/ Feb 24, 2026

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उत्तराखंड में सरकारी कर्मचारियों के तबादलों पर कुछ समय की रोक, ये हैं कारण

UTTARAKHAND EMPLOYEE TRANSFER: उत्तराखंड में हर साल अप्रैल से शुरू होने वाला ‘तबादला सीजन’ इस बार करीब 45,000 सरकारी कर्मचारियों के लिए खामोश रहेगा। केंद्र सरकार और भारत निर्वाचन आयोग के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स को देखते हुए राज्य सरकार ने इस साल बड़े पैमाने पर तबादलों को टालने का निर्णय लिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने विशेष रूप से राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि जनगणना और मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य में लगे कार्मिकों का स्थानांतरण न किया जाए।

UTTARAKHAND EMPLOYEE TRANSFER: गृह मंत्रालय का अनुरोध और मुख्य वजह

उत्तराखंड में इस साल दो बड़े राष्ट्रीय कार्यक्रम एक साथ होने जा रहे हैं- जनगणना 2026 और मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)। इन दोनों कार्यों को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए प्रशिक्षित मैनपावर की आवश्यकता है। गृह मंत्रालय और जनगणना निदेशालय का मानना है कि यदि इस बीच कर्मचारियों के तबादले किए जाते हैं, तो नई नियुक्तियों को ट्रेनिंग देने और पूरी प्रक्रिया को समझने में समय बर्बाद होगा, जिससे महत्वपूर्ण डेटा संकलन में देरी हो सकती है।

UTTARAKHAND EMPLOYEE TRANSFER
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UTTARAKHAND EMPLOYEE TRANSFER: जनगणना के लिए 34,000 कर्मचारियों की तैनाती

प्रदेश में जनगणना का कार्य दो चरणों में होना है। पहले चरण के तहत 25 अप्रैल से 24 मई तक ‘मकान सूचीकरण एवं गणना’ का कार्य प्रस्तावित है। जनगणना कार्य निदेशालय की निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव के अनुसार, इस चरण के लिए करीब 34,000 कर्मचारियों की जरूरत होगी। इसके साथ ही, सितंबर महीने में राज्य के हिमाच्छादित (Snowbound) क्षेत्रों में भी जनगणना होनी है। इन सभी कार्यों के लिए कर्मचारियों की ट्रेनिंग शुरू हो चुकी है, इसलिए इनके तबादलों पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।

UTTARAKHAND EMPLOYEE TRANSFER
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एसआईआर (SIR) के लिए 12,000 बीएलओ और अधिकारी

निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया भी अप्रैल महीने में ही शुरू होने की संभावना है। इसमें प्रदेश के कुल 11,733 पोलिंग बूथों पर तैनात बीएलओ (Booth Level Officer) समेत 12,000 से अधिक कर्मचारी शामिल होंगे। बीएलओ की जिम्मेदारी मुख्य रूप से शिक्षक और आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियां निभा रही हैं। चूंकि ये कर्मचारी पहले ही प्री-एसआईआर (Pre-SIR) की प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं और उन्हें सिस्टम की अच्छी समझ हो गई है, इसलिए आयोग उन्हें वर्तमान तैनाती स्थल पर ही बनाए रखना चाहता है।

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