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NOIDA GARMENT WORKERS PROTEST: होजरी कॉम्प्लेक्स में हजारों श्रमिकों का प्रदर्शन, पुलिस के साथ झड़प

NOIDA GARMENT WORKERS PROTEST: देश के प्रसिद्ध औद्योगिक केंद्र नोएडा में पिछले तीन दिनों से तनाव का माहौल बना हुआ है। फेज-2 स्थित होजरी कॉम्प्लेक्स की करीब 10 गारमेंट एक्सपोर्ट कंपनियों के हजारों कर्मचारी सड़कों पर उतर आए हैं। महंगाई और कम इन्क्रीमेंट के खिलाफ शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन शुक्रवार को हिंसक रूप लेने लगा था, जिसके बाद प्रशासन को भारी पुलिस बल और PAC की तैनाती करनी पड़ी।

NOIDA GARMENT WORKERS PROTEST का क्या है कारण?

मजदूरों की नाराजगी की मुख्य वजह इस साल हुआ मामूली इंक्रीमेंट (वेतन वृद्धि) है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कंपनियों ने इस बार उनके वेतन में महज 250 से 350 रुपये की बढ़ोतरी की है। मजदूरों का कहना है कि आज के दौर में एक दिहाड़ी मजदूर (पुताई या निर्माण कार्य करने वाला) भी 700 रुपये रोजाना कमाता है, जबकि बड़ी एक्सपोर्ट कंपनियों में दिन-रात काम करने वालों को न्यूनतम वेतन के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है।

NOIDA GARMENT WORKERS PROTEST में हजारों श्रमिकों की मुख्य मांगें 

नोएडा के श्रमिक अब हरियाणा (मानेसर-गुरुग्राम) की तर्ज पर न्यूनतम वेतन की मांग कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

  • Unskilled: ₹15,220 प्रति माह।
  • Semi-skilled: ₹16,781 प्रति माह।
  • Skilled: ₹18,501 प्रति माह।
  • Highly Skilled: ₹19,426 प्रति माह।

श्रमिकों का कहना है कि गैस सिलेंडर, कमरे का किराया और दैनिक वस्तुओं की कीमतों में भारी उछाल के कारण मौजूदा वेतन में परिवार पालना असंभव हो गया है।

NOIDA GARMENT WORKERS PROTEST
NOIDA GARMENT WORKERS PROTEST

प्रशासनिक कार्रवाई और पुलिस के साथ झड़प

शुक्रवार को प्रदर्शनकारी मजदूरों ने NSEZ से सूरजपुर जाने वाले मुख्य मार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया। स्थिति को संभालने के लिए RRF और PAC की टीमों को मौके पर उतारा गया। इसके साथ ही लेबर कमिश्नर और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने मजदूरों के साथ वार्ता की। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और मजदूरों के बीच हल्की झड़प भी हुई, जिसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग कर सड़क को खुलवाया। (NOIDA GARMENT WORKERS PROTEST)

NOIDA GARMENT WORKERS PROTEST मानेसर हिंसा का साया

NOIDA GARMENT WORKERS PROTEST गुरुग्राम के मानेसर में हुई हिंसा के ठीक एक दिन बाद शुरू हुआ है। गुरुवार को मानेसर में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन में पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा था। वहां भड़के श्रमिकों ने पुलिस की बाइक फूंक दी थी, जिसमें 50 से अधिक श्रमिक और 20 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। नोएडा पुलिस अब इसी तरह की हिंसा को रोकने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरत रही है।

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जानिए भारत में न्यूनतम मासिक वेतन के बारे में 

भारत में न्यूनतम मासिक वेतन एक तय आंकड़ा नहीं होता, बल्कि यह कई बातों पर निर्भर करता है जैसे वह किस राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में काम कर रहा है, उसका काम किस क्षेत्र से जुड़ा है और उसका कौशल स्तर क्या है (Unskilled, Semi-skilled, Skilled या Highly Skilled)। हर राज्य अपने हिसाब से न्यूनतम मजदूरी तय करता है, इसलिए शहर, कस्बे और ग्रामीण इलाकों में भी इसमें अंतर देखने को मिलता है।

केंद्र सरकार द्वारा तय मानकों के अनुसार अलग-अलग श्रेणियों के श्रमिकों के लिए न्यूनतम मासिक वेतन इस प्रकार निर्धारित किया गया है Unskilled श्रमिकों के लिए करीब 20,358 रुपये, Semi-skilled के लिए लगभग 22,568 रुपये, Skilled श्रमिकों के लिए 24,804 रुपये और Highly Skilled श्रमिकों के लिए करीब 26,910 रुपये प्रति माह। (NOIDA GARMENT WORKERS PROTEST)

Skilled श्रमिकों के संदर्भ में केंद्र सरकार ने न्यूनतम मजदूरी लगभग 24,804 रुपये प्रति माह (या करीब 954 रुपये प्रतिदिन) तय की है। हालांकि यह दर राज्य, काम के प्रकार और स्थान के अनुसार बदल सकती है। इस श्रेणी के कर्मचारी ऐसे काम करते हैं जिनमें उन्हें कम मार्गदर्शन की जरूरत होती है और उनसे बेहतर गुणवत्ता के साथ काम पूरा करने की अपेक्षा की जाती है। (NOIDA GARMENT WORKERS PROTEST)

NOIDA GARMENT WORKERS PROTEST

वहीं unskilled श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी करीब 20,358 रुपये प्रति माह (या लगभग 783 रुपये प्रतिदिन) निर्धारित है। इन श्रमिकों से सामान्य और बुनियादी कार्य कराए जाते हैं, जिनके लिए पहले से विशेष अनुभव की जरूरत नहीं होती। काम शुरू करने से पहले इन्हें केवल बुनियादी प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि वे इस्तेमाल होने वाले उपकरणों और मशीनों को समझ सकें।

सैलरी की आमतौर पर 26 कार्यदिवसों के आधार पर की जाती है, जो छह दिन के कार्य सप्ताह को ध्यान में रखकर तय किया गया है, हालांकि कई जगह कर्मचारियों को पूरे महीने का वेतन दिया जाता है। इसमें परिवर्तनीय महंगाई भत्ता (VDA) भी शामिल होता है, जिसे समय-समय पर महंगाई के अनुसार संशोधित किया जाता है। राज्य सरकारें उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) जैसे आर्थिक संकेतकों को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम मजदूरी तय करती हैं, ताकि श्रमिकों की आय महंगाई के असर से संतुलित रह सके।

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DevbhoomiNews Desk
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Abhishek Semwal is Postgraduate in Mass Communication with over three years of experience across digital and print media. Covering a wide range of subjects, with a strong focus on local and regional issues, delivering clear, insightful and engaging content.
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