INDIA-NEPAL BORDER: नेपाल में नई सरकार के गठन के बाद से देश में विभिन्न मोर्चों पर बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इन बदलावों का असर भारत-नेपाल सीमा पर भी पड़ रहा है, नेपाल सरकार ने सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। भारतीय सीमा से सटे कैलाली, कंचनपुर और बैतड़ी जिलों में 240 अतिरिक्त सशस्त्र जवान तैनात किए हैं।
नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कैलाली और कंचनपुर में 90-90 जवानों की अतिरिक्त तैनाती की गई है, जबकि बैतड़ी जिले में 60 जवान भेजे गए हैं। पहले जहां एक सीमा चौकी पर 12 से 15 जवान तैनात रहते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़ाकर लगभग 30 कर दी गई है। यानी बॉर्डर चौकियों पर निगरानी का दायरा लगभग दोगुना हो गया है।
INDIA-NEPAL BORDER पर गृह मंत्री और पुलिस प्रमुख के निर्देश पर कार्रवाई
नेपाल के गृह मंत्री सुधन गुरंग ने सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा मजबूत करने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। उनके निर्देश के बाद सशस्त्र पुलिस बल के प्रमुख राजू अर्याल ने कैलाली बॉर्डर पर कड़ी निगरानी रखने के आदेश जारी किए। बैतड़ी जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी और 51 गुल्म कंपनी के डीएसपी जंग बहादुर कुंवर ने बताया कि सीमा पर लगातार तस्करी के मामले सामने आने के कारण अतिरिक्त जवानों की मांग की गई थी और अब उनकी तैनाती से अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने की पुरजोर कोशिश की जा रही है।
उत्तराखंड से सीधे जुड़े हैं ये जिले
भौगोलिक दृष्टि से नेपाल के बैतड़ी और दार्चुला जिले उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से लगे हुए हैं और दोनों के बीच काली नदी सीमा रेखा का काम करती है। कंचनपुर जिला उत्तराखंड के चंपावत और उधमसिंह नगर जिलों से जुड़ा है। नेपाल के सुदूर पश्चिमी क्षेत्र में कुल नौ जिले आते हैं अछाम, बैतड़ी, बझांग, बाजुरा, डडेलधुरा, दार्चुला, डोटी, कैलाली और कंचनपुर।
खुली सीमा बनती रही है तस्करों का रास्ता
INDIA-NEPAL BORDER लंबे अरसे से मानव तस्करी और अवैध सामान की आवाजाही के लिहाज से संवेदनशील मानी जाती रही है। इस सीमावर्ती पट्टी में महिलाओं और बच्चों की तस्करी के मामलों के अलावा खाद्य पदार्थ, कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स और मवेशियों की अवैध ढुलाई भी कई बार पकड़ी जा चुकी है। पहाड़ी और नदी क्षेत्रों की जटिल भौगोलिक संरचना के कारण कई स्थानों पर निगरानी करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है, और तस्कर इसी कमजोरी का फायदा उठाते आए हैं। यही कारण है कि दोनों देशों की एजेंसियां समय-समय पर संयुक्त अभियान भी चलाती रही हैं।

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भारतीय क्षेत्र में भी SSB सतर्क
नेपाल की इस सक्रियता के मद्देनजर भारतीय क्षेत्र में भी सशस्त्र सीमा बल यानी SSB पूरी तरह चौकस है। झूलाघाट, जौलजीबी और धारचूला जैसे संवेदनशील सीमावर्ती स्थानों पर SSB ने निगरानी और कड़ी कर दी है।
INDIA-NEPAL BORDER
भारत और नेपाल के बीच स्थित सीमा एक खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा के रूप में जानी जाती है, जहां दोनों देशों के नागरिकों को आवागमन के लिए विशेष छूट प्राप्त है। INDIA-NEPAL BORDER की कुल लंबाई लगभग 1,751 किलोमीटर (करीब 1,088 मील) है, जो हिमालय के पर्वतीय क्षेत्रों से लेकर उपजाऊ सिंधु-गंगा के मैदानों तक फैली हुई है। इस सीमा का निर्धारण ब्रिटिश काल में वर्ष 1816 में हुई सुगौली संधि के तहत किया गया था। भारत की स्वतंत्रता के बाद 1947 में भी यही सीमा दोनों देशों के बीच यथावत बनी रही।

INDIA-NEPAL BORDER पर कई महत्वपूर्ण प्रवेश बिंदु मौजूद हैं, जो दोनों देशों के बीच व्यापार, आवागमन और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत बनाते हैं। प्रवेश द्वारों में उत्तराखंड के चंपावत जिले और नेपाल के कंचनपुर जिले के बीच स्थित बनबासा प्रमुख है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले और नेपाल के बांके जिले के नेपालगंज को जोड़ने वाला रुपईडीहा भी अहम मार्ग है। इन सभी सीमाई मार्गों के माध्यम से न केवल व्यापारिक गतिविधियां संचालित होती हैं, बल्कि भारत और नेपाल के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध भी लगातार सुदृढ़ होते रहते हैं।
भारत नेपाल संधि
भारत और नेपाल के बीच रिश्तों को औपचारिक रूप देने के लिए 31 जुलाई 1950 को काठमांडू में एक अहम समझौता हुआ, जिसे भारत-नेपाल शांति और मैत्री संधि के नाम से जाना जाता है। इस अंतरराष्ट्रीय समझौते के जरिए दोनों देशों के आपसी संबंधों की रूपरेखा तय की गई। इस संधि की सबसे खास बात यह है कि इसके तहत भारत और INDIA-NEPAL BORDER आम नागरिकों के लिए खुली रखी गई है। दोनों देशों के लोग बिना किसी विशेष पाबंदी के एक-दूसरे के यहां आ-जा सकते हैं, रह सकते हैं और रोजगार भी कर सकते हैं।
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