USA TARIFF: अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और न्यायपालिका के बीच टकराव एक नए चरम पर पहुँच गया है। शुक्रवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा लगाए गए ग्लोबल टैरिफ को ‘असंवैधानिक’ बताते हुए रद्द कर दिया। हालांकि, इस फैसले के महज तीन घंटे बाद ही राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए दुनिया भर से आने वाले सामान पर 10% का नया ‘ग्लोबल टैरिफ’ लगाने का आदेश जारी कर दिया। यह नया आदेश 24 फरवरी की आधी रात से लागू होगा और फिलहाल 150 दिनों के लिए प्रभावी रहेगा।

USA TARIFF पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला: टैरिफ लगाना राष्ट्रपति का नहीं, संसद का अधिकार
सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि अमेरिकी संविधान के तहत टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को नहीं, बल्कि संसद (कांग्रेस) को है। कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन को फटकार लगाते हुए कहा कि अमेरिका दुनिया के हर देश के साथ युद्ध की स्थिति में नहीं है, इसलिए ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ (IEEPA) का इस्तेमाल कर इस तरह के व्यापक टैरिफ नहीं लगाए जा सकते।

कोर्ट के इस फैसले ने दो बड़ी श्रेणियों के टैरिफ को निरस्त कर दिया है। इसमें पहला ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ था, जिसके तहत चीन पर 34% और बाकी दुनिया पर 10% बेसलाइन टैरिफ लगाया गया था। दूसरा, कनाडा, चीन और मैक्सिको पर लगाया गया 25% टैरिफ था, जिसे फेंटेनाइल तस्करी रोकने के नाम पर लागू किया गया था। हालांकि, स्टील और एल्युमिनियम पर लगे पुराने टैरिफ अलग कानूनों के कारण जारी रहेंगे।

ट्रम्प की तीखी प्रतिक्रिया: जजों को बताया ‘देश के लिए कलंक’
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नाराज राष्ट्रपति ट्रम्प ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जजों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने फैसले को “निराशाजनक” बताते हुए कहा, “मुझे अदालत के कुछ जजों पर शर्म आती है। वे देश के लिए कलंक हैं और उनमें सही काम करने की हिम्मत नहीं है।” ट्रम्प ने आरोप लगाया कि जज ‘कट्टर वामपंथियों के पालतू’ हैं और विदेशी ताकतों के प्रभाव में काम कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने उन तीन जजों की तारीफ की जिन्होंने फैसले के विरोध में (अल्पमत में) अपना मत दिया था।

भारत पर 18% से घटकर 10% रह जाएगा टैरिफ
इस पूरे कानूनी विवाद के बीच भारत के लिए एक महत्वपूर्ण राहत की खबर सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, ट्रम्प के नए 10% ग्लोबल टैरिफ आदेश के बाद भारत पर लगने वाला प्रभावी टैरिफ 18% से घटकर अब केवल 10% रह जाएगा। ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि पीएम मोदी के साथ उनके संबंध बहुत अच्छे हैं और भारत के साथ हुए अंतरिम व्यापार समझौते में कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने कहा, “भारत टैरिफ देगा और हम नहीं देंगे, लेकिन डील पहले की तरह ही बनी रहेगी।”

सेक्शन 122 और ‘ट्रेड एक्ट 1974’ का सहारा
राष्ट्रपति ट्रम्प ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की काट के तौर पर ‘ट्रेड एक्ट 1974’ की धारा 122 का सहारा लिया है। यह कानून राष्ट्रपति को अधिकार देता है कि यदि देश को व्यापार घाटे या आर्थिक संकट का खतरा हो, तो वह 150 दिनों के लिए अस्थायी टैरिफ लगा सकता है। 55 साल पहले तत्कालीन राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने भी भुगतान संतुलन (बैलेंस ऑफ पेमेंट) ठीक करने के लिए इसी तरह का 10% ग्लोबल टैरिफ लगाया था।

ट्रम्प प्रशासन का दावा है कि इस 10% टैरिफ से अमेरिकी डॉलर के बाहर जाने के बहाव को रोका जा सकेगा और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, कुछ आवश्यक वस्तुओं जैसे दवाइयां, महत्वपूर्ण खनिज, बीफ, टमाटर, संतरा और कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स को इस टैरिफ से छूट दी गई है। एक बड़ा सवाल उन 200 अरब डॉलर को लेकर है जो ट्रम्प प्रशासन ने पिछले साल से अब तक टैरिफ के रूप में वसूले हैं। सुप्रीम कोर्ट ने रिफंड पर कोई स्पष्ट आदेश नहीं दिया है। ट्रम्प ने साफ कर दिया है कि उनकी सरकार किसी भी कंपनी को पैसा वापस नहीं करेगी।

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