/ Mar 23, 2026

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MIDDLE EAST CRISIS पर पीएम मोदी का लोकसभा में संबोधन: “डिप्लोमेसी और डायलॉग ही समाधान”

MIDDLE EAST CRISIS: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी गंभीर सैन्य संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर बढ़ते खतरों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज लोकसभा में देश को संबोधित किया। लगभग 25 मिनट के अपने विशेष संबोधन में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत युद्ध के इस माहौल में अपनी ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क है। पीएम ने जोर देकर कहा कि ‘होर्मुज जलडमरूमध्य‘ जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में कोई भी रुकावट भारत को स्वीकार्य नहीं है और सरकार हर परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार है।

MIDDLE EAST CRISIS के बाद ऊर्जा सप्लायर्स का हुआ विस्तार

प्रधानमंत्री ने सदन को जानकारी दी कि पिछले एक दशक में भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए विदेशों पर निर्भरता के जोखिम को कम करने के लिए ‘डायवर्सिफिकेशन’ (विविधता) की नीति अपनाई है।

  • 27 से 41 देश: पीएम ने बताया कि 11 साल पहले भारत केवल 27 देशों से कच्चा तेल और गैस खरीदता था, लेकिन आज यह संख्या बढ़कर 41 हो गई है। इससे किसी एक क्षेत्र में तनाव होने पर भी भारत की सप्लाई चेन सुरक्षित रहती है।

  • स्ट्रैटिजिक रिजर्व: भारत के पास वर्तमान में 53 लाख मीट्रिक टन का ‘स्ट्रैटिजिक पेट्रोलियम रिजर्व’ तैयार है, जबकि 65 लाख मीट्रिक टन के अतिरिक्त रिजर्व पर तेजी से काम चल रहा है।

  • घरेलू विकल्प: पीएम ने रेलवे के शत-प्रतिशत विद्युतीकरण और पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिक्सिंग का हवाला देते हुए कहा कि इन कदमों से भारत ने अरबों लीटर तेल की बचत की है।

MIDDLE EAST CRISIS के दौरान होर्मुज संकट और समुद्री गलियारों की सुरक्षा

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जहाँ से भारत का अधिकांश तेल और गैस आता है, वहाँ जहाजों की आवाजाही पर पड़ रहे असर को लेकर पीएम ने गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा, “कमर्शियल जहाजों पर हमला और अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में रुकावट डालना अस्वीकार्य है।” भारत ने अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए वैश्विक सहयोगियों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखा है। पीएम ने खुलासा किया कि कूटनीतिक प्रयासों के चलते ही होर्मुज में फंसे कई भारतीय जहाज सुरक्षित स्वदेश लौट चुके हैं।

MIDDLE EAST CRISIS
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भारतीयों की सुरक्षा: 3.75 लाख लोगों की घर वापसी

पश्चिम एशिया में रह रहे लगभग एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा को सरकार ने अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। पीएम ने आंकड़े साझा करते हुए कहा कि अब तक 3 लाख 75 हजार भारतीय सुरक्षित देश लौट चुके हैं। इसमें अकेले ईरान से लौटे हजारों भारतीय शामिल हैं, जिनमें 700 से अधिक मेडिकल छात्र हैं।

अन्न भंडार और किसानों की चिंता

MIDDLE EAST CRISIS के कारण वैश्विक स्तर पर खाद (फर्टिलाइजर) की कीमतों में आई भारी तेजी का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि सरकार ने किसानों पर इसका बोझ नहीं पड़ने दिया है।

  • सस्ता यूरिया: जब दुनिया में यूरिया की बोरी 3000 रुपये तक पहुँच गई, तब भी भारत के किसानों को यह 300 रुपये से कम में मुहैया कराई गई।

  • नेनो यूरिया और सोलर पंप: पीएम ने बताया कि 22 लाख से ज्यादा सोलर पंप और ‘मेड इन इंडिया’ नेनो यूरिया के विकल्प ने कृषि क्षेत्र को मजबूती दी है। भारत के पास वर्तमान में पर्याप्त अन्न भंडार मौजूद है।

MIDDLE EAST CRISIS
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डिप्लोमेसी ही एकमात्र रास्ता: शांति की अपील

MIDDLE EAST CRISIS को लेकर भारत की भूमिका स्पष्ट करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने पश्चिम एशिया के देशों के प्रमुखों से व्यक्तिगत रूप से बात की है। उन्होंने कहा, “यह युद्ध का युग नहीं है। बातचीत और कूटनीति ही इस समस्या का एकमात्र समाधान है।” भारत ने नागरिकों और पावर प्लांट जैसे नागरिक बुनियादी ढांचों पर हमलों का कड़ा विरोध किया है।

अंत में, पीएम ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार ने एक ‘इंटर मिनिस्ट्रियल ग्रुप’ बनाया है जो हर दिन आयात-निर्यात और सप्लाई चेन की निगरानी करता है। उन्होंने देशवासियों को विश्वास दिलाया कि भारत का भविष्य सुरक्षित है और अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले ऊर्जा क्षेत्र को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।

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