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यूनियन बजट 2026-27: कैंसर की दवाओं से लेकर हवाई सफर तक, जानें क्या हुआ सस्ता और क्या महंगा

INDIA BUDGET 2026: केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 ने देश की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर सीधा असर डाला है। इस बजट में सरकार ने इम्पोर्ट ड्यूटी और कस्टम ड्यूटी में कई बदलाव किए हैं, जिसका असर दवाइयों, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा और विमानन क्षेत्र पर पड़ने वाला है। बजट के प्रावधानों के अनुसार, अब कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज पहले के मुकाबले किफायती हो जाएगा, वहीं दूसरी ओर शराब और शेयर बाजार में ट्रेडिंग करना महंगा हो सकता है। सरकार का मुख्य ध्यान घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और देश को विभिन्न क्षेत्रों में ग्लोबल हब बनाने पर केंद्रित है।

INDIA BUDGET 2026
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INDIA BUDGET 2026: दवाइयां और स्वास्थ्य सेवाएं होंगी किफायती

आम जनता को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 17 जीवन रक्षक दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को पूरी तरह से हटा दिया है। यह कदम उन परिवारों के लिए एक बड़ा सहारा बनेगा जो कैंसर के इलाज के लिए महंगी विदेशी दवाओं पर निर्भर रहते हैं। इसके साथ ही, सात दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए विदेश से मंगवाई जाने वाली दवाओं और विशेष भोजन पर भी अब कोई टैक्स नहीं लगेगा। स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के लिए सरकार ने देश में पांच क्षेत्रीय मेडिकल टूरिज्म हब बनाने का भी प्रस्ताव रखा है, जिससे न केवल इलाज सस्ता होगा बल्कि चिकित्सा पर्यटन के क्षेत्र में भी भारत की स्थिति मजबूत होगी।

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इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल और घरेलू सामान की कीमतों में बदलाव

घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में भी राहत दी है। अब माइक्रोवेव ओवन बनाने में इस्तेमाल होने वाले खास पुर्जों पर कस्टम ड्यूटी कम कर दी गई है, जिससे आने वाले समय में इनकी कीमतों में गिरावट आने की उम्मीद है। मोबाइल और अन्य गैजेट्स के उत्पादन को गति देने के लिए भी कई महत्वपूर्ण पुर्जों पर ड्यूटी घटाई गई है। इसके अतिरिक्त, विदेश से अपने व्यक्तिगत उपयोग के लिए सामान मंगवाना अब सस्ता होगा क्योंकि सरकार ने व्यक्तिगत उपयोग की वस्तुओं पर लगने वाले टैक्स को 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया है।

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ऊर्जा क्षेत्र और पर्यावरण संरक्षण पर जोर

पर्यावरण और अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए बजट में ईवी बैटरी और सोलर पैनल के कच्चे माल को टैक्स फ्री करने का निर्णय लिया गया है। लिथियम-आयन बैटरी बनाने वाली मशीनों पर टैक्स छूट का दायरा बढ़ाया गया है और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के लिए जरूरी सामान पर ड्यूटी खत्म कर दी गई है। सोलर ग्लास बनाने में उपयोग होने वाले सोडियम एंटीमोनेट पर भी अब कोई ड्यूटी नहीं लगेगी। इन कदमों से देश में सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक वाहनों का उत्पादन सस्ता होगा, जिससे उपभोक्ताओं को भविष्य में लाभ मिल सकता है।

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विमानन क्षेत्र और पर्यटन को मिली नई उड़ान

एविएशन सेक्टर के लिए यह बजट कई बड़ी उम्मीदें लेकर आया है। सरकार ने विमान निर्माण और उनके रखरखाव (MRO) के लिए मंगवाए जाने वाले कलपुर्जों पर कस्टम ड्यूटी हटा दी है। इससे न केवल विमान खरीदने की लागत कम होगी, बल्कि भारत में विमानों की मरम्मत की सुविधाएं भी बेहतर होंगी। नागरिक उड्डयन क्षेत्र में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए टियर-2 और टियर-3 शहरों में बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया गया है। इसके अलावा, विदेश यात्रा के लिए टूर पैकेज बुक करना अब सस्ता हो जाएगा क्योंकि टीसीएस (TCS) की दर को घटाकर सीधा 2 प्रतिशत कर दिया गया है।

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निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कच्चे माल पर छूट

देश के निर्यात को मजबूती देने के लिए लेदर, टेक्सटाइल और समुद्री उत्पादों (सी-फूड) के क्षेत्र में विशेष घोषणाएं की गई हैं। सी-फूड एक्सपोर्ट के लिए ड्यूटी फ्री इम्पोर्ट की सीमा को 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 3 प्रतिशत कर दिया गया है। लेदर और सिंथेटिक जूतों के साथ-साथ ‘शू अपर्स’ के एक्सपोर्ट पर भी टैक्स छूट दी जाएगी। जब कंपनियों को कच्चा माल सस्ता मिलेगा, तो उत्पादन की लागत कम होगी। यदि कंपनियां इस बचत का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाती हैं, तो बाजार में जूतों और कपड़ों के दाम कम हो सकते हैं या स्थिर बने रह सकते हैं।

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INDIA BUDGET 2026: इन चीजों के लिए ढीली करनी होगी जेब

एक तरफ जहां कई चीजें सस्ती हुई हैं, वहीं कुछ क्षेत्रों में टैक्स बढ़ाया भी गया है। शराब पर लगने वाले टीसीएस को 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है, जिसका सीधा असर इसकी कीमतों पर पड़ सकता है। शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए भी खबर चुनौतीपूर्ण है। फ्यूचर ट्रेडिंग पर लगने वाले सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि ऑप्शंस के लिए इसे 0.15 प्रतिशत किया गया है। इसका मतलब है कि अब शेयर बाजार में हर ट्रांजैक्शन के लिए निवेशकों को पहले के मुकाबले अधिक पैसे चुकाने होंगे।

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दामों पर असर और जीएसटी का महत्व

बजट में की गई घोषणाओं का असर बाजार में दिखने में थोड़ा समय लग सकता है। जानकारों के अनुसार, टैक्स की नई दरें नए स्टॉक पर लागू होती हैं, इसलिए दुकानों पर रखे पुराने सामान पुरानी कीमतों पर ही मिलेंगे। साथ ही, कीमतों का घटना या बढ़ना पूरी तरह से कंपनियों के फैसले और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की कीमतों पर भी निर्भर करता है। वर्तमान में ज्यादातर वस्तुओं के दाम जीएसटी काउंसिल द्वारा तय किए जाते हैं। 22 सितंबर 2025 से जीएसटी के स्लैब को तर्कसंगत बनाकर 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत कर दिया गया था, जिससे घी, पनीर, कार और एसी जैसी कई चीजों की कीमतों पर पहले ही असर पड़ चुका है।

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Abhishek Semwal is Postgraduate in Mass Communication with over three years of experience across digital and print media. Covering a wide range of subjects, with a strong focus on local and regional issues, delivering clear, insightful and engaging content.
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