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EARTHQUAKE IN UTTARAKHAND: पौड़ी और रुद्रप्रयाग में डोली धरती, महाराष्ट्र और नागालैंड में भी झटके

EARTHQUAKE IN UTTARAKHAND: आज यानि शनिवार, 11 अप्रैल 2026 की सुबह उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में भूकंप के झटकों से अफरा-तफरी मच गई। खास तौर पर पौड़ी गढ़वाल और रुद्रप्रयाग जिलों में सुबह-सुबह धरती हिलने से लोग घबरा गए और एहतियात के तौर पर अपने घरों से बाहर निकल आए। हालांकि राहत की बात यह रही कि झटकों की तीव्रता कम होने के चलते अब तक किसी बड़े नुकसान या जनहानि की खबर सामने नहीं आई है। सिर्फ उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र और नागालैंड के कुछ हिस्सों में भी आज भूकंप के झटके महसूस किए गए।

EARTHQUAKE IN UTTARAKHAND: पौड़ी गढ़वाल में दो बार धरती कांपी

पौड़ी गढ़वाल में सुबह के समय दो बार धरती कांपी, जिससे लोगों में डर का माहौल बन गया। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के अनुसार पहला झटका (EARTHQUAKE IN UTTARAKHAND) सुबह 5 बजकर 2 मिनट पर महसूस किया गया, जिसकी तीव्रता 3.3 मैग्नीट्यूड दर्ज की गई। इसके करीब डेढ़ घंटे बाद, सुबह 6 बजकर 29 मिनट पर दूसरा झटका आया, जो थोड़ा अधिक शक्तिशाली था और 3.6 मैग्नीट्यूड मापा गया। दोनों ही झटकों का केंद्र जमीन से लगभग 10 किलोमीटर नीचे रहा।

रुद्रप्रयाग जिले में भी सुबह 5:02 बजे भूकंप के झटके (EARTHQUAKE IN UTTARAKHAND) महसूस किए गए। यहां इसकी तीव्रता 3.06 मैग्नीट्यूड आंकी गई। भूकंप का केंद्र रुद्रप्रयाग शहर से करीब 10 किलोमीटर पूर्व दिशा में था। झटकों की अवधि लगभग 10 से 15 सेकंड रही, जिसके कारण कई घरों में बर्तन खनकने लगे और खिड़कियां हिलती नजर आईं।

EARTHQUAKE IN UTTARAKHAND
EARTHQUAKE IN UTTARAKHAND

इसके अलावा देश के अन्य हिस्सों में भी भूकंपीय गतिविधियां दर्ज की गईं। महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में सुबह 8:45 बजे अपेक्षाकृत तेज झटका महसूस किया गया, जिसकी तीव्रता 4.7 मैग्नीट्यूड रही, जो उत्तराखंड में आए झटकों से ज्यादा थी। वहीं नागालैंड के तुएनसांग इलाके में, जो म्यांमार सीमा के पास स्थित है, सुबह 5:25 बजे हल्का भूकंप दर्ज किया गया, जिसकी तीव्रता 2.7 मैग्नीट्यूड रही। इसी क्षेत्र के पास म्यांमार में भी तड़के 3:40 बजे 3.5 मैग्नीट्यूड का भूकंप आया था।

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जानिए EARTHQUAKE के बारे में और बढ़ाइए जानकारी

भूकम्प (EARTHQUAKE), जिसे आम भाषा में भूचाल भी कहा जाता है, पृथ्वी की सतह के अचानक हिलने की घटना है। यह तब होता है जब पृथ्वी के स्थलमंडल के भीतर संचित ऊर्जा एकाएक मुक्त हो जाती है और उससे निकली भूकंपीय तरंगें जमीन तक पहुंचती हैं। कई बार ये झटके बेहद तेज होते हैं, जो कुछ ही पलों में लोगों को गिरा सकते हैं और बड़े शहरों तक को भारी नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखते हैं।

EARTHQUAKE IN UTTARAKHAND
EARTHQUAKE
  • EARTHQUAKE की तीव्रता को मापने के लिए सीस्मोग्राफ नामक यंत्र का उपयोग किया जाता है। सामान्यतः इसे रिक्टर पैमाने या आघूर्ण परिमाण के आधार पर आंका जाता है। 3 या उससे कम तीव्रता वाले भूकम्प अक्सर महसूस नहीं होते, जबकि 4 या उससे अधिक तीव्रता के झटके बड़े इलाके में असर डाल सकते हैं।
  • EARTHQUAKE का जो बिंदु पृथ्वी के अंदर होता है, जहां से यह शुरू होता है, उसे अवकेन्द्र या हाइपोसेन्टर कहा जाता है, जबकि इसके ठीक ऊपर सतह पर स्थित बिंदु को उपरिकेन्द्र कहा जाता है।
  • टेक्टोनिक प्लेटों के बीच या उनके भीतर बनने वाला दबाव भी भूकम्प का कारण बनता है। कई बार यह दबाव धीरे-धीरे बढ़ता रहता है और अचानक टूटकर ऊर्जा के रूप में बाहर आता है, जिससे झटके महसूस होते हैं। कुछ भूकम्प प्लेट सीमाओं से दूर भी आते हैं, जहां लंबे समय से जमा तनाव अचानक मुक्त होता है।
  • गहराई के आधार पर भूकम्प को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाता है। 70 किलोमीटर से कम गहराई वाले भूकम्प उथले माने जाते हैं और ये अधिक नुकसानदेह होते हैं। 70 से 300 किलोमीटर के बीच वाले मध्य गहराई के और 300 से 700 किलोमीटर तक के भूकम्प गहरे केंद्र वाले होते हैं। खासकर सबडक्शन जोन में, जहां एक प्लेट दूसरी के नीचे धंसती है, वहां गहरे भूकम्प देखने को मिलते हैं।
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  • ज्वालामुखी क्षेत्रों में भी भूकम्प आम हैं। यहां यह टेक्टोनिक हलचलों या लावा के प्रवाह के कारण होते हैं और कई बार ज्वालामुखी विस्फोट का संकेत भी देते हैं।
  • EARTHQUAKE के प्रभाव व्यापक और कई स्तरों पर होते हैं। सबसे पहले जमीन में कंपन और दरारें पड़ती हैं, जिससे इमारतों, पुलों और अन्य संरचनाओं को नुकसान होता है। इसकी तीव्रता भूकम्प की शक्ति, उपरिकेन्द्र से दूरी और स्थानीय भूगर्भीय स्थितियों पर निर्भर करती है। कुछ क्षेत्रों में नरम मिट्टी होने के कारण झटकों का असर और बढ़ जाता है, जिसे स्थानीय प्रवर्धन कहा जाता है।
  • EARTHQUAKE के कारण भूस्खलन और हिमस्खलन जैसी घटनाएं भी हो सकती हैं, जो खासकर पहाड़ी इलाकों में भारी तबाही मचाती हैं। इसके अलावा, बिजली लाइनों के टूटने से आग लगने का खतरा रहता है और अगर जल स्रोत भी क्षतिग्रस्त हो जाएं तो आग पर काबू पाना मुश्किल हो जाता है।
DevbhoomiNews Desk
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Abhishek Semwal is Postgraduate in Mass Communication with over three years of experience across digital and print media. Covering a wide range of subjects, with a strong focus on local and regional issues, delivering clear, insightful and engaging content.
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