने वर्तमान संशोधन अधिनियम को आधी आबादी के साथ धोखा बताते हुए इसे भाजपा की राजनीतिक जमीन बचाने की कोशिश करार दिया।

सदन के बाहर प्रदर्शन और गिरफ्तारियां
महिला आरक्षण के मुद्दे पर जहां विधानसभा के अंदर बहस तेज थी, वहीं बाहर सड़कों पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने विधानसभा कूच करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। इस दौरान ज्योति रौतेला समेत कई अन्य कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।
कांग्रेस का कहना है कि जब वर्ष 2023 में यह कानून पास हो चुका था, तो फिर सरकार जनगणना और परिसीमन के नाम पर इसे टालने का काम क्यों कर रही है। विपक्ष ने विशेष सत्र बुलाने के औचित्य पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि भाजपा केवल महिलाओं को सपने दिखाने और राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है।
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